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       12 वीं शताब्दी में  वर्तमान कश्मीर के परिहास पूर्व में जन्में कल्हण के पिता हर्ष देव के दरबार में दरबारी थे। लोहार वंश का साम्राज्य था कश्मीर में। लोहार राजवंश कश्मीर 11वीं और 12वीं शताब्दी में राज करता था। लोहार वंश की स्थाप...
   भारत के इतिहास को काल्पनिक साबित करने का क्रम आज से नहीं बल्कि वर्षों से चल रहा है। विगत 70 वर्षों से तो यह बहुत तेजी से चला है। वामपंथी विचारक और लेखक भारत के अस्तित्व को ही न करते हैं।  वामपंथी इतिहासकारों ने तो हद ही कर दी भारतीय महानायक...
 पोस्ट लेवल : भारतीय इतिहास
        उपलब्धियां जब कभी सिर पर चढ़कर कत्थक करने लगे तो जानिए आप अपने मूल व्यक्तित्व से अलग होते चले जा रहे हैं। उपलब्धियां भ्रमित कर देती हैं पर बहुत सी शख्सियत ऐसी भी होती हैं जिनके सर पर उपलब्धियां न सवार हो पाती न कत्थक कर पाती उनमें ए...
अग्रिम आभार : विश्व संवाद केंद्र जबलपुर 1944 में अगर भारत आज़ाद मान लिया जाता तो देश की दशा कुछ और ही होती ऐसा सबका मानना है । उनको भारत की  स्वतन्त्रता भीख में नहीं साधिकार चाहिए थी । एक सच्चे राष्ट्रभक्त ने जगाई थी राष्ट्र प्रेम की वो ज्योति जो हरेक...
 मनुष्य के जीवन में बुद्धि एक ऐसा तत्व है जो कि विश्लेषण करने में सक्षम है। बुद्धि अक्सर मानवता और व्यवस्था के विरुद्ध ही सर्वाधिक सक्रिय होती है।       बुद्धि निष्काम और सकाम प्रेम के साथ-साथ मानवीय आवश्यक भावों पर साम्राज्य स्था...
( देश के युवाओं के नाम लेखक का खुला खत.....!) प्रति युवा साथियों               वंदे मातरम    युवा दिवस पर युवकों को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ  सकेतक मित्र बनकर कहना चा...
 हमारे जातीय बंधु भाई अवधेश कानूनगो जी के गांव में निवास करने वाले पैदल परिक्रमा पथ नर्मदा परिक्रमा के गांव के श्री जगदीश भाई ने 99 दिनों में पूर्ण की। जगदीश भाई ने श्री अवधेश जी को बताया कि वे जिस मार्ग से गुजरे उस को  दूरियों कितनी हैं । कृ...
भारत के हृदय स्थल में स्थित त्रिपुरी (जबलपुर) के महान कलचुरी वंश का तेरहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में अवसान हो गया था। फलस्वरूप सीमावर्ती शक्तियाँ इस क्षेत्र को अपने अधीन करने के लिए लालायित हो रही थी। अंतत: इस संक्रांति काल में एक वीर योद्धा जादों राय (यदु राय) ने...
http://sanskaardhani.blogspot.com/2021/02/blog-post_20.html "धर्म की परिभाषा को आधिकारिक रूप से समझने  की ज़रूरत"           गिरीश बिल्लोरे मुकुल    girishbillore@gmail.com       भारत...
#स्मृतियों_गलियारे_से    आज 28 दिसंबर 2004 है । रात गहरा रही है । वैसे भी मुझे तो दिसंबर का यह माह बहुत डराता है..!  कुछ दिनों पहले ही शायद 2 हफ्ते पहले मां सव्यसाची प्रमिला बिल्लोरे भोपाल चली गई थीं ।  10 दिन तक भंडारी हॉस्पिटल में...