ब्लॉगसेतु

भागीरथ की तपस्या का हैं तारनहार माँ गंगाहमारी धर्म संस्कृति सभ्यता का आधार माँ गंगा ----भुला सकते नहीं उपकार जो अस्तित्व हैं माँ काफली फूली जहाँ हैं सभ्यता वो संसार माँ गंगा -----रहे निर्मल बहे अविरल यहीं संकल्प ले हम सबमनुज के मुक्ति के पथ की हैं खेवनहार माँ गंगा...
मेरा मजहब मेरा ईमान हैं मेरी इबादत ये हिंदुस्तान हैं ,ईद भी मेरी दीवाली भी मेरी गीता भी मेरी मेरा कुरान हैं**********************कुर्बान जो खाके वतन पे हो जाऊं तिरंगे में लिपटना ही मेरी शान हैं ,हिंदी उर्दू बहने बहने हैं हिन्द की हिन्दू भी मेरा मेरा मुसलमान हैं ***...
तेरे प्रेम की गर गली जो न होती दिले चोट हम कैसे खाकर के जीते --न होता तेरा गर ये इश्के समन्दर तो प्यासों को कैसे बुझाकर के जीते --न होता तेरे प्रेम का ये तराना तरन्नुम को हम कैसे गाकर के जीते--अफ़साना होता जो गर उल्फतों का दास्ताए मोहब्बत सुनाकरके जीते –-कुमुद...
मातृत्व दिवस पर माँ को सादर समर्पित ये पंक्तिया----------------------------------------------------माँ वेद माँ पुराण है माँ सृष्टि का आधार हैगंगा सी पावन अश्रु जल माँ खुशियों की संसार है –-काशी है माँ काबा है माँ गीता है माँ कुरान है सर्वस्व न्यौछावर जो करे माँ वात...
२ माह की रेप पीड़ित मासूम बच्ची का आज  के सभ्य समाज को पत्र !************************************अंकल अगर मैं आपकी बेटी होती तब भी आप यही कहते की अगर ये साड़ी में होती तो रेप न होता !अंकल मेरी माँ की भी मजबूरी थी मुझको साड़ी कैसे पहनाती.आप ही बताये आप अपनी दो माह...
रात में चांदनी की कली थी खिली जैसे भँवरे से कोई कमलिनी मिली ********************************* दोष दे तितलियों को भी क्या आज हम डालियाँ न बहारों में फूली फली ********************************** हम तेरे अश्के तालाबों के है कमल रात रानी और बेला की तू हैं कली...
नव वर्ष की मंगलमय शुभकामना के साथ समर्पित ये चंद पंक्तिया --- ************************************** मंगलमय नूतन वर्ष रहे चहु और दिशा में हर्ष रहे मानव मानव से प्रेम करे दिल में सबके आदर्श रहे ********************** संकल्प आस विश्वास ले हम नव वर्ष में नूतन आस ल...
जिसने ठुकराया माँ कोवो बदनसीब हो गयाकदमो को चूमा जिसनेवो जन्नत के करीब हो गया-माँ माँ है सब कुछ जो वार देअपनी संतान पेजिसकी भी माँ है समझोवो खुशनसीब हो गया-माँ है खुदा इबादत मन्दिर और मस्जिदेजिसने भी किया सर सजदावो दिल के करीब हो गया-तेरे वास्ते माँ ने सभी खुशियों...
 रहे जो युही उनकी भाव भंगीमा निहारते स्वयं को उनके आंचलों में खुद को हम सवारते प्रत्येक गीत में बस उनके नाम को पुकारते प्रणय निवेदनो में वक्त व्यर्थ ही गुजारते -----इसके आगे भी है अपने कर्म क्युँ रुके हुए है आज शर्म से क्यों सर ये शर्म से झ...
ये हिन्दी और उर्दु   की अलग तहजीब कैसी हैज़माने मुल्क की आवाज में बहनो की जैसी हैअलग ये बात मै हिंदी का और बेटा तुम उर्दू केतुम्हारे माँ   के जैसी है मगर मेरी भी मौसी है :