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 पोस्ट लेवल : पुस्तक - समीक्षा
              क्वीन्स गैलरी, बकिंघम पैलेस में स्थित है ।द्वितीय विश्व- युद्ध में जर्मन द्वारा नष्ट किए महल में स्थित छोटे गिरजाघर वाले स्थान पर ही क्वींस गैलरी बनाई गई और 1962 ई॰ में इसे शाही संग्रह की कलाकृतियों के अवलोकनार्थ जन...
लंदन की Tate Britain Gallery  जो 1897 से1932 तक National Gallery of British Art और 1932 सेआज तक जिसे  Tate Gallery या Tate Britain के नाम से जाना जाता है लंदन में Millbank में City of Westminster में स्थित है ।इसका निर्माण 1893 ई॰ से शुरु हुआ था और 1897 ई...
 पोस्ट लेवल : कला-परिक्रमा
ऐ दोस्तअबके जब आना नतो ले आना हाथों मेंथोड़ा सा बचपनघर के पीछे बग़ीचे में खोद केबो देंगे मिल करफिर निकल पड़ेंगे हमहाथों में हाथ लिएखट्टे मीठे गोले कीचुस्की की चुस्की लेतेकरते बारिशों में छपाछपमैं भाग कर ले आउंगीसमोसे गर्म और कुछ कुल्हड़तुम बना लेना चाय तब तकअदरक &n...
ऐ दोस्तअबके जब आना नतो ले आना हाथों मेंथोड़ा सा बचपनघर के पीछे बग़ीचे में खोद केबो देंगे मिल करफिर निकल पड़ेंगे हमहाथों में हाथ लिएखट्टे मीठे गोले कीचुस्की की चुस्की लेतेकरते बारिशों में छपाछपमैं भाग कर ले आउंगीसमोसे गर्म और कुछ कुल्हड़तुम बना लेना चाय तब तकअदरक &n...
 पोस्ट लेवल : कविता
ऐ दोस्तअबके जब आना नतो ले आना हाथों मेंथोड़ा सा बचपनघर के पीछे बग़ीचे में खोद केबो देंगे मिल करफिर निकल पड़ेंगे हमहाथों में हाथ लिएखट्टे मीठे गोले कीचुस्की की चुस्की लेतेकरते बारिशों में छपाछपमैं भाग कर ले आउंगीसमोसे गर्म और कुछ कुल्हड़तुम बना लेना चाय तब तकअदरक &n...
यूँ ही लंदन में एयर पोर्ट पर चलते-चलते न्यूज़ पेपर उठा लिया और एक न्यूज़ पढ़ कर आश्चर्य- चकित हो गई ।कभी कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियों के लिए हम भारतीय सीधे पेशेन्ट को इंगलैंड या अमेरिका ले जाने की बात करने लगते थे जैसे कि वहाँ सारे डॉक्टर्स धन्वन्तरि ही हैं और हमारे...
जब वेकिसी अस्मिता को रौंदजिस्म से खेलविजय-मद के दर्प से चूरलौटते हैं घरों को हीतब चीख़ने लगते हैं अख़बारदरिंदगी दिखाता काँपने लगता हैटी वी स्क्रीनदहल जाते हैं अहसाससहम कर नन्हीं चिरैयों कोऑंचल में छुपा लेती हैं माँएं...और रक्तरंजित उन हाथों परतुम बाँधती हो राखीपकवा...
 पोस्ट लेवल : कविता
चुप रहोख़ामोश रहोसभ्य औरतें चुप रहती हैंकुलीन स्त्रियाँ लड़ती नहींभले घर की औरतें शिकायत नहीं करतींसहनशीलता ही औरत का गहनाऔर वे गहने पहन रही हैं ,निभा रही हैं दोनों कुलों की लाजपिटने का दर्दकलह का दर्दतानों का दर्दबच्चे जनने का दर्दरेप का दर्दएसिड फिंकने का दर्दचुप...
बरसों से दर्द पाले,दुखते दाँत को-पहले बेहोश किया उसनेफिर नुकीले नश्तरों सेविदीर्ण कर दींसारी रूट्स,अब दाँत डैड थादर्द का नामो निशान नहीं !फिर बारी थी आवरण की,उसने ठोक-पीट करएक नकली आवरणचढ़ा दिया हैहुबहू ...वही रंग, वही रूपअब खुश हूँ मैं-अपने डैड दाँत के साथदर्द से...
 पोस्ट लेवल : कविता