ब्लॉगसेतु

आज फिर मैं, दिल अपना लगाना चाहता हूँ खुश है दुनिया, खुद को जगाना चाहता हूँ॥ तन्हाइयों की रात, गुजारी हमने अकेले सारी बहारों की फिर कोई, दुनिया बसाना चाहता हूँ॥ देर से लेकिन सही, आया हूँ लौटकर मगर मैं दर बदर अब नहीं, घर मैं बसाना चाहता हूँ॥ देखो मुड़कर इक बार फिर, अब...
मुश्किल नहीं बातों को भुलाकर बढ जाना आगे; पर धूल जो लगी है पीठ पर सालती है जब ना तब और सालती रहेगी जब तक कुछ ना कुछ होता रहेगा कि होने से फिर होने का इक सिलसिला हो जाएगा जो फिर कहानी में कई मोड़ तक ले जाएगा और जाने का सिला जानिब तक पहुँच ना पाएगा। ------------------...
कर जो-जो तू चाहता है कि मुक्कमल जहाँ में तू रहता है। हसरतें तेरी आसमानी हैं कि सब कुछ तू, तू ही चाहता है। जमीं आसमां एक करता है आसमां मगर जमीं पर ही रहता है। कोई सवाल नहीं है तुझसे मगर सवाल तो बनता है। अब तू जवाब दे ना दे आईना मगर सब कहता है। ----------------------...
वो कत्ल करने से पहले मेरा नाम पूछते हैं नाम में छुपी हुई कोई पहचान पूछते हैं। शायद यूँ करके ही ये दुनिया कायम है जलाकर घर मेरा वो मेरे अरमान पूछते हैं। तबीयत उनकी यूँ करके ही उछलती है जब आँसू मेरे होने का मुकाम पूछते हैं। ऐसा नहीं कि दुनिया में और कोई रंग नहीं पर क...
छोटा बेटा था मैं हाँ सबसे छोटा जिसके बालों की चाँदी को अनदेखा करके किसी ने बच्चा बनाए रखा था जिससे लाड़ था प्यार था दुलार था कि आदत जिसकी हो गई खराब थी कि अचानक अनचाही एक सुबह यूँ करके उठी कि मायने हर बात के बदल गए कि वो बच्चा आदमी सा बन गया कि बिस्तर भी उसका सोने क...
ढूँढ रहा हूँ जाने कब से धुँध में प्रकाश में कि सिरा कोई थाम लूँ जो लेकर मुझे उस ओर चले जाकर जिधर संशय सारे मिट जाते हैं और उत्तर हर सवाल का सांसों में बस जाते हैं। पर जगह कहां वो ये सवाल ही अभी उठा नहीं की आदमी अब तक अभी खुद से ही मिला नहीं।--------------------- र...
 पोस्ट लेवल : कविता व्यंग्य
ये जिन्दगी बड़ी अजीब है कि हर आदमी जो मेरे करीब है कि संग जिसके कुछ पल कुछ साल गुजारे थे मैंने; जिनमें से कइयों ने तो अँगुली पकड़कर चलना भी सिखाया था, दूर बहुत दूर चले जा रहे हैं जहाँ से वो ना वापस आ सकते हैं और ना ही मैं मिल सकता हूँ उनसे और इस तरह हर पल थोड़ा कम और...
मेरे कहे का यूँ कर ना यकीन कर मतलब मेरे कहने का कुछ और था।---------------------मेरे जानिब भी तो कभी रूख हवा का करो कि उदासियाँ भी सर्द मौसम सी होती हैं।---------------------है ही नहीं कुछ ऐसा कि मैं कहूँ कुछ तुमसे बात मगर जुबाँ तक आती है कोई ना कोई।----------------...