ब्लॉगसेतु

जहाँ भर को ही जबसे आज़माने हम लगे हैं,हमारी शख्शियत को खुद मिटाने हम लगे हैं,लगें पर्दानशीं का हम उठाने जबसे पर्दा,हमारा खुद का ही चेह्रा दिखाने हम लगे हैं।(1222*3  122)**********छिपी हुई बहु मूल्य संपदा, इस शरीर के पर्दों में।इस क्षमता के बल पर ही तुम, जान फूँ...
उल्फ़त में चोट खाई उसका उठा धुँआ है,अब दिल कहाँ बचा है सुलगी हुई चिता है,होती है खुद से दहशत जब दिल की देखुँ वहशत,इस मर्ज की सबब जो वो ही फकत दवा है।(221  2122)*2*********हमारा इश्क़ अब तो ख्वाबिदा होने लगा है,वहीं अब उनसे मिलना बारहा होने लगा है,मुझे वे देख, नज़...
शपथ समारोह का आमंत्रण मिला न मुझको आने का।कर उपवास बताऊँगा अब क्या मतलब न बुलाने का।मौका हाथ लगा है यह तो छोले खूब उड़ाने का।अवसर आया गिरगिट जैसा मेरा रंग दिखाने का।।उजले कपड़ों में सजधज आऊँ,चेलों को साथ लाऊँ,मैं फोटुवें खिंचाऊँ,महिमा उपवास की है भारी,बासुदेव कहे सुन...
चरैवेति का मूल मन्त्र ले, आगे बढ़ते जाएंगे,जीव मात्र से प्रेम करेंगे, सबको गले लगाएंगे,ऐतरेय ब्राह्मण ने हमको, ये सन्देश दिया अनुपम,परि-व्राजक बन सदा सत्य का, अन्वेषण कर लाएंगे।(लावणी छंद आधारित)*********संस्कृति अरु संस्कार ये दोनों होते विकशित शिक्षा से,आचार-विचार...
गाँवों में हैं प्राण हमारे, दें इनको सम्मान।भारत की पहचान सदा से, खेत और खलिहान।।गाँवों की जीवन-शैली के, खेत रहे सोपान।अर्थ व्यवस्था के पोषक हैं, खेत और खलिहान।।अन्न धान्य से पूर्ण रखें ये, हैं अपने अभिमान।फिर भी सुविधाओं से वंचित, खेत और खलिहान।।अंध तरक्की के पीछे...
छन्न पकैया छन्न पकैया, वैरागी ये कैसे।काम क्रोध मद लोभ बसा है, कपट 'पाक' में जैसे।नाम बड़े हैं दर्शन छोटे, झूठा इनका चोंगा।छापा तिलक जनेऊ रखते, पण्डित पूरे पोंगा।।छन्न पकैया छन्न पकैया, झूठी सच्ची करते।कागज की संस्थाओं से वे, झोली अपनी भरते।लोग गाँठ के पूरे ढूंढे, औ...
मंजुल मुद आनंद, राम-चरित कलि अघ हरण।भव अधिताप निकंद, मोह निशा रवि सम दलन।।हरें जगत-संताप, नमो भक्त-वत्सल प्रभो।भव-वारिध के आप, मंदर सम नगराज हैं।।शिला और पाषाण, राम नाम से तैरते।जग से हो कल्याण, जपे नाम रघुनाथ का।।जग में है अनमोल, विमल कीर्ति प्रभु राम की।इसका कछु...
बिल्ली रानी आवत जान।चूहा भागा ले कर प्रान।।आगे पाया साँप विशाल।चूहे का जो काल कराल।।नन्हा चूहा हिम्मत राख।जल्दी कूदा ऊपर शाख।।बेचारे का दारुण भाग।शाखा पे बैठा इक काग।।पत्तों का डाली पर झुण्ड।जा बैठा ले भीतर मुण्ड।।कौव्वा बोले काँव कठोर।चूँ चूँ से दे उत्तर जोर।।ये ह...
प्रचंड रह, सदैव बह, कभी न तुम, अधीर हो।महान बन, सदा वतन, सुरक्ष रख, सुवीर हो।।प्रयत्न कर, बना अमर, अटूट रख, अखंडता।कभी न डर, सदैव धर, रखो अतुल, प्रचंडता।।निशा प्रबल, सभी विकल, मिटा तमस, प्रदीप हो।दरिद्र जन , न वस्त्र तन, करो सुखद, समीप हो।।सुकाज कर, गरीब पर, सदैव त...
बह्र:- 2122  1212   22इश्क़ की मेरी इब्तिदा है वो,हमनवा और दिलरुबा है वो।मेरा दिल तो है एक दरवाज़ा,हर किसी के लिए खुला है वो।खुद में खुद को ही ढूंढ़ता जो बशर,पारसा वो नहीं तो क्या है वो।जब से खुद को ख़ुदा समझने लगा,अपनी धुन में रमा हुआ है वो।बाँध पट्टी ज...