ब्लॉगसेतु

डा. राही मासूम रज़ा, इस व्यक्ति के बारे में मुझे ज्यादा बताने कि जरुरत नहीं है क्योकि अदब को जानने वालो में ये बहुत प्रसिद्द है फिर में उनके बार में कुछ बताने जा रहा हू कोई गलती हो तो बताइएगा और मुझे अपना छोटा भाई समझ कर माफ कीजियेगा !डा. राही मासूम रज़ा का जन्म गंगो...
 पोस्ट लेवल : raahi-masoom-razaa biography
हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद,अपनी रात कि छतपर, कितना तन्हा होगा चाँद !जिन आँखों में काजल बनकर, तेरी काली रात,उन आँखों में आंसू का एक, कतरा होगा चाँद !रात ने ऐसा पेच लगे, टूटी हाथ से डोर,आँगन वाले नीम में जाकर, अटका होगा चाँद !चाँद बिना हर दिन यु बिता...
 पोस्ट लेवल : raahi-masoom-razaa
अपना ग़म लेके कही और न जाया जाये,घर में बिखरी हुई चीजो को सजाया जाये !जिन चिरागों को हवाओ का कोई खौफ नहीं,उन चिरागों को हवाओ से बचाया जाये !बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते थे,किसी तितली को न फूलो से उड़ाया जाये !ख़ुदकुशी करने कि हिम्मत नहीं होती सब में,और कुछ दिन यु...
 पोस्ट लेवल : nida-fazli
जाने किस वक्त कि रहगुज़र पे तूये शिकस्ता जिस्म और दस्ते तन्हाईबैठा हू सांस रोके पीटनेहेरता हू घायल चाँद को मैझरते है कुछ बेतासीर लफ्ज बसकभी कोई आहटकभी सरगोशीऔर एक पर्ची जो चीख-चीख जाती हैरात के इस बेकिनार सेहरा मेंनक्श धुंधले है रास्तो के सभीजमीं महवर से हट रही जैस...
 पोस्ट लेवल : leeladhar-mandloi
दोस्तों आप लोगो के लिए इस बार एक कविताबहुत से रंग है मेरेहमेशा खुबसूरतऔर तरोताजाजिन्हें तुम छू नहीं सकतेबहुत-सी बरिशेहोती है मुझमेजिनकी आवाजेकभी तुम सुन नहीं सकतेबहुत से ख्वाब हैखुशरंग यादो से भरे रास्तो पेचलके जोमेरी आँखों तक आते हैमगर तुम इनकी आहट को नहींमहसूस कर...
 पोस्ट लेवल : shahida-hasan
हम उनसे अगर मिल बैठते है, क्या दोष हमारा होता है,कुछ अपनी जसारत होती है, कुछ उनका इशारा होता है !काटने लगी राते आँखों में, देख नहीं पलकों पर अक्सर,याँ शामे-गरीबां का जुगनू या सुबह का तारा होता है !हम दिल को लिए हर देश फिरे इस जींस के ग्राहक मिल न सके ऐ बंजारे...
 पोस्ट लेवल : ibne-insha
लिपट जाता हू माँ से और मौसी मुस्कुराती हैमें उर्दू में ग़ज़ल कहता हू हिंदी मुस्कुराती हैलड़कपन में किए वादे कि कीमत कुछ नहीं होतीअंगूठी हाथ में रहती है मंगनी टूट जाती हैतो फिर जाकर कही माँ बाप को कुछ चैन पड़ता हैकि जब ससुराल से घर आ के बेटी मुस्कुराती हैउछलते खेलते...
 पोस्ट लेवल : munwwar-rana
 पोस्ट लेवल : parveen-shakir
 पोस्ट लेवल : qateel-shifai
सावन के सुहाने मौसम में इक नार मिली बादल जैसी,बे-पंख उड़ाने लेती है, जो अपने ही आँचल जैसी !लाया है बना कर उसको दुल्हन, ये जोबन, ये अलबेलापन,इस उम्र में सर से पाव तक लगती है ताजमहल जैसी !चहरे पे सजे आईने है, या दो बेदाग नगीने है,किस झील से आई है धुल कर ये आँखे नीलकम...
 पोस्ट लेवल : qateel-shifai