ब्लॉगसेतु

(1222   1222   1222   1222)नहीं जो चाहते रिश्ते अदावत और हो जाती,न होते अम्न के कायल सियासत और हो जाती,दिखाकर बुज़दिली पर तुम चुभोते पीठ में खंजर,अगर तुम बाज़ आ जाते मोहब्बत और हो जाती।घिनौनी हरकतें करना तुम्हारी तो सदा आदत,बदल जाती अगर...
बह्र: 122 122 122 12इरादे इधर हैं उबलते हुए,उधर सारे दुश्मन दहलते हुए।नये जोश में हम उछलते हुए,चलेंगे ज़माना बदलते हुए।हुआ पांच सदियों का वनवास ख़त्म,विरोधी दिखे हाथ मलते हुए।अगर देख सकते जरा देख लो,हमारे भी अरमाँ मचलते हुए।रहे जो सिखाते सदाकत हमें,मिले वो जबाँ से फि...
शारद वंदन:-वंदन वीणा वादिनी,मात ज्ञान की दायिनी,काव्य बोध का मैं कांक्षी।***राम नाम:-राम नाम है सार प्राणी,बैल बना तू अंधा,जग है चलती घाणी।***सरयू के तट पर बसी,धूम अयोध्या में मची,ज्योत राम मंदिर की जगी।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया12-08-20
गुर्वा केवल गुरु वर्ण की गिनती पर आधारित काव्यातमक संरचना है जिसमें एक दूसरी से स्वतंत्र तीन पंक्तियों में शब्द चित्र खींचा जाता है, अपने चारों ओर के परिवेश का वर्णन होता है या कुछ भी अनुभव जनित भावों की अभिव्यक्ति होती है। गुर्वा की तीन पंक्तियों में 6 -5 -6 के अन...
बेवज़ह सी ज़िंदगी में कुछ वज़ह तो ढूंढ राही,पृष्ठ जो कोरे हैं उन पर लक्ष्य की फैला तु स्याही,सामने उद्देश्य जब हों जीने की मिलती वज़ह तब,चाहतें मक़सद बनें गर हो मुरादें पूर्ण चाही।(2122*4)**********वैशाखियों पे ज़िंदगी को ढ़ो रहे माँ बाप अब,वे एक दूजे का सहारा बन सहे संता...
हाय ये तेरा तसव्वुर मुझको जीने भी न दे,ज़ीस्त का जो फट गया चोगा वो सीने भी न दे,अब तो मयखानों में भी ये छोड़ता पीछा नहीं,ग़म गलत के वास्ते दो घूँट पीने भी न दे।(2122*3 +  212)*********बढ़ने दो प्यार की बात को,और' मचलने दो जज्बात को,हो न पाये सहर अब कभी,रोक लो आज क...
फटी जींस अरु तंग टॉप है, कटे हुए सब बाल है।ऊंची सैंडल में तन लचके, ज्यों पतली सी डाल है।ठक ठक करती चाल देख के, धक धक जी का हाल है,इस फैशन के कारण जग में, इतना मचा बवाल है।।आधुनिकता का है बोलबाला,दिमागों का दिवाला,आफत का परकाला,बासुदेव कहाँ लेकर ये जाये,हम तो देख दे...
एक गली का कुत्ता यक दिन, कोठी में घुस आया।इधर उधर भोजन को टोहा, कई देर भरमाया।।तभी पिंजरा में विलायती, कुत्ता दिया दिखाई।ज्यों देखा, उसके समीप आ, हमदर्दी जतलाई।।हाय सखा क्या हालत कर दी, आदम के बच्चों ने।बीच सलाखों दिया कैद कर, तुझको उन लुच्चों ने।।स्वामिभक्त बन नर...
प्रीत की है तेज धार, पैनी जैसे तलवार,इसपे कदम आगे, सोच के बढ़ाइए।मुख पे हँसी है छाई, दिल में जमी है काई,प्रीत को निभाना है तो, मैल ये हटाइए।छोटा-बड़ा ऊँच-नीच, चले नहीं प्रीत बीच,पहले समस्त ऐसे, भेद को मिटाइए।मान अपमान भूल, मन में रखें न शूल,प्रीत में तो शीश को ही, हा...
आस अधिक मत पालिए, सब के मत हैं भिन्न।लगे निराशा हाथ तो, रहे सदा मन खिन्न।।गीता के सिद्धांत को, मन में लेवें धार।कर्म आपके हाथ में, फल पर नहिं अधिकार।।आस तहाँ नहिं पालिए, लोग खींचते पैर।मीनमेख निकले सदा, राख हृदय में वैर।।नहीं अन्य से बांधिए, कभी आस की डोर।सबकी अपनी...