ब्लॉगसेतु

महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी माने जाते है जिन्होंने सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ा कर हमें गुलामी जैसी बेड़ियों को तोड़कर बाहर निकलना सिखाया है। गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था और आज हम 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रूप में मन...
      देश के स्वतंत्रता संग्राम और आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले राष्ट्रपिता  महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को पूरे देश में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है । वर्ष 1948  में महात्मा गांधी की नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी थी,और उनकी हत्या ने...
मुझे स्वीकार हैहां हां मैं दलित हूंस्वीकार है मुझे, कि मैंनिम्न जाति का पाप हूंगर्भ में तो, मैं भी पला हूंफिर क्यों किसी का अभिशाप हूंमुझे स्वीकार है, मेरा नीच होनागन्दगी में जीना दूसरो का मलवा ढोनाहां हां मैं दलित हूंअपने कर्मो से अपने धर्मों सेतुम बड़े हो ,मुझसे न...
 पोस्ट लेवल : कविता पहला अंक
ऑनर किलिंग की शिकार पत्रकार निरूपमा पाठक को याद करते हुएमुझे नहीं मालुमतुम्हारी हत्या हुईयातुमने की आत्महत्याहां,कह सकती हूं इतनादोनों ही परिस्थितियों मेंसिद्ध नहीं हुए, किसीके प्रयोजनहो सकता हैसोचा हो तुमनेगर, प्रेम से मेरेझुक रहा शर्म सेमां-बाप का सिरवे नहीं चाहत...
 पोस्ट लेवल : कविता पहला अंक
समाज में गुरू अर्थात शिक्षक का स्थान सबसे ऊपर है ।प्रारंभिक से लेकर अंतिम समय तक उनके द्वारा दी गयी शिक्षा से जीवन प्रकाशित होती रहती है।जो मनुष्य शिक्षक का सम्मान करता है सही मायने में शिक्षित है।शिक्षा से ही सम्मान है।आदर- भाव, आचार -विचार, व्यवहार और संस्कार जीत...
      भारत और नेपाल दोनों देश एक दूसरे के पड़ोसी होने के साथ-साथ उनमें काफी समानताएं भी पाई जाती हैं। यही कारण है कि नेपाल की धरती पर साहित्यकार डॉ लोकनाथ वर्मा राहुल कृत उपन्यास जल समाधि  को पढ़ने पर ऐसा लगता है कि वह विदेशी धरती पर नहीं वरन् भारत के किसी गांव की...
 पोस्ट लेवल : उपन्यास समीक्षा
बारिशों के बाद जोबीमारियों की घात होजंग का ऐलान तबमेरी ख़ातिर हो चुकामानकर आदेश कोमन में सोच देश कोना ख़याल आज काना फ़िकर बाद कासिर्फ़ एक लक्ष्य हैजो मुझे है भेदनासीवर हो जहाँ रुकावो मुझे है खोलनाबाल्टी, खपच्ची,रस्सीली उठा हाथ मेंदो मेरे संगी भीचल-चले थे साथ मेंसुबह -...
 पोस्ट लेवल : कविता पहला अंक
सपनो का टूट जानाटूट कर बिखर जानाजैसे गहरी खाई में गिरते जानाअचानक ही धुंधलका छा जानानयन अश्रु भी कुछ पल केफिर भी पा लेने की चाहतगहन अंधकार में भीजुगनुओं की जगमगआशाओं के दीपहवाओं के झोंकों सेजलते-बूझते,टिमटिमातेकुछ पल का अंधकारदूर गगन मेंबादलों की ओट सेबाहर आने को आ...
 पोस्ट लेवल : कविता पहला अंक
बारिश के दिनों मेंबारिश के दिन याद नहीं करताबारिश की रातें याद करता हूँ मैंउन्हीं रातों के भींगते अंधेरे में उगतीं थींमां की आंखेंअंधेरा चीरने की कोशिश मेंकभी गुम हो जाती थींघर के अंदर उसी अंधेरे मेंकभी बरसती नहीं थीं,बस पसीजती थीं कभी-कभीघर की कच्ची दीवार की तरहघर...
 पोस्ट लेवल : कविता पहला अंक
मुझे नफरत कोपानी नहीं पत्थर बनाना हैऔर प्रेम को बनाना है पानीरोकना है हर हाल में प्रेम कोपत्थर बनने सेघृणा के पत्थर चुनने हैंआबाद इलाके से और उन्हें बनाकर पहाड़मनुष्यता के नितांत परित्यक्त क्षेत्र में कहींकैद कर देना हैपहाड़ी जड़ता के अभेद्य घेरे मेंअगर रखना है दूर...
 पोस्ट लेवल : कविता पहला अंक