ब्लॉगसेतु

(पदांत 'बेटी', समांत 'अर')बेटी शोभा गेह की, मात पिता की शान,घर की है ये आन, जोड़ती दो घर बेटी।।संतानों को लाड दे, देत सजन को प्यार,रस की करे फुहार, नेह दे जी भर बेटी।।रिश्ते नाते जोड़ती, मधुर सभी से बोले,रखती घर की एकता, घर के भेद न खोले।ममता की मूरत बड़ी, करुणा की है...
(8सगण)शुभ पुस्तक हस्त सदा सजती, पदमासन श्वेत बिराजत है।मुख मण्डल तेज सुशोभित है, वर वीण सदा कर साजत है।नर-नार बसन्तिय पंचम को, सब शारद पूजत ध्यावत है।तुम हंस सुशोभित हो कर माँ, प्रगटो वर सेवक माँगत है।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया01-02-2017
(8, 8, 8, 8 पर यति अनिवार्य।प्रत्येक यति के अंत में हमेशा लघु गुरु (1 2) अथवा 3 लघु (1 1 1) आवश्यक।आंतरिक तुकान्तता के दो रूप प्रचलित हैं। प्रथम हर चरण की तीनों आंतरिक यति समतुकांत। दूसरा समस्त 16 की 16 यति समतुकांत। आंतरिक यतियाँ भी चरणान्त यति (1 2) या (1 1 1) के...
8,8,8,8 अंत गुरु लघु हर यति समतुकांत।जगत ये पारावार, फंस गया मझधार,दिखे नहीं आर-पार, थाम प्रभु पतवार।नहीं मैं समझदार, जानूँ नहीं व्यवहार,कैसे करूँ मनुहार, करले तु अंगीकार।चारों ओर भ्रष्टाचार, बढ़ गया दुराचार,मच गया हाहाकार, धारो अब अवतार।छाया घोर अंधकार, प्रभु कर उप...
मानस सागर की लहरों के हैं उफान मेरे आँसू,वर्षों से जो दबी हृदय में वो पीड़ा कहते आँसू,करो उपेक्षा मत इनकी तुम सुनलो ओ दुनियाँ वालों,शब्दों से जो व्यक्त न हो उसको कह जाते ये आँसू।(2×15)*********देख कर के आपकी ये जिद भरी नादानियाँ,हो गईं लाचार सारी ही मेरी दानाइयाँ,झे...
अगर तुम मिल गई होती मुहब्बत और हो जाती,मिले होते अगर दिल तो इनायत और हो जाती,लिखा जब ठोकरें खाना गिला करने से अब क्या हो,दिलों में जो मुहब्बत हो हक़ीक़त और हो जाती।(1222*4)*********अगर ये दिल नहीं होता मुहब्बत फिर कहाँ होती,मुहब्बत गर न होती तो इबादत फिर कहाँ होती,इब...
बन्द तबेलों में सिसके हैं पड़ी पड़ी भैंसें सारी।स्वारथ के अन्धों ने उनके पेटों पर लातें मारी।बेच खा गये चारा उनका घोटाला करके भारी।ऐसे चोर उचक्कों का क्या करलें भैसें बेचारी।।चोरों ने किया चारा सारा मीसिंग,की नोटों पे खूब कीसिंग,अब जेलों में चक्की पीसिंग,सुनो रे मेरे...
सभी देशों में अच्छा देश भारतवर्ष प्यारा है,खिले हम पुष्प इसके हैं बगीचा ये हमारा है,हजारों आँधियाँ झकझोरती इसको सदा आईं,मगर ये बाँटता सौरभ रहा उनसे न हारा है।(1222*4)*********यह देश हमारी माँ, हम आन रखें इसकी।चरणों में झुका माथा, सब शान रखें इसकी।इस जन्म-धरा का हम,...
पर्यावरण खराब हुआ, यह नहिं संयोग।मानव का खुद का ही है, निर्मित ये रोग।।अंधाधुंध विकास नहीं, आया है रास।शुद्ध हवा, जल का इससे, होय रहा ह्रास।।यंत्र-धूम्र विकराल हुआ, छाया चहुँ ओर।बढ़ते जाते वाहन का, फैल रहा शोर।।जनसंख्या विस्फोटक अब, धर ली है रूप।मानव खुद गिरने खातिर...
दस्यु राज रत्नाकर जग में, वाल्मीकि कहलाये।उल्टा नाम राम का इनको, नारद जी जपवाये।।मरा मरा से राम राम की, सुंदर धुन जब आई।वाल्मीकि जी ने ब्रह्मा सी, प्रभुताई तब पाई।।घोर तपस्या में ये भूले, तन की सुध ही सारी।चींटे इनके तन से चिपटे, त्वचा पूर्ण खा डारी।।प्रणय समाहित क...