ब्लॉगसेतु

मोबॉयल से मिट गये, बड़ों बड़ों के खेल।नौकर, सेठ, मुनीमजी, इसके आगे फेल।इसके आगे फेल, काम झट से निपटाता।मुख को लखते लोग, मार बाजी ये जाता।निकट समस्या देख, करो नम्बर को डॉयल।सौ झंझट इक साथ, दूर करता मोबॉयल।।मोबॉयल में गुण कई, सदा राखिए संग।नूतन मॉडल हाथ में, देख लोग हो...
कुंडलियाँ दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है। इस छंद के ६ चरण होते हैं तथा प्रत्येक चरण में २४ मात्राएँ होती है। इसे यूँ भी कह सकते हैं कि कुंडलियाँ के पहले दो चरण दोहा के तथा शेष चार चरण रोला से बने होते हैं।दोहा के प्रथम एवं तृतीय पद में १३-१३ मात्राएँ तथा दूसरे...
बह्र:- 1222  1222  122हमारे मन में ये व्रत धार लेंगे,भुला नफ़रत सभी को प्यार देंगे।रहेंगे जीते हम झूठी अना में,भले ही घूँट कड़वे हम पियेंगे।इसी उम्मीद में हैं जी रहे अब,कभी तो आसमाँ हम भी छुयेंगे।रे मन परवाह जग की छोड़ करना,भले तुझको दिखाएँ लोग ठेंगे।रहो बार...
बह्र:- 1222  1222  122तिजारत हुक्मरानी हो गई है,कहीं गुम शादमानी हो गई है।न गांधी शास्त्री से अब हैं रहबर,शहादत उनकी फ़ानी हो गई है।कहाँ ढूँढूँ तुझे ओ नेक नियत,तेरी गायब निशानी हो गई है।तेरा तो हुश्न ही दुश्मन है नारी,कठिन इज्जत बचानी हो गई है।लगी जब बोलने...
बह्र:- 1222   1222   122क्या चुप रहना शराफ़त है? नहीं तो,जुबाँ खोलें? इजाजत है? नहीं तो।करें हासिल अगर हक़ लड़के अपना,तो ये लड़ना अदावत है? नहीं तो।बड़े मासूम बन वादों से मुकरो,कोई ये भी सियासत है? नहीं तो।दिखाए आँख हाथी को जो चूहा,भला उसकी ये हिम्मत...
(पदांत 'मिलती', समांत 'ओ' स्वर)मिलती पथ में कुछ पड़ी, वस्तु करें स्वीकार,समझ इसे अधिकार, दबा लेते जो मिलती।।अनायास कुछ प्राप्ति का, लिखा राशि में योग,बंदे कर उपभोग, भाग्य वालों को मिलती।।जन्मांतर के पुण्य सब, लगे साथ में जागे,इस कारण से आज ये, आई आँखों आगे।देने वाले...
2*8 (मात्रिक बहर)(पदांत 'कर डाला', समांत 'आ' स्वर)यहाँ चीन की आ बेटी ने,सबको मतवाला कर डाला।बच्चा, बूढ़ा या जवान हो,कद्रदान अपना कर डाला।।होता लख के चहरा तेरा,तेरे आशिक जन का' सवेरा।जब तक शम्मा सी ना आये,तड़पत परवाना कर डाला।।लब से गर्म गर्म ना लगती,आँखों से न खुमारी...
1222*4 (विधाता छंद आधारित)(पदांत 'तुम्हें पापा', समांत 'आऊँगा')अभी नन्हा खिलौना हूँ , बड़ा प्यारा दुलारा हूँ;उतारो गोद से ना तुम, मनाऊँगा तुम्हें पापा।।भरूँ किलकारियाँ प्यारी, करूँ अठखेलियाँ न्यारी;करूँ कुछ खाश मैं नित ही, रिझाऊँगा तुम्हें पापा।।इजाजत जो तुम्हारी हो...
हिन्दी काव्य की एक विधा जिसमें चार चार पद के 'मुक्ता' एक माला की तरह गूँथे जाते हैं। मैंने इसका नाम मौक्तिका दिया है क्योंकि इस में 'मुक्ता' शेर की तरह पिरोये जाते हैं। मौक्तिका में मुक्ताओं की संख्या कितनी होगी इसके लिए कोई निश्चित नियम नहीं है फिर भी 4 तो होने ही...
उत्तर बिराज कर, गिरिराज रखे लाज,तुंग श्रृंग रजत सा, मुकुट सजात है।तीन ओर पारावार, नहीं छोर नहीं पार,मारता हिलोर भारी, चरण धुलात है।जाग उठे तेरे भाग, गर्ज गंगा गाये राग,तेरी इस शोभा आगे, स्वर्ग भी लजात है।तुझ को 'नमन' मेरा, अमन का दूत तू है,जग का चमन हिन्द, सब को रि...