ब्लॉगसेतु

समझ नहीं आता कि किस मिट्टी से बने हैं लोग। लोग से तातपर्य समझ ही गये होंगे कि मैं किसकी बात कर रहा हूँ, और अगर नहीं समझे होंगे तो फोटो और नाम से समझ गए होंगे।ख़ैर, देश में चारों तरफ तूफान सा है, सेना के 40(कुछ तथ्यों के अनुसार) जवान शहीद हो गए, सड़कों पर शहीदों के पर...
जाने कितने अश्रुकितने प्रयत्नकिये उस पर न्यौछावर,किन्तु ख्वाहिशों का घरनदी किनारे रहताकब तक स्थिर!आई एक लहर शून्य सेन पूछा न मांगी आज्ञा,छिन्न भिन्न किया नगरी कोछोड़ गयी चिह्नों को पथ पर।लक्षित चिह्न नहीं थेचूंकि अनंतकाल तक स्थिर,होने लगे परिवर्तित वो सबहवा के झोंको...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
तलाक ! तलाक ! तलाक !कितना आसान है यह तीन शब्द कहना,मर्दों का अपनी मनमर्जी से रहना।ख़ुदा की कसम औरत का यह दर्द,यह आदमी न कभी जान सके।औरत के हृदय को यह नामुराद,न कभी पहचान सके।कभी-कभी लगता था काश मैं लड़की ना होती,इस तीन तलाक के शब्दों के डर से दूर,आराम से रात में सोती...
मैं मंद गती से बहती एक धारा हूँजलते द्वीपों में पराधीन का नारा हूँडगर डगर और चार पहर ...बनती मिटती दुनियां की एक सहारा हूँमैंने त्याग किया परित्याग कियामैं बनी संगिनीं घर छोड़ा, पर त्याग दियाजिल्लत ही सही दुनियाँ के फेर में पड़कर भीकभी बनी लक्ष्मी, कभी मीरा सा जाप कि...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
वक्त हो चला है कुछ सवर जाऊंगा मैंकुछ तुम बदलो कुछ बदल जाऊंगा मैंडगर के हर पेड़ आज पतझड़ से लगेंहर फ़िजा का रुख बदल आऊँगा मैंजी रहे हैं जिंदगी को नया सफ़र का नाम देदूर डगर है जिंदगी की तू नहीं आराम देकंटक भरे विघ्न राह में मिलते रहेकाम से कर काम , काम को आराम देहर नजर ह...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
मैं सुबह दोनों कीसुलह करा के आती हूं,पर शाम होते होतेदोनों फिर उलझने लगते है..फिर हृदय औरमस्तिष्क की दौड़ में,भावना पीछे और बुद्धिहमेशा आगे निकलजाती है..वो इसलिए पीछे नहींरह जाती किभाग नही सकती,बल्कि बुद्धि जो हैभावना पर विजय प्राप्तकर लेती है..फर्क ये नही पड़ा कि,हा...
मैं पकड़ नहीं पातीऔर ये साल तीव्र गति सेदौड़ते जाते हैं,कोशिश करती हूँकैद कर लूँ शब्दों मेंपर शब्द मुझसे बहुतदूर भाग जाते हैं।।साफ देख रही हूँपीछे कुछ छूटा जाता है,पर बलात उसे घसीट करसाथ भी तो नहीं ला पाती!काश ये शब्द उन असीमपलों को बांध पाते!पर ये अपरिमितअहसास इसी त...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
मिल जुल कर रहते सभी हर गांव मेंआपस में दुःख दर्द बांटते गांव मेंएक की खातिर हरएक परेशान गांव मेंत्यौहारों पर हर घर गले मिलते गांव मेंलड़ाई झगड़े से कभी न डरते गांव मेंलोगों को आपस में ख़ूब भरोसा गांव मेंतिनके भर चोरी न होती गांव मेंप्रेम बौहार से रहते यहां सब गांव में...
 पोस्ट लेवल : काव्य
एक कली खिलीजो जली मिलीरूढिता ग्रस्त होकर भीवह स्वतंत्रता की राख मिलीवह वहीं पड़ीना जिंदगी बड़ीरिश्तों से वह बधकर भीवह कदम बढ़ा, निढाल चलीवह कल थी परीपर ना आज हरीबचपन की इक चिंगारी सेकली अपना रुख मोड़ चलीवह साथ चलीवह हाथ पलीराहों में विघ्न छोड़कर भीविघ्नों में देखो कली ख...