ब्लॉगसेतु

क्या हुआ जो तुम चालीस के पार हो गयी हो, थोड़ी सी झुर्रियां पड़ने लगी हैं पर उतनी ही खूबसूरत हो तुम अब भी, तुम्हारे चेहरे पे नूर है और आँखें नशीली हैं अब भी, तिरछी नज़रों से देखते हैं मनचले तुम्हें अब भी, तुम्हारी खूबसूरती पे मर मिटने को तैयार हैं कई अब भी, जब...
हथौड़ा चला, चलता रहा छेनी भी मचलती रही चोट पर चोट माथे से टपकता पसीना,पर वो हाथ रुकते नहींवो हाथ थकते नहींजिन्होने थामी हैहथौड़ा और छेनी,चंद सिक्कों की आस मेंअनवरत चलते वो हाथआग उगलते सूरज कोललकारते वो हाथ,क्या देखे हैं तुमने कभी ध्यान से वो हाथ??...
अहंकारी हूँ क्योंकि पुरुष हूँ मैं  सदियों से अहंकारी रहा है पुरुष  और कायम रहेगा ये अहंकार सदा, रावण से मेरी तुलना  कर सकते हो तुम  लेकिन मेरा वध करने के लिए  तुम्हे राम बनना होगा, और राम बनने का सामर्थ्य  तुममे भी नहीं है...
जागो उठो देखो सवेरा हो गया है पंछी गा रहे हैं फूल खिलने लगे हैं, अँधेरी रात बीत गयी अब रौशनी में नहा लो और अंतर के मैल को धो कर स्वच्छ निर्मल हो जाओ, अब तैयार हो जाओ तुम्हारा ही इंतज़ार है नियति तुम्हारी राह देख रही है तुम्हे अपनी मंज़िल पर पहुंचना है, अब समय...
ये जो उलझनें हैं जीवन की  मुझे इनके पार जाना है कुछ पाने की चाहत है  कही दूर खो जाना है, थक चुका अब तन  और भटक रहा है मन वो कौन सा है पथ जहाँ मुझे जाना है और मंज़िल को पाना है, जीवन मरण के इस चक्र से  अब मुक्त हो ज...
हमने भी खून बहाया कुछ तुमने भी बलिदान दिया  तब जाकर मिली हमें फिरंगियों से आज़ादी, भगत सिंह ने फंदा चूमा तो असफाकउल्ला भी शहीद हुए हुए क्या हिंदु मुस्लिम करते हो कुछ इंसानियत के काम करो,  पाकिस्तान को मारो गोली अब हिंदुस्तान की बात करो प...
ध्यान, साधना, सत्संग  से कोसों दूर कंक्रीट के जंगल में सांसारिक वासनाओं  और अहंकार तले आध्यात्म रहित वनवास भोग रहा हूँ इन दिनों, मैं फिर से लौट कर आऊँगा  जानता हूँ की तुम मुझे  माफ करोगे  और सहर्ष स्वीकार भी करोगे। 
लिखने के लिए  बाज़ुओं में ताक़त चाहिए और जिगर भी, वर्ना कलम तो हरेक के पास है। खाली जा सकता है वार तलवार का  और बंदूक की गोली भी दे सकती है धोखा  पर बहुत गहरा है वार कलम का  सीधे जिगर पर वार करती है कलम , बंदूक थामी है तुमने  तो...
आज एक पुरानी रचना फिर से....... एक मुल्क के सीने पर जब तलवार चल रही थी तब आसमाँ रो रहा था और ज़मी चीख रही थी, चीर कर सीने को खून की एक लकीर उभर आई थी उसे ही कुछ लोगों ने सरहद मान लिया, उस लकीर के एक तरफ जिस्म और दूसरी तरफ रूह थी, पर कुछ इंसान जिन्होंने जिस्म...
ऐ मेरे खुदा  माँ के बालों की सफेदी मुझे अच्छी नहीं लगती उसके चेहरे की झुर्रियाँ मिटा दे उसका हर ग़म दे दे मुझे  उसके चेहरे पे मुस्कुराहट सजा दे, उसी की दुआओं का असर है  कि गिर गिर के सम्हल जाता हूँ हर बार जानता हूँ हर वक़्त मेरी फिक्र रहती है उसे, ऐ...