ब्लॉगसेतु

हर चाँद में वों मंजर ही हो  हर प्रेमी उसे कुछ यूँ झाँके   हर वक्त रहे चाँदनी सफर  यह कब संम्भव , यह कब संम्भव ॥ हर रोज जेहन में आये तूं बस मीठा ही मुस्काये तूं   हर प्यार भरी नजरे तेरी  कुछ चुपके से कह जायें यूँ हर बात जो लुक...
#AmbedkarJayanti #HindiKavita #KumarVishvas #RavishKumarजुबां-ए-दास्तां हर युवा को अपनी (रचना शक्ति – बेहतर दिशा) हिंदी एवं संस्कृत में देने के लिए उनको यह स्थान पर्याप्त जगह देगा और उनके मौखिक कोशल को भी निखारने की कोशिश करेगा। जुबां-ए-दास्तां समूह समकालीन साहित्य...
जो है यह हालतो आगे क्या होगा,बनी स्पात की दुनियांयहां मनुष्य का क्या होगा।खो दिया सब आज यहांना जाने आगे क्या होगा,देखि यह दहल जातु है दिलयहां मनुष्यता का क्या होगा।संवेदनहीन बने हैं सबइस अचला का क्या होगा,पवन सी पवन ना रही अबआखिरी सांस का क्या होगा।सुधर लो समय कम ब...
देखा मैंने एक टेम्पो चालकथा गंध भरा अच्छा था लुक,वह बात देशभक्ति की करेन जिये ज़िन्दगी न है मरे।वह नंगे पैरों था बैठाहर बात में रहता था ऐंठा,थी विबाइयाँ उसकीजो करे बात मीठी मीठी।आज पढ़े लिखे है देशभक्तवह करें प्रेम,हैं प्रेम भक्त,वह दिन भर रोज़ कमाता थादो-चार रोटियां...
 सब्र चाहिए मुझे।परेशां हूँ ।निकलता हूँ।अपने डेरे से रोज।उसके लिए।कहाँ मिलेगा।ये सब्र।सब्र चाहिए मुझे।मन अपने गति से।भी अधिक।ढूंढ़ता है उसे।पूरी दुनिया।देखता है मन।पूरे सब्र से।लेकिन सब है।बस नही है।वो ही।सब्र नही है।कहाँ ये सब्र।सब्र चाहिए मुझे।सब कहते है।सब्र...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
दे गये हमकोवो वीरता की कहानी,जिन्होंने देश के नामकर दी अपनी जवानी।अपने खून सेदेश को सींचा था,दुश्मनों की आवाज़ कोवीरों ने मींसा था।कदमों से कदम मिलाये थेसबने गीत प्रेम के गाये थे,ये अमर कहानियां हैं जग मेंकांटे थे उनके पग - पग में।था लक्ष्य आपका स्वदेशीहम आज भी आप प...
क्या किस्मत का है फैंसला ना हमें पता है, फिर हर बार क्यों देती ये हमें सजा है,ये दुनिया ये दीवारें, कहती रहती है हर पल लड़की ही क्यों सुने, सबकी बातें खुद पर lबरी क्यों न हो जाती या पैदा ही ऐसे होती,कि लड़का बनकर , सब बातें करन...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
राम जी का देव देखोकैसा है ये मेव देखोहाशिये पर आने को...बेके यहां महा देव देखोसंस का होता कार में लेखोभाजत फिरें वो पा ओ देखोराज की नीति अपनाने को...जि दियो यहाँ को सब लेखोब सभी सपा कर जाए देखोवो कान में ग्रीस लगाए देखोबे रोज घरी निहारन को...यहाँ बढ़े रोज ये लगान दे...
कुछ ऐसा अनोखा है यहां के रिश्तों में,जो टूट- जुड़ कर पूरा होता है किश्तों में।प्रेम-प्रेम सभी करते हमेशा परन जाना कभी प्रेम कहते किसे हैं?जाने नहीं उसूल, सुने इसके कई हैं,देखा है डूबे, पार होते कई हैं।दो जन के मिलते ही न हो जाते प्रेमी,दो मन का मिलना भी होता जरूरी।क...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक
हौसलों की उड़ान आशाओं का सफरचलेगा अब तो  यूँ ही  उम्र भर  मंज़िले धुंधली नज़र आये,कोई गम नहींसाथ कोई नज़र न  आये कोई डर नहींरास्ते के निशा मीट जायेफिर भी आँखे नम नहीं उम्मीदें कभी  न टूटेंगीमंजिले कभी न रूठेंगीहार जीत हमें स्वीकार होग...
 पोस्ट लेवल : कविता सामाजिक