ब्लॉगसेतु

मन नित भजो, राधेकृष्णा, यही बस सार है।इन रस भरे, नामों का तो, महत्त्व अपार है।।चिर युगल ये, जोड़ी न्यारी, त्रिलोक लुभावनी।भगत जन के, प्राणों में ये, सुधा बरसावनी।।जहँ जहँ रहे, राधा प्यारी, वहीं घनश्याम हैं।परम द्युति के, श्रेयस्कारी, सभी परिणाम हैं।।बहुत महिमा, नामो...
हाल अब कैसा हुआ बतलाएँ क्या,बिगड़ी इस तक़दीर का दिखलाएँ क्या,तोड़ के रख दी कमर मँहगाई ने,क्या खिलाएँ और खुद हम खाएँ क्या।2122*2  212********हाउडी मोदी की तरंग में:-विश्व मोदी को कह हाउडी पूछता,और इमरान बन राउडी डोलता,तय है पी ओ के का मिलना कश्मीर में,शोर ये जग मे...
सत्ता जिनको मिल जाती है मद में वे इतराते हैं,गिरगिट जैसे रंग बदलकर बेगाने बन जाते हैं,खुद को देखें या फिर दल को या केवल ही अपनों को,अनदेखी जनता की कर तोड़ें उनके सपनों को।समझें जनता को वे ना भोली,झूठे वादों की देवें ना गोली,न किसी की ये हमजोली,'बासु' कहे आँख नेताओं...
अत्याचार देख भागें,शांति शांति चिल्लाते,छद्म छोड़ अब तो जागें।***पीड़ा सारी कहता,नीर नयन से बहता,अंधी दुनिया हँसती।***बाढ कहीं तो सूखा है,उजड़ रहे वन सिसके,मनुज लोभ का भूखा है,***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया28-04-20
122  122  122  12फकीरी हमारे हृदय में खिली।बड़ी मस्त मौला तबीयत मिली।।कहाँ हम पड़ें और किस हाल में।किसे फ़िक्र हम मुक्त हर चाल में।।वृषभ से रहें नित्य उन्मुक्त हम।जहाँ मन, बसेरा वहीं जाय जम।।बना हाथ तकिया टिका माथ लें।उड़ानें भरें नींद को साथ लें।।मिले ज...
2122 212, 2212देश का ऊँचा सदा, परचम रखें,विश्व भर में देश-छवि, रवि सम रखें।मातृ-भू सर्वोच्च है, ये भाव रख,देश-हित में प्राण दें, दमखम रखें।विश्व-गुरु भारत रहा, बन कर कभी,देश फिर जग-गुरु बने, उप-क्रम रखें।देश का गौरव सदा, अक्षुण्ण रख,भारती के मान को, चम-चम रखें।आँख...
भारी रोग निसड़्लो आयो, कोरोना,सगलै जग मैं रुदन मचायो, कोरोना,मिनखाँ नै मिनखाँ सै न्यारा, यो कीन्यो,कुचमादी चीन्याँ रो जायो, कोरोना।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया30-08-20
श्राद्ध पक्ष में दें सभी, पुरखों को सम्मान।वंदन पितरों का करें, उनका धर हम ध्यान।।रीत सनातन श्राद्ध है, इस पर हो अभिमान।श्रद्धा पूरित भाव रख, मानें सभी विधान।।द्विज भोजन बलिवैश्व से, करें पितर संतुष्ट।उनके आशीर्वाद से, होते हैं हम पुष्ट।।पितर लोक में जो बसे, कर असी...
मधुवन महके।शुक पिक चहके।।जन-मन सरसे।मधु रस बरसे।।ब्रज-रज उजली।कलि कलि मचली।।गलि गलि सुर है।गिरधर उर है।।नयन सजल हैं।वयन विकल हैं।।हृदय उमड़ता।मति मँह जड़ता।।अति अघकर मैं।तव पग पर मैं।।प्रभु पसरत हूँ।'नमन' करत हूँ।===========लक्षण छंद:-"ननग" गणन की।मधुर 'मधुमती'।।"ननग...
बह्र:- 212×4जगमगाते दियों से मही खिल उठी,शह्र हो गाँव हो हर गली खिल उठी।लायी खुशियाँ ये दीपावली झोली भर,आज चेह्रों पे सब के हँसी खिल उठी।आप देखो जिधर नव उमंगें उधर,हर महल खिल उठा झोंपड़ी खिल उठी।सुर्खियाँ सब के गालों पे ऐसी लगे,कुमकुमे हँस दिये रोशनी खिल उठी।आज छोटे...