ब्लॉगसेतु

ये न थी किस्मत कि विसाले यार होता,अगर और जीते रहते यही इन्तजार होता !कोई मेरे दिल से पूछे, तेरे तीरे नीमकश को,ये खलिश कहा से होती जो जिगर के पार होता !ये कहा कि दोस्ती है, कि बने है दोस्त नासेह,कोई चारासाज होता, कोई गमगुसार होता ! रगे-संग से टपकता, वह लहू, कि फिर न...
 पोस्ट लेवल : ghalib
अजब-खुलूस अजब सादगी से करता हैदरख्त नेकी बड़ी ख़ामोशी से करता हैमै उसका दोस्त हु अच्छा, यही नहीं काफीउम्मीद और भी कुछ दोस्ती से करता हैजवाब देने को जी चाहता नहीं उसकोसवाल वैसे बड़े आजिज़ी से करता हैजिसे पता ही नहीं शायरी का फन क्या हैवो कारोबार यहाँ शायरी से करता हैसमन...
 पोस्ट लेवल : atul-ajnabi
ऐसे हिज्र के मौसम कब कब आते हैतेरे अलावा याद हमें सब आते हैजागती आँखों से भी देखो दुनिया कोख्वाबो का क्या है वो हर शब् आते है जज्ब करे क्या रेत हमारे अश्को कोतेरा दामन तर करने अब्र आते हैअब वो सफ़र कि ताब नहीं बाकी वरनाहमको बुलावे दश्त से जब तब आते हैकागज कि क...
 पोस्ट लेवल : shaharyar
जौर से बाज़ आए पर बाज़ आए क्या ?कहते है हम तुझको मुह दिखलाये क्या ? रात-दिन गर्दिश में है सात आसमा !हो रहेगा कुछ न कुछ घबराये क्या ?लाग हो तो उसको हम समझे लगाव !जब न हो कुछ भी तो धोखा खाए क्या ?हो लिए क्यों नामावर के साथ-साथ !याँ रब अपने ख़त को हम पहुचाये क्या ?उम्र...
 पोस्ट लेवल : ghalib
ये हम जो हिज्र में दीवारों-दर को देखते हैकभी सबा को कभी नामाबर को देखते हैवो आए घर में हमारे खुदा कि कुदरत है कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते है नज़र लगे न कही उसके दस्तो-बाजू को ये लोग क्यों मेरे जख्मे-जिगर को देखते है      ...
 पोस्ट लेवल : ghalib
दोनों जहा देके वो समझे ये खुश रहा !यां आ पड़ी ये शर्म कि तकरार क्या करे ?थक-थक के हर मुकाम पे दो-चार रह गए !तेरा पता न पाए तो नाचार क्या करे ?क्या शामअ के नहीं है हवाख्वाह अहले-बज्महो ग़म ही जांगुदाज तो गमख्वार क्या करे ?            &nb...
 पोस्ट लेवल : ghalib
मोहब्बत में तुम्हे आंसू बहाना नहीं आया,बनारस में रहे और पान खाना नहीं आया !न जाने लोग कैसे है मोम कर देते है पत्थर को,हमें तो आप को भी गुदगुदाना नहीं आया!शिकारी कुछ भी हो इतना सितम अच्छा नहीं होता, अभी तो चोंच में चिड़िया के दाना तक नहीं आया !ये कैसे रास्ते से लेके...
 पोस्ट लेवल : munwwar-rana
कभी मोम बन के पिघल गयाकभी गिरते गिरते संभल गयावो बन के लम्हा गुरेज कामेरे पास से निकल गयाउसे रोकता भी तो किस तरहकि वो शख्स इतना अजीब थाकभी तड़प उठा मेरी आह सेकभी अश्क से न पिघल सकासर-ए-राह मिला वो अगर कभीतो नज़र चुरा के गुज़र गयावो उतर गया मेरी आँख सेमेरे दिल से क्यो...
 पोस्ट लेवल : ahmad-faraz
वो जो हम में तुम में करार था तुम्हे याद हो के न याद हो,वही यानी वादा निबाह का, तुम्हे याद हो के न याद हो !वो नए गिले वो शिकायते वो मजे-मजे कि हिकायते,वो हर बार एक बात पे रूठना तुम्हे याद हो के न याद हो !कोई बात ऐसी अगर हुई जो तुम्हारे जी को बुरी लगी,तो बयाँ से पहले...
 पोस्ट लेवल : momin