ब्लॉगसेतु

बह्र:- 2122  1212  22प्यास दिल की न यूँ बढ़ाओ तुम,जान ले लो न पर सताओ तुम।पास आ के जरा सा बैठो तो,फिर न चाहे गलेे लगाओ तुम।चोट खाई बहुत जमाने से,कम से कम आँख मत चुराओ तुम।इल्तिज़ा आख़िरी ये जानेमन,अब तो उजड़ा चमन बसाओ तुम।खुद की नज़रों से खुद ही गिर कर के,आग न...
बह्र:- 212*4तीर नज़रों का उनका चलाना हुआ,और दिल का इधर छटपटाना हुआ।हाल नादान दिल का न पूछे कोई,वो तो खोया पड़ा आशिक़ाना हुआ।ये शब-ओ-रोज़, आब-ओ-हवा आसमाँ,शय अज़ब इश्क़ है सब सुहाना हुआ।अब नहीं बाक़ी उसमें किसी की जगह,जिनकी यादों का दिल आशियाना हुआ।क्या यही इश्क़ है, रूठा दि...
बह्र:- 2222 2222 2222 222ग़म पी पी कर दिल जब ऊबा, तब मयखाने याद आये,तेरी आँखों की मदिरा के, सब पैमाने याद आये।उम्मीदों की मिली हवाएँ जब भी दिल के शोलों को तेरे साथ गुजारे वे मदहोश ज़माने याद आये।मदहोशी में कुछ गाने को जब भी प्यासा दिल मचला, तेरा हाथ पकड़ जोे...
(1)लिछमी बाईसा री न्यारी नगरी है झाँसी,गद्दाराँ रै गलै री बणी थी जकी फाँसी।राणी सा रा ठाठ बाठ,गाताँ थकै नहीं भाट।सुण सुण फिरंग्याँ के चाल जाती खाँसी।।****(2)बाकी सब गढणियाँ गढ तो चित्तौडगढ़,उपज्या था वीर अठै एक से ही एक बढ।कुंभा री हो ललकार,साँगा री या तलवार,देशवासी...
(बीती जवानी)(1)जवानी में जोइरादे पत्थर सेमजबूत होते थे,,,वे अब अक्सरपुराने फर्नीचर सेचरमरा टूट जाते हैं।**(2)क्षणिका  (परेशानी)जो मेरी परेशानियों परहरदम हँसते थेपर अब मैंने जबपरेशानियों मेंहँसना सीख लिया हैवे ही मुझे अबदेख देखरो रहे हैं।**(3)क्षणिका (पहचान)आभा...
जो सदा अस्तित्व से अबतक लड़ा है।वृक्ष से मुरझा के पत्ता ये झड़ा है।चीर कर फेनिल धवल कुहरे की चद्दर,अव्यवस्थित से लपेटे तन पे खद्दर,चूमने कुहरे में डूबे उस क्षितिज को,यह पथिक निर्द्वन्द्व हो कर चल पड़ा है।हड्डियों को कँ...
(नेताजी)आज तेइस जनवरी है याद नेताजी की कर लें,हिन्द की आज़ाद सैना की हृदय में याद भर लें,खून तुम मुझको अगर दो तो मैं आज़ादी तुम्हें दूँ,इस अमर ललकार को सब हिन्दवासी उर में धर लें।(2122*4)*********तुलसीदास जी की जयंती पर मुक्तक पुष्पलय:- इंसाफ की डगर पेतुलसी की है जयं...
इतना भी ऊँची उड़ान में, खो कर ना इतराओ,पाँव तले की ही जमीन का, पता तलक ना पाओ,मत रौंदो छोटों को अपने, भारी भरकम तन से,भारी जिनसे हो उनसे ही, हल्के ना हो जाओ।(सार छंद)*********बिल्ले की शह से चूहा भी, शेर बना इतराता है,लगे गन्दगी वह बिखेरने, फूल फुदकता जाता है,खोया ह...
अर्थ जीवन का है बढना ये नदी समझा रही,खिल सदा हँसते ही रहना ये कली समझा रही,हों कभी पथ से न विचलित झेलना कुछ भी पड़े,भार हर सह धीर रखना ये मही समझा रही।(2122*3 212)1-09-20********हबीब जो थे हमारे रकीब अब वे हुए,हमारे जितने भी दुश्मन करीब उन के हुए,हक़ीम बन वे दिखाएँ ह...
मन वांछित जब हो नहीं, प्राणी होता क्रुद्ध।बुद्धि काम करती नहीं, हो विवेक अवरुद्ध।।नेत्र और मुख लाल हो, अस्फुट उच्च जुबान।गात लगे जब काम्पने, क्रोध चढ़ा है जान।।सदा क्रोध को जानिए, सब झंझट का मूल।बात बढ़ाए चौगुनी, रह रह दे कर तूल।।वशीभूत मत होइए, कभी क्रोध के आप।काम ब...