ब्लॉगसेतु

हम मिले सालों बादऔर शिष्टाचार में पूछ ही लियाकैसे हो?जवाब में ठीक हूँ कहने की हिम्मतचाहकर भी नही जुटाई जा सकीक्योंकि ठीक वैसा अब कुछ भी नहीहम जानते थे कितितलियों के पंख तोड़ लिए गए हैंउपवन के पक्षी अब उड़ना भूल चुके हैंझरनों में पानी की जगह अब काई ने ले ली हैऔर रातों...
किसी अज्ञात शत्रु की तरह पीछे से वार करता है अतीत बिल्कुल हृदयाघातकी तरह आकर लिपट जाता हैस्मृतियों के हथौड़े जब चलना शुरू करते हैंतो दिमाग़ की नसों को लहूलुहानकर देते हैंकमीज़ पर लगा दाग हम जितना छुपाते हैंवो उतना ही गाढ़ा होता जाता हैकिशोरावस्था में आई मोच कोहम जवानी...
 मेरी उदास कविताओं कोजीवंत बना देती हो तुमपढ़ने के अनोखे अंदाज सेजीने की मृत इच्छा कोपल भर में बदल देती होकंधे पर हाथ भर रख करकिसी नास्तिक को भीमंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ा दोईश्वर की भेजी एक दूत हो तुमऔर मैं ख़ुद के होने की वजह ढूँढ़तालौह पुरुष होने का ढोंग रचता हुआहार...
किसी एक इच्छा के पूरी ना होने की उदासी कितनी और चीजों के मिलने की ख़ुशी को निग़ल जाती है। ऐसे ही किसी ख़ास रिश्ते के ख़त्म होने के बाद कोई और रिश्ता बनाने की हिम्मत हम कभी नही जुटा पाते।यूँ तो रिश्तों की कोई उम्र नही होती। कई बार ये बस कुछ सालों के मेहमान होते हैं और क...
मेरे मन की सारी मुश्किलों को कितना आसान बना देती हो तुम अपने मुस्कान के अनोखे जादू सेकुछ तो है करिश्माई तुम्हारे भीतरजो हारी हुई मुरझाई साँसों मेंताजी हवा का झोंका भरता हैतुम बिल्कुल उन तितलियों जैसी होजो अनजान हैं अपनों मोहक रंगों सेजिन्हें नही पता कि उनको छूने की...
कुछ तस्वीरें हम अपने पास नही रख सकते क्योंकि उन तस्वीरों को देखने का हक़ हम खो चुके होते हैं। कुछ सपनों की तस्वीरें नही बनाई जा सकती क्योंकि उनका कोई आकार नही होता। ऐसे में सिर्फ़ एक ही ज़रिया बचता है उन सबको देखने का और वो हैं बंद आँखें।जिन्हें हम खुली आँखों से सबके...
विकसित और विकासशील बनने की होड़ के बीच मैंने खोजी बनना चुना। जहाँ लोग बातें बनाना सीख रहे थे वहीं मैं चुप रहकर बातों के मतलब खोजने में लगा रहा। जब आगे बढ़ने के लिए लोग आवाज़ को ताकत बना रहे थे तब मैं ख़ुद में सुनने की क्षमता को विकसित करने में लगा हुआ था।ग़ुस्सैल और झल्...
दुःखों का कोई तय ठिकाना नही होताहम सुख ढूँढ़ते हैं, दुःख तक पहुँच जाते हैं ।सुख बंजारे हैं भटकते रहते हैंदुःख जगह ढूँढ़ते हैं और बस जाते हैं ।सुख के दिन छोटे हुआ करते हैंदुःख के हिस्से लंबी रातें हैं ।हम सुख में कितना कुछ भूलने लगते हैंदुःख आते ही सब कुछ पहचानते हैं...
सपने तब तक आकर्षक होते हैं जब तक वो पूरे ना हो जाएं और जो सच हो जाए वो सपना कैसा।ये बात सच है कि पार्क की बेंच पर बैठे हुए तुमने अपना सिर मेरे कंधे पर झुका दिया था और तुम्हारे नर्म हाथों को अपने हाथों में लेते हुए मैंने हमेशा के लिए उन्हें थामने का वादा किया था। पर...
दूरियाँ- यही एक शब्द है जो अब हमारे बीच रह गया है।पता नही ये एक बहाना है या सच में कोई कारण जो हमें आगे बढ़ने से रोक देता है।दूरियाँ क्या है? हमारे बीच का ये फ़ासला। क्या इसी को हम दूरी कहते हैं ? मुझे तो नही लगता।कोई फ़ासला तब तक ही फ़ासला रहता है जब तक हम उसे तय नही...