ब्लॉगसेतु

तेरे ख़्वाबों से है वास्ता कोईइन निगाहों से है रास्ता कोईउसे देखके मैं खिल उठता हूँबच्चे में बसा है फरिश्ता कोईहमें तो हर धर्म की तहज़ीब हैमेरा वतन ही है गुलिस्तां कोईचाँद जो यौवन के उरूज पे हैमेरे महबूब सा है शाइस्ता* कोईमैं वक़्त को हराके अभी बैठा हूँइक नई सदी दे दो...
 पोस्ट लेवल : काव्य
अगर भूख कौम के रास्ते आती हैतो रोटी का भी कोई धर्म बता दोआप धनाढ्य हैं,आप बच जाएँगेखेतिहरों का भी कोई साल नर्म बता तोदिल्ली की बाँहों में हैं सब रंगीन रातेंकिसी मल्हारिन का भी चूल्हा गर्म बता दोबेटियों से ही सब उम्मीद की जाएँगी क्यादेश के संसद में भी बची हुई शर्म ब...
 पोस्ट लेवल : काव्य
वो ढूंढ रहे थे कुल अपने में जर-जरपर लगा हाथ घर में उनके है रज-रजआराम करें यहां हराम हाथ ले कर-करभूखी जनता है हालात हो गए जर-जरयहां लोग जी रहे जीवन देखो मर-मरइंसान प्यासा खेत तरस रहे जल- जलहालात बिगड़ते देश बिगड़ता पल-पलयहां निकल कम रहा तेल निकल रही खल-खलकुछ राहत दें...
 पोस्ट लेवल : काव्य
समझा नहीं है जीवनचक्र,जलना ही केवल जानती हूं।रखकर पास तिमिर को अपने,आलोक जगती में फैलाती हूँ।।मोम से रचित वस्तु हूँ!जो ताप से बलि जाती हूँ?स्वंय का अस्तित्व बचाने में,अपने से ही छली जाती हूँ।।विपत्तियों को सहसा देखकर,दीपशिखा सी डगमगा जाती हूँ।फिर किसी का सरंक्षण पा...
 पोस्ट लेवल : काव्य
जब चला मैं घर से,हाथ में एक बैग था।दोस्त सामने खड़े थे,न कुछ कह सका ।।रस्ते में मुझे याद,गांव की आ रही, मगर ।मैं शांत होकरशफर का आनंद ले रहा,जब पंहुचा मैं दिल्ली ।।चकित देख रह गया,जगह-जगह पर सड़कें ।सफाई अभियान चल रहा,कहीं जिंदाबाद तो कहीं मुर्दाबाद ।।के नारे लगाए जा...
 पोस्ट लेवल : काव्य
माँ-बाप से बढ़कर दूसराहुआ जगत में न कोइजो करे इन दोनों की सेवामहापुरुष वही होयश्री राम ने अपनी माता काहँस-हँस कर वचन निभाया थादेखो उनकी मानवतासबरी का बेर खाया थाश्री कृष्ण ने अपनी माता सेइतना प्रेम जताया थाजब गए कृष्ण मथुरामाता ने सदमा खाया थावहीं अधर्म का नाश करद्र...
 पोस्ट लेवल : काव्य
कुछ लोग कहते हैं कि बुराई को खत्म कर देना चाहिए...यदि ऐसा हुआ कि बुराई ख़तम हो गयी तो समाज स्थिर हो जाएगा, समाज में विकास होना संभव न होगा...बुराई समाज वैसा ही कार्य करती है जैसे #चोर_पुलिस । एक अपनी आजीविका के लिए गलत रास्ता चुनता है तो दूसरा उसको समाप्त करने के लि...
 पोस्ट लेवल : लेखन
बचपन से लेकर आज तक,प्यार माँ करती रही,जब चला मैं घर से ,तबमाँ मुझे देखती रही आँखों में थे आंसू, लगा कीमाँ मुझसे कुछ कह रहीमैं था बस के अंदर न कुछ कह सकादूर से माँ इशारा करती रहीजब छुए थे पैर मैंने माँ के उस घडीरो पड़ी थी मगरबस दुआ देती रहीबचपन से लेकर...
 पोस्ट लेवल : काव्य