ब्लॉगसेतु

कभी हम सौदा-ए-बाज़ार हुए कभी हम आदमी बीमार हुए और जो रहा बाकी बचा-खुचा उसके कई तलबगार हुए॥ सितम भी यहाँ ढाए जाते हैं रहनुमाई की तरह पैर काबे में है और जिन्दगी कसाई की तरह॥अजब कशमकश है दोनों जानिब मेरे एक आसमान की बुलंदी क...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
सीधा-साधा डाकिया जादू करे महान एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान। - निदा फाज़ली निदा फाज़ली ने इन दो पँक्तियों में क्या कुछ नहीं कह दिया है! कुछ भी तो बाकी नहीं है! जीवन का सार है। शायद सारा। घटना एक ही होती है और हर आदमी अपने-अपने हिसाब से उसे अच्छा...
 पोस्ट लेवल : Hindi Article
ढूँढ रहा हूँ जाने कब से धुँध में प्रकाश में कि सिरा कोई थाम लूँ जो लेकर मुझे उस ओर चले जाकर जिधर संशय सारे मिट जाते हैं और उत्तर हर सवाल का सांसों में बस जाते हैं। पर जगह कहां वो ये सवाल ही अभी उठा नहीं की आदमी...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
तूफान कोई आकर क्षण में चला जाता है पर लग जाते हैं बरसों हमें समेटने में खुद को संभला ही नहीं कि बारिश कोईजाती है घर ढहाकर।ये सिलसिला हर रोज का हैऔर कहानी में समय की लकीर कोखींचकर बढाते हैंघटाते हैंकि होने का मेरे मतलबआकर कोई रोज कह जाता है।-----...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
कुछ चेहरेबस चेहरे नहीं होतेसूर्ख शर्तें होती हैं हमारे होने की। कुछ बातेंबस बातें नहीं होतींवजह होती हैं हमारे होने की। और बेवजह भी बहुत कुछ होता हैजिनसे जुड़ी होती हैंहमारी साँसें होने की।तो क्या कर इन्हें मैं याद करूँकि जीते रहें ये यूँ करकि रहे खबर मुझे...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
समय की ही कहानी कह रहे हैं सभीपशु, आदमी या हो फिर कोई चींटी।हेर-फेर है किरदारों में बसकि आइने की अराइश सेबह रही हैं स्वर लहरियाँ कईजो होकर गुजरती हैं कानों से सभी।समय की ही कहानी कह रहे हैं सभी॥उन स्वरों से धुन कई हैं निकलतींजो कहानी बनकर हैं पिघलतींऔर इस तरह हर आँ...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
जीवन की गति को लोग चक्रीय कहते नहीं थकते परन्तु जाने क्यों ये मुझे अजीब लगता है? क्या कारण है नहीं जानता? परन्तु इसके चक्रीय होने में अक्सर भ्रम हो जाता है। मुझे लगता है जैसे ये शंकुवन का कोई शंकुवृक्ष हो जिस पर एक ओर से चढ़ते-चढ़ते उसके शिखर पर पहुँचे ही होते हैं कि...
 पोस्ट लेवल : Hindi Article Literature
सूरज! तू क्या संग लाया है?आशाओं को,क्या पीली किरणों में बिखराया है?सूरज! तू क्या संग लाया है?सांसें जोबोझिल हैं अब तकउनको क्या तू सहलाया है?सूरज! तू क्या संग लाया है?मरते मन मेंक्या किरणें तेरीज्योति नई भर लाई हैं?विकल मनचंचल तन को क्यास्निग्ध सुधा से नहलाई हैं?सूर...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
मेरे घर का मेरा वो कोनाजो अब तुम्हारा हो चुका हैमुझमें तेरे होने की वही कहानी कहता हैजो कभी माँपिताजी के साथ सुनती थीऔर ईया बाबा को बताती थीं। कुछ भी नया नहीं है;ना झगड़ाना ही बातें प्यार की। पीढ़ियों से हम वही बातें कहते आ रहे हैंसफर वही चलता जा...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
The farm support plans announced by India and the United States have created a lot of noise mainly among the developed nations with surplus agriculture produce. These are under the scrutiny by the World Trade Organization members in WTO’s quarterly agriculture comm...
 पोस्ट लेवल : Economy English Article