ब्लॉगसेतु

खेतड़ी महाराज को लिखित अपने एक पत्र में विवेकानंद लिखते हैं - जीवन में एक ही तत्‍व है, जो किसी भी कीमत पर अमूल्‍य है - वह है प्रेम, अनंत प्रेम। ईश्‍वर अनिर्वचनीय प्रेम स्‍वरूप है। भारतीय दर्शन में सामान्‍यतया चार पुरूषार्थों की चर्चा मिलती है, धर्म, अर्थ, काम औ...
1900 के बाक्‍सर( ई.ख.च्‍वान - संयुक्‍त धार्मिक धूंसेबाज - कमर पर लाल पटटा बांधते थे ये, बाक्‍सर नाम योरोपियनों ने दिया , इनके अलावा एक अन्‍य ता.ताव.हवी समाज था जिसे खडगधारी समाज कहा जाता था जो बाद में बाक्‍सर का हिस्‍सा हो गया, इनका नारा था विदेशियों को निकाल दो। ख...
 पोस्ट लेवल : ठाकुर गदाधर सिंह चीन
जिस तरह निराला ने कविता को छंदों से मुक्त किया, केदारनाथ सिंह ने उदात्तता से मुक्त किया उसी तरह एक हद तक रघुवीर सहाय ने और ज्यादा समर्थ ढंग से विष्णु खरे ने उसे करुणा की अकर्मण्य लय से मुक्त किया है, और कविता को बचा लिया है अस्तित्व के संकट से। कवियों की बड़ी दुनिय...
लेखक की राजनीतिक दृष्टि साफ होनी चाहिए वरिष्‍ठ कवि विजेंद्र से कवि, पत्रकार कुमार मुकुल कीबात-चीत-राष्‍ट्रकवि और जनकवि जैसे संबोधन को आप किस तरह देखते हैं। हाल के दशकों में ना कोई राष्‍ट्रकवि कहलाया ना जनकवि। जबकि राष्‍ट्र और जन दोनों विकसित हुए हैं ? राष्ट्र कवि औ...
परिचय1933 में लोथल गुजरात में जन्‍मे और जयपुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले हिम्‍मत शाह कला के क्षेत्र में विश्‍वविख्‍यात नाम है। जग्‍गूभाई शाह के शिष्‍य श्री शाह मध्‍यप्रदेश सरकार के कालिदास सम्‍मान, साहित्‍यकला परिषद अवार्ड, एलकेए अवार्ड, एआइएफएसीएस अवार्ड दिल्‍ली...
 पोस्ट लेवल : हिम्‍मत शाह Himmat Shah
जब कोई प्रतिभा उद्बोधन के नये स्‍तरों को अपने कलात्‍मक संघर्ष से उद्घाटित करने की कोशिश करती है तो समय और प्रकृति अपने पारंपरिक स्‍वरूप में उसे भटकाना व तोड़ना चाहते हैं। ऐसे में वह संघर्ष पीढि़यों में विस्‍थापित होता चला जाता है। और समय की सीमाएं तोड़ता कालाती...
 पोस्ट लेवल : सत्‍यजीत राय Satyjit Ray
हंस कार्यालय में एक बार राजेन्‍द्र यादव ने बिहार को लेकर कुछ हंसी के मूड में कहा तो मैंने भी हंसते कहा था - बहुत सताता है मगध। चंद्रगुप्‍त, चाणक्‍य, बुद्ध याद आते हैं। मगध जिसकी सीमाएं कंधार को छूती थीं और जिसकी राजधानी थी पाटलिपुत्र यानि आज का पटना। 1990 के अ...
मार्च 2005 , प्रथम प्रवक्‍ता 'कवियों से लड़कर आत्‍महत्‍या थोड़े करनी है' वीरेन डंगवाल आपको केसे लगते हैं ? कुछ टिप्‍पणीकार उन्‍हें हाशिये का कवि बताकर दयाभाव दर्शा रहे हैं। अकादमी पुरस्‍कार विवाद पर आपकी क्‍या राय है ? वीरेन की कविताएं अच्‍छी लगती हैं। उनसे किसी...
मार्च 2005 में राजेन्‍द्र यादव से हुई कुमार मुकुल की यह बातचीत दिल्‍ली से उस समय निकल रहे पाक्षिक प्रथम प्रवक्‍ता में प्रकाशित हुई थी। वीरेन डंगवाल आपको केसे लगते हैं ? कुछ टिप्‍पणीकार उन्‍हें हाशिये का कवि बताकर दयाभाव दर्शा रहे हैं। अकादमी पुरस्‍कार विवाद...
क्या लय की कोई पूर्वनिर्धारित व्यवस्था है...क्या रचनाकार की लय और पाठक की लय एक ही 'फ्रीक्वेंसी' पर आ सकते हैं ... क्या कथ्य का लयानुकूल व्यक्तीकरण कथ्य की क्षति तो नहीं करता। कथ्य - निरूपण प्राथमिक है या लय - निर्वाह ? ...क्या कविता की वास्तविक शक्ति लय-निर्वाह...