ब्लॉगसेतु

1222*4 (विधाता छंद पर आधारित)(पदांत का लोप, समांत 'आएगा')नया जो वर्ष आएगा, करें मिल उसका हम स्वागत;नये सपने नये अवसर, नया ये वर्ष लाएगा।करें सम्मान इसका हम, नई आशा बसा मन में;नई उम्मीद ले कर के, नया ये साल आएगा।मिला के हाथ सब से ही, सभी को दें बधाई हम;जहाँ हम बाँटत...
सावन मनभावन तन हरषावन आया।घायल कर पागल करता बादल छाया।।क्यों मोर पपीहा मन में आग लगाये।सोयी अभिलाषा तन की क्यों ये जगाये।पी की यादों ने क्यों इतना मचलाया।सावन -----ये झूले भी मन को ना आज रिझाये।ना बाग बगीचों की हरियाली भाये।बेदर्द पिया ने कैसा प्यार जगाया।सावन-----...
सिमटा ही जाये देश का देहात शह्र में।लोगों के खोते जा रहे जज़्बात शह्र में।सरपंच गाँव का था जो आ शह्र में बसा।खो बैठा पर वो सारी ही औक़ात शह्र में।।221  2121  1221  212*********खड़ी समस्या कर के कुछ तो, पैदा हुए रुलाने को,इनको रो रो बाकी सारे, हैं कुहराम...
बेवज़ह सी जिंदगी में कुछ वज़ह तो ढूंढ राही,पृष्ठ जो कोरे हैं उन पर लक्ष्य की फैला तु स्याही,सामने उद्देश्य जब हों जीने की मिलती वज़ह तब,चाहतें मक़सद बनें गर हो मुरादें पूर्ण चाही।(2122*4)**********वैशाखियों पे जिंदगी को ढ़ो रहे माँ बाप अब,वे एक दूजे का सहारा बन सहे संता...
हम जैसों के अच्छे दिन तो, आ न सकें कुछ ने ठाना,पास हमारे फटक न सकते, बुरे दिवस कुछ ने माना,ये झुनझुना मगर अच्छा है, अच्छे दिन के ख्वाबों का,मात्र खिलौना कुछ ने इसको, जी बहलाने का जाना(ताटंक छंद आधारित)*********प्रथम विरोधी को शह दे कर, दिल के घाव दुखाते हैं,फिर उन...
काम क्रोध के भरे पिटारे, कलियुग के ये बाबा,बेच गये खा मन्दिर मस्ज़िद, काशी हो या काबा,चकाचौंध इनकी झूठी है, बचके रहना इनसे,भोले भक्तों को ठगने का, सारा शोर शराबा।सार छंद आधारित*********लिप्त रहो जग के कर्मों में, ये कैसा सन्यास बता,भगवा धारण करने से नहिं, आत्म-शुद्ध...
सितम यूँ खूब ढ़ा लो।या फिर तुम मार डालो।मगर मुझ से जरा तुम।मुहब्बत तो बढ़ालो।।***दुआ रब की तो पा लो।बसर अजमेर चालो।तमन्ना औलिया की।जरा मन में तो पालो।।***अरी ओ सुन जमालो,मुझे तुम आजमा लो,ठिकाना अब तेरा तू,मेरे दिल पे जमा लो।***ये ऊँचे ख्वाब ना लो।जमीं पे पाँ टिका लो।...
काफ़िया = ई; रदीफ़ = भूखदुनिया में सबसे बड़ी, है रोटी की भूख।पाप कराये घोरतम, जब बिलखाती भूख।।आँतड़ियाँ जब ऐंठती, जलने लगता पेट।नहीं चैन मन को पड़े, समझो जकड़ी भूख।।मान, प्रतिष्ठा, ओहदा, कभी न दें सन्तोष।ज्यों ज्यों इनकी वृद्धि हो, त्यों त्यों बढ़ती भूख।।कमला तो चंचल बड़ी,...
महिमा कुर्सी की बड़ी, इससे बचा न कोय।राजा चाहे रंक हो, कोउ न चाहे खोय।कोउ न चाहे खोय, वृद्ध या फिर हो बालक।समझे इस पर बैठ, सभी का खुद को पालक।कहे 'बासु' कविराय, बड़ी इसकी है गरिमा।उन्नति की सौपान, करे मण्डित ये महिमा।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया22-12-2018
8,8,8,6मिलते विषम दोय, सम-कल तब होय,सम ही कवित्त को तो, देत बहाव है।आदि न जगन रखें, लय लगातार लखें,अंत्य अनुप्रास से ही, या का लुभाव है।शब्द रखें भाव भरे, लय ऐसी मन हरे,भरें अलंकार जा का, खूब प्रभाव है।गाके देखें बार बार, अटकें न मझधार,रचिए कवित्त जा से, भाव रिसाव...