ब्लॉगसेतु

मेरे घर का मेरा वो कोनाजो अब तुम्हारा हो चुका हैमुझमें तेरे होने की वही कहानी कहता हैजो कभी माँपिताजी के साथ सुनती थीऔर ईया बाबा को बताती थीं। कुछ भी नया नहीं है;ना झगड़ाना ही बातें प्यार की। पीढ़ियों से हम वही बातें कहते आ रहे हैंसफर वही चलता जा...
तूफान कोई आकरक्षण में चला जाता हैपर लग जाते हैं बरसोंहमें समेटने में खुद कोसंभला ही नहीं कि बारिश कोईजाती है घर ढहाकर।ये सिलसिला हर रोज का हैऔर कहानी में समय की लकीर कोखींचकर बढाते हैंघटाते हैंकि होने का मेरे मतलबआकर कोई रोज कह जाता है।-------------------------राजी...
पंडित जी,अस्‍सलाम अलैकुम।यह मेरा पहला खत है जो मैं आपको भेज रहा हूँ। आप माशा अल्‍लाह अमरीकनों में बड़े हसीन माने जाते हैं। लेकिन मैं समझता हूँ कि मेरे नाक-नक्श भी कुछ ऐसे बुरे नहीं हैं। अगर मैं अमरीका जाऊँ तो शायद मुझे हुस्‍न का रुतबा अता हो जाए। लेकिन आप भारत के प...
धूप में निकलो घटाओं मेंनहाकर देखोज़िन्दगी क्या है, किताबों कोहटाकर देखो।सिर्फ आँखों से ही दुनियानहीं देखी जाती दिल की धड़कन को भी बीनाईबनाकर देखो।पत्थरों में भी ज़बां होती हैदिल होते हैंअपने घर के दरो-दीवार सजाकर देखो।वो सितारा है चमकने दोयूं ही आँखों मेंक्य...
रदीफ़ का पता ना काफ़िये का फिर भी ग़ज़ल लिख रहे हैं॥ दुनिया के चलन में हो रहा जो उसी झूठ को सीख रहे हैं॥ देखिये ताब टूट जाने से गूंगे भी अब चीख रहे हैं॥ जो बोते रहे मेरी राह में कांटे आज फूल बनकर बिछ रहे हैं॥-------------------------र...
बाजार में एक जादू है। वह जादू आँख की राह का काम करता है। वह रूप का जादू है। पर जैसे चुम्बक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे ही इस जादू की भी मर्यादा है। जेब भरी हो और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है। जेब खाली पर मन भरा न हो, तो भी जादू चल जाएगा। मन...
 पोस्ट लेवल : आलेख जैनेंद्र कुमार
कभी हम सौदा-ए-बाज़ार हुए कभी हम आदमी बीमार हुए और जो रहा बाकी बचा-खुचा उसके कई तलबगार हुए॥ सितम भी यहाँ ढाए जाते हैं रहनुमाई की तरह पैर काबे में है और जिन्दगी कसाई की तरह॥अजब कशमकश है दोनों जानिब मेरे एक आसमान की बुलंदी क...
वैसे तो मुझे स्टेशन जा कर लोगों को विदा देने का चलन नापसंद है, पर इस बार मुझे स्टेशन जाना पड़ा और मित्रों को विदा देनी पड़ी। इसके कई कारण थे। पहला तो यही कि वे मित्र थे। और, मित्रों के सामने सिद्धांत का प्रश्न उठाना ही बेकार होता है। दूसरे, वे आज निश्चय ही पहले दर्...
गिद्ध.........!!!!!!!यह तस्वीर याद है आपको ?????इसे नाम दिया गया था 'द वल्चर एंड द लिटिल गर्ल'।इस तस्वीर में एक गिद्ध भूख से मर रही एक छोटी लड़की के मरने का इंतज़ार कर रहा है। इसे एक साउथ अफ्रीकन फोटो जर्नलिस्ट केविन कार्टर ने 1993 में सूडान के अकाल के समय खींचा था...
दूर-दूर तकआदमी ऐसा कोई दिखता नहींकि कर लें यकीन उस पर एक ही बार में।यकीन मगर करना भी हैतुझ पर भीऔर मुझ पर भी।ऐसा नहीं कि यूँ करके सिर्फ मुझसे ही हैहर आदमी ही इत्तेफाकन बारहा है।हर आदमी यहाँकश्ती एक ही में सवार हैजाना है एक ही जगहऔर एक ही मझधार हैबस रंग-पो...