ब्लॉगसेतु

देर रात तक नुमाईश में प्रोग्राम जारी रहा,जनता मफ़लर,पंखी में सिमटती रही,नेताजी को सिगड़ी का पुख्ता इंतेज़ाम जारी रहा,लोग स्टार नाईट को तरसते रहे देर तक,उनका चुनावी पैगाम जारी रहा,मौत का कुँआ हो या नटनी का बैलेंस,भूख़ के वास्ते ज़िन्दगी का डांस जारी रहा,कौनसी गली में किस...
हम मोहब्बत करे वो दिल्लगी किया करे ,किसी के साथ ऐसा भी ना खुदा करे .....हर बार के जवाब में दिल तोड़ रहे हो ,मर ही ना जायें तो अब, क्या ख़त में लिखा करे....पास आकर जाना हम कितने दूर हो गये ,गोया इश्क में जरा-जरा फासले रखा  करे ...आज की रात सितारे मेरे कदमो में ह...
सुबह तक महती रही,मुझमेँ रात की रानी की तरह,मुझपे गुज़रना था जिसे जवानी की तरह..बहुत खुश थे जिससे पीछा छुड़ा के अमीर,याद रहा वो शख्श दादी की कहानी की तरह,एक शमा अकेले तूफ़ान से लड़ती रही,बुतो में खोजते रहे लिखा था जो पेशानी की तरह,मेरी बरबादियाँ कुछ काम तो जरूर आयीं,बच्...
चूड़ी काज़ल कंगन और ऑंसू,बारिश कोहरा बादल और आँसू,पीपल पतझड़ जेठ दुपहरी,झूले साथी सावन और आँसू,मेरी पीड़ा मेरा दुखड़ा बोझ भयंकर,मिश्री बातें तेरी जियरा सदल और आँसूलकड़ी गठ्ठर,रोटी लून सक्करगैय्या ग्वाले,बन्सी जंगल और आँसूफावड़ा कुटला ,खेत का टुकड़ा,मुठठी फ़सलें,भतेर दंगल और...
चिता की अग्नि में हर शाम मौन लेट जाता हूँमैं आज भी ऐसे तेरा वचन निभाता हूँ,थक जाते हैं सब पुतले दिनभर की भेड़चल से,में जागकर अपना फर्ज निभाता हूँ,कोई सूरज अपने ताक़त में जब मग़रूर दिखा,बहुत सादगी मैं उसको दिया दिखता हूँजमाने भर की जिलालत से तो लड़ भी लेता हूँ,घर आकर तु...
दर्द में डूब कर कुछ करार आया हैं,जुबां पर सच पहली बार आया हैं...मंज़िले अभी दूर हैं करवा बढ़ता रहे,बिजलिया गिरी नही,बस अंधेरा सा छाया हैं,हौसला न तोड़ना,हाथ अब ना छोड़ना,रात अभी बाकी हैं,कोई सितारा टिमटिमाया हैं,घर हमारे छीने हैं,सकुनो चैन तबाह किये,इन हसरतो ने हमे कित...
कुछ अनकही बातों को बोल लेता हूँ,कभी-कभी पुरानी डायरी खोल लेता हूँ,हरेक लब्ज़ में लम्हो के समुन्दर है,जाने कैसे कागज़ में सब उड़ेल देता हूँ,किस नकाब में कौन सा चेहरा पोशीदा हैं,बातो से लोगो का वज़न तोल लेता हूं ,हैरान होता हूँ जब अपनी खुदगर्ज़ी से,कितना एहसास बचा हैं दिल...
बड़ी मुश्किल से इस बार खड़ा हूँ मैं,टूट-टूट कर कई बार जुड़ा हूँ मैं..जहाँ हूँ मैं बस तबाही हैं बर्बादी हैं,लोग ये भी कहते हैं बहुत कर्मजला हूँ मैं,बनाने वाले घर के,कबके मुझे भूल गये, नींव का पत्थर ख़ाक में दबा हूँ मैं,तुम अगर मुखातिब भी हो तो आँसू बरस पड़े,थाम कर बदलो क...
आईने तोड़ देने से शक्ले नही बदला करतीसिर फोड़ने से अकले नही बदला करती,कई बार मैंने किसानों को सूली पे रखके देखा हैंहमारे गांव की खुदगर्ज़ फसले नही बदला करती,लाख बार हज़ार कोशिस से जाहिर हैंवजह बदल देने से वसले नही बदला करती,तेरे जाने के ब...
इश्क़ की गहराई में उतारने में वक़्त लगा,टूट गया मगर बिखरने में वक़्त लगा...तूने मेरे नसीब में डूबना लिख तो दिया,बीच मझधार मगर पाँव धरने में वक़्त लगा,जब उसने कई बार मुझे  झूठ पीला दियामेरे गले से सच को उतरने में वक़्त लगा,तुम भी थे वक़्त भी शाम और मय भी,इतनी प्यास थ...