ब्लॉगसेतु

तेरे हुस्न ए जहाँ याद करू या लिखू अपने तन्हाई के पल तेरे इश्क ए मुहब्बत का दिदार लिखू या लिखू अपनी नादानियो पर गज़ल तू अपना बता तुझे क्या याद है ,और तेरी फरियाद क्या है मुझे क्या , कहो तो मै लिख दू हर एक बात तेरी धडकनों का माप लिखू...
हर साँस में नाम किसी का हो, हर आस में साथ किसी का हो,फिर क्यों मंजिल की राहों में वो धोखा दे जाता है, हर एक इंसान गुजरता है उन राहों की मुश्किलों से,फिर क्यों कुछ उसमें पड़कर औरों को भी गिरा जाते है lहर सोच में एक शख्शियत है,हर शख्शियत की एक सोच है, व...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
जो चाहते हैं वो ज़िन्दगी में सब कुछ नहीं मिल जाता, ये तो सब जानते हैं,पर जो पास है उसकी इज्जत नहीं करते lदूसरो के भावों को समझना शायद मुश्किल हो पर हम तो अपने ही भाव नहीं समझते, क्या चाहतें हैं और किसे, क्यों का भी कोई ज़वाब नहीं,क्यों म...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
आज हमारे समाज मेंमतलबी इंसान हैंनाक बनी इनकी लंबीइनके लंबे लंबे कान हैंआज पुलिस वाला सभी सेखुलेआम रिश्वत लेता हैकुछ पैसे देदो कह करतभी हैलमेट देता है।डॉक्टर भगवान का अरूप बनेअंदर पैसा के रूप घने...ये मुर्दों का इलाज भी करते हैंदो चार बोतलें भरते हैं।अपने गंदे कारना...
          आज का मुस्लिम समाज जिनमें से खासकर युवा वर्ग अराजक तत्वों से डरा, सहमा और व्यथित दिखाई देता है। और इसका कारण भी है, आज देश में ऐसा माहौल उत्पन्न कर दिया है कि जिसके चलते यह युवा अपना आतीत तक नहीं खोज पाता। इनकी...
इन हवाओं में भी आज कुछ खास है,आँखों में सजे मेरे हल्के से ख्वाब है lबादलों पे उड़ने की ख्वाहिशें है मन में, हवाओं को छूने की धडकने है दिल में,सवालों के घेरे में घिरा मन उड़ने को बेताब है lपर तितली बनु या फिर फूल या करूं इंतजार,जब मुझे को...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
अपनी दुनिया में मगरुरकानों में हैडफोनसुन रहा था मैंगाने,वॉल्युम इतनी कि बाहर की आवाज भी सुनाई पड़ रही थी,अचानक एक चीख सुनाईदी ,हैडफोन निकाल मैं अपने कमरेसे आया बाहर,फिर से चीख चिल्लाहट हुईजो निरन्तरता में बदलगई,नजर अन्दाज करना मुश्किल हो गया,मुझ अकेले के लिए नहींजित...
 पोस्ट लेवल : कविता मीडिया सामाजिक
खुद मिटना था जिस पर उसे मिटाने की तमन्ना मन में जागी है क्यों बोलो, चाकुओ से गोद कर उसे हराने की तमन्ना मन में जागी है क्यों बोलो lबोलकर ‘ना’ क्या मिटा दिया था उसने तुम्हारे प्यार को,या फिर उस जुनून को उसने हिलाया था, कभी प्यार में बदला भी होता है&nb...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
मुल्क की आम आवाम के नाम पैगामक्यों हो रहा है 5 मार्च को भारत बंद-------------------------------------------------------साथियो!आज मुल्क एक ऐसे मोड पर खड़ा है कि यहाँ की जनता को अपने हक़-हुकूक के लिए सड़क पर उतर कर भारत बंद करने को मजबूर होना पड़ रहा है। आपके मन में एक स...
अरे!तुम खिलखिला करइतना चहक क्यों रही होजाओ कमरे में बैठो,वहां साधो वह लक्ष्यजो अर्जुन ने साधा,छोड़ पूरी मछली कोकेवल उसकी आँख पर।सुनो,कमरे के किवाड़अच्छे से बन्द कर लेना,अनजानी दस्तकों सेसाँकलो की खटखटसुनकर मत खोलनाइन किवाड़ों को।कमरे में झरोखा भी है!क्या सोच रही होये...