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इस बार के दशहरा में वो हुआ जो कभी भी नहीं हुआ था। जिसका सपना लोग सत्तर साल से देख रहे थे वो इस बार ‘पहली बार’ हो ही गया। कहने का मतलब है कि कई सौ साल पर लगने वाले सूर्य और चन्द्र ग्रहण की तरह। हजारों सालों में पहली बार आनेवाली दैवीय मूहुर्त की दीपावली की रात की तरह...
 पोस्ट लेवल : Hindi Article Satire Literature
आजतक गाँधी जी के बरक्स जाने कितने लोगों को खडा करने की कोशिश की गई है परन्तु कोई भी गाँधी जी के बरक्स खडा नहीं हो पाया और आगे कोई खड़ा हो पाएगा कि नहीं, कहना मुश्किल है। जहाँ तक कुछ ऐतिहासिक चरित्र जैसे कि लाल बहादुर शास्त्री जी, सुभाष चन्द्र बोस जी या फिर भगत सिंह...
 पोस्ट लेवल : Hindi Article
दोस्ती दुश्मनी का क्या? कारोबार है ये। कभी सुबह कभी शाम तलबगार है ये॥ कि रिसालों से टपकती है ये कि कहानियों में बहती है ये। कभी सितमगर है ये और मददगार भी है ये॥इनके होने से आपको जीने की वजह मिलती और इस तरह चेहरे के...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
भारत में आर्थिक मंदी ने 2015 के अंत से ही दस्तक देना शुरू कर दिया था और इस ओर किसी का भी ध्यान नहीं गया। हालाँकि 2014 में रघुराम राजन ने वित्तीय मंदी की संभावना व्यक्त की थी। 2015 के बाद से ही व्यापार चक्र एवं वित्तीय चक्र सहित विभिन्न लीड इन्डीकेटर स्पष्ट तो नहीं...
 पोस्ट लेवल : Economy Hindi Article
कभी हम सौदा-ए-बाज़ार हुए कभी हम आदमी बीमार हुए और जो रहा बाकी बचा-खुचा उसके कई तलबगार हुए॥ सितम भी यहाँ ढाए जाते हैं रहनुमाई की तरह पैर काबे में है और जिन्दगी कसाई की तरह॥अजब कशमकश है दोनों जानिब मेरे एक आसमान की बुलंदी क...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
सीधा-साधा डाकिया जादू करे महान एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान। - निदा फाज़ली निदा फाज़ली ने इन दो पँक्तियों में क्या कुछ नहीं कह दिया है! कुछ भी तो बाकी नहीं है! जीवन का सार है। शायद सारा। घटना एक ही होती है और हर आदमी अपने-अपने हिसाब से उसे अच्छा...
 पोस्ट लेवल : Hindi Article
ढूँढ रहा हूँ जाने कब से धुँध में प्रकाश में कि सिरा कोई थाम लूँ जो लेकर मुझे उस ओर चले जाकर जिधर संशय सारे मिट जाते हैं और उत्तर हर सवाल का सांसों में बस जाते हैं। पर जगह कहां वो ये सवाल ही अभी उठा नहीं की आदमी...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
तूफान कोई आकर क्षण में चला जाता है पर लग जाते हैं बरसों हमें समेटने में खुद को संभला ही नहीं कि बारिश कोईजाती है घर ढहाकर।ये सिलसिला हर रोज का हैऔर कहानी में समय की लकीर कोखींचकर बढाते हैंघटाते हैंकि होने का मेरे मतलबआकर कोई रोज कह जाता है।-----...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
कुछ चेहरेबस चेहरे नहीं होतेसूर्ख शर्तें होती हैं हमारे होने की। कुछ बातेंबस बातें नहीं होतींवजह होती हैं हमारे होने की। और बेवजह भी बहुत कुछ होता हैजिनसे जुड़ी होती हैंहमारी साँसें होने की।तो क्या कर इन्हें मैं याद करूँकि जीते रहें ये यूँ करकि रहे खबर मुझे...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
समय की ही कहानी कह रहे हैं सभीपशु, आदमी या हो फिर कोई चींटी।हेर-फेर है किरदारों में बसकि आइने की अराइश सेबह रही हैं स्वर लहरियाँ कईजो होकर गुजरती हैं कानों से सभी।समय की ही कहानी कह रहे हैं सभी॥उन स्वरों से धुन कई हैं निकलतींजो कहानी बनकर हैं पिघलतींऔर इस तरह हर आँ...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature