ब्लॉगसेतु

ये घोडरोज हैं।कभी हिरन का भ्रम पैदा करते हैंकभी घोड़े काकभी गाय काइसीलिए इन्हें नीलगाय कहा जाता है।जब लोग इनकी भोली सूरत पर रीझ करगऊ समझ बैठते हैंतभी ये घुस जाते हैं खेतों मेंचट कर जाते हैं पूरी की पूरी फसलतबाह कर देते हैंमानव श्रम और प्रतिभा की उपज।नीलगाय नाम के ओ...
 पोस्ट लेवल : सदानन्द साही कविता
एक दिन नदी ने अरार को उलाहना दी तुमने कभी जाना ही नहीं मेरे भीतर के रस कोसदा से कटे रहे हो मुझसे सूखे और तने रहकर आदर्श पुरुष बनना चाहते हो।अरार ने मुँह खोला मासूमियत चपल हुई मेरी प्रिय नदी मेरे सूखे और कठोर बदन के अंदर तुमने...
निर्धन जनता का शोषण है कह कर आप हँसे। लोकतंत्र का अंतिम क्षण है कह कर आप हँसे। सबके सब हैं भ्रष्टाचारी कह कर आप हँसे। चारों ओर बड़ी लाचारी कह कर आप हँसे। कितने आप सुरक्षित होंगे मैं सोचने लगा। सहसा मुझे अकेला पा कर&...
 पोस्ट लेवल : कविता रघुवीर सहाय
माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवद् - भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता। वह घोड़ा बड़ा सुंदर था, बड़ा बलवान। उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था। बाबा भारती उसे "सु...
 पोस्ट लेवल : सुदर्शन कहानी
बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ीवालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है, और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बंबूकार्टवालों की बोली का मरहम लगावें। जब बड़े-बड़े शहरों की चौड़ी सड़कों पर घोड़े की पीठ चाबुक से धुनते हुए, इक्केवाले कभी घोड़े की...
जिन्दगी की ये कहानी बहुत ही अजीबोगरीब है। इसे कहना, समझना और इस जिन्दगी में किसका कितना हिस्सा है बताना बहुत ही मुश्किल है। मुश्किल ही नहीं शायद नामुमकिन है! जिन्दगी की इस कहानी में जाने-अनजाने जाने कितने ही किरदार और भाव आते हैं और चले जाते हैं, पता ही नहीं चलता ह...
 पोस्ट लेवल : आलेख राजीव उपाध्याय
कचहरी में बैठकर वह लगभग रो दिया था। ऐसा मामूली कार्य भी वह नहीं कर सकता? छोटे-छोटे आदमियों से असफल सिफारिश की खिन्‍नता लिए वह शाम को स्‍टेशन की ओर टहलता गया।तभी आते-जाते लोगों के बीच दिखायी पड़ा तहसील-स्‍तर का नया ग्राम-नेता - दुबला, लंबा, मूँछें सफाचट, गेहुँआ रंग।...
मैं लिख नहीं पाऊँगाभव्य भूमिका मेरे गीत के प्रस्तावाना के रूप में।एक कवि सेकविता की यात्राके बीच ही है साहस कुछ कहने का।फूलों से गिर हुएइन पँखुड़ियों में से हीलगता है उचित एक कोई।प्रेम अनुगूँजित होता रहेगा उसी सेजब तक पँखुड़ी वो बालों में तुम्हारे&nbsp...
डाकिए ने थाप दी हौले से आज दरवाजे पर मेरे कि तुम्हारा ख़त मिला। तुमने हाल सबके सुनाए ख़त-ए-मजमून में कुछ हाल तुमने ना मगर अपना सुनाया ना ही पूछा किस हाल में हूँ? कि तुम्हारा ख़त मिला। बता क्या जवाब दूँ मैं तुमको?&...
मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते जब कोई तागा टूट गया या ख़तम हुआ फिर से बाँध के और सिरा कोई जोड़ के उसमें आगे बुनने लगते हो तेरे इस ताने में लेकिन इक भी गाँठ गिरह बुनकर कीदेख नहीं सकता है कोई&nb...