ब्लॉगसेतु

माना उदास शाम हैं मगर घबराओ नही,फिर सूरज निकलेगा,अंधेरो को गले लगाओ नही,ये बुजदिलो और अंधो की भीड़ हैं जो हावी हैं,तुम्हें ही बोलेंगे,इनको आईना दिखाओ नही,दिन जब ध्याड़ी हो,लॉकडाउन आनंद विहार हैंटीवी में बैठकर हालात का अंदाज़ा लगाओ नही,शहर की समझदारी,मासूमियत छीन लेगी,...
एहसास की पूजा जज्बात की माला हो,मन मंदिर में स्थापित,साधना का शिवाला हो,..प्रेम लगन में पागल मैं बेसुध गोपी सी,तुम निष्ठर चंचल नटखट नंदलाला हो,सर्द गहरी रातो का तन्हा मुसाफ़िर सा,अलाव तपते हाथो का तुम सहारा हो,राह मेरी काली,जीवन घनघोर अंधेरा हैं,सीने मैं छुपा रखा एक...
दर्द ने किस कदर इंतेहा की हैं,हमने तुमसे कोई शिकायत कहां की हैं,जिस तरह हमने हज़ार मिन्नते कीतुमने वैसे अभी इल्तेज़ा कहा की हैंबैठ कर वही घण्टो खुदको ढूंढा हैंतेरे बाद भी इश्क़ की हर रेशम अदा की हैंजब भी एक कतरा नमी तेरी आंखों में देखी हमने अपने दिल की हर आरज़ू दबा दी...
खुद से जिद करो,जहन से सवालात करो,जिंदा हो तो आदमी की तरह बात करोलोग खीच खसोट कर ले जाएंगे,अपनी हदो में अपनी हदो को बिसात करो,ये बेरोजगारी और भूख का रोना मत रोओथोड़ी मेहनत करो फिर बात करो,एक बार जो तुम अपना आसमा ढूंढ लो,उसे पाने को फिर दिन रात करो,सिर्फ वज़ू का नाम नह...
मुश्किलो के बादल हैं,बेकशी के साये है,हमे घायल जानकर कई सियार निकल आये हैंतुम जुदाई के खौफ से मुझे डरा नही सकतेकई रिश्ते मैंने अपनी  जिद में दफ़नाए है,दिल्ली के ताज में न जाने कैसा जादू हैं,चींटियों के भी पर निकल आये हैं,रोज का जिनसे दुआ सलाम मेरे मोहल्ले...
कई बार जो जहर हम दोनों ने साथ-साथ पीया,चंद रोज की अनबन में तुमने जमाने को उगल दिया..बेकशी ने जैसे तैसे बेक़रारी को जब समझा लिया,नया बहाना बनाकर उसने फिर इरादा बदल दिया,आज भी अपने फैसले पे हरसू पछताता हूँ,उस मोड़ पर क्यो हमने अपना रास्ता बदल दिया,तुम्हारा गुस्सा तुम्ह...
चट्टाने टूट जाती हैं समुन्दर डूब जाते हैंकभी-कभी वो भी हमसे तबियत पूछ जाते हैं,बहुत दिनों बाद गाँव आया तो एहसास हुआ,झुर्रियों में सब शिक़वे शिकायत छुप जाते हैंबिजलियों की सजिश या बादलो की शरारत हैं,मेरे पुश्तें  भरी बारिशो में ही टूट जाते हैं,मैं सदियों ख़्वाहिश...
मेरी इस प्यास की कही तो ताब होगीं,एक चिंगारी की कही आग होगीं,मेरी हर बूँद में,इश्क़ का समुन्दर हैं,प्यासा रख कर,तू भी कहाँ आबाद होगीं,मत करो फ़ोन बारहां नंबर बदल-बदल के,हमको-तुमको तकलीफें बेहिसाब होगीं,खामोश देखता हूँ मैं तेरी बदगुमानिया,कभी तो हद से पार मेरी बर्दास्...
दर्द में डूब के भी ख़िलाफ़त ना हुयी,ना हुयीं हमें तुमसे शिकायत ना हुयीं..रब्त उसके ने हज़ार बंदिशो पे मज़बूर कियाइतनी शर्तों पे हमसे मोहब्बत ना हुयीं,हज़ार फ़ोन करो,लाख़ इल्तेज़ा, कऱोड नख़रे,गोया कभी इतनी मेरी जान को आफ़त ना हुयीं,देश परदेश में,तेरी उम्मीद पर मैं टिका रहा,एक...
वक़्त बे वक़्त हर बात पें निकल आये आँसू,तेरे जाने के बाद कितना काम आए आसूँएक हम थे जो ख़ामोश ज़हर पी  गयें,तुमने जा-जा के लोगो को दिखायें आँसू,सारी दुनियादारी जो शाम के अंधेरे में भूल गयें,उन गुस्ताखियों ने कितने आँख रुलाये आँसू,आँखे सुख़ गयी,रोशनी भी जाती रही,तुम...