ब्लॉगसेतु

खिल उठेगा आँचल धरा का, मानव मन अब अवसाद न कर, चहुओर प्रेम पुष्प खिलेंगें समय साथ है आशा तू धर।  पतझर पात विटप से झड़ते, बसँत नवाँकुर खिल आएगा, खुशहाली भारत में होगी  गुलमोहर-सा खिल जाएगा, बितेगा फिर समय ये भारी,  संय...
प्रीत व्यग्र हो कहे राधिका, घूँघट ओट याद हर्षाती ।मुँह फेरुँ तो मिले कान्हाई, जीवन मझधारे तरसाती ।।साँझ-विहान गुँजे अभिलाषा, मनमोहिनी- मिलन को आयी। प्रिये की छवि उतरी नयन में, अश्रुमाला गिर हिय समायी। जलती पीड़ा दीप माल-सी,  ...
पी प्रीत में कान्हा से कहे राधिका, घूँघट ओढ़े  याद हर्षाया करती है, मुँह फेरुँ राह में मिले मनमौजन-सी, जीवन मझधार में रुलाया करती है।  साँझ-सवेरे गुँजित डोले अभिलाषा, मनमोहिनी मिलने मुझसे आयी, परछाई प्रिये की  उतरी नयनन में,&n...
मूरत मन की  पूछ रही है, नयनों से लख-लख प्रश्न प्रिये, जीवन तुझपर वार दिया है,साँसें पूछ रहीं हाल प्रिये। समय निगोड़ा हार न माने,पुरवाई उड़ती उलझन में,पल-पल पूछूँ हाल उसे मैं,नटखट उलझाता रुनझुन मेंकुशल संदेश पात पर लिख दो,चंचल चित्त अति व्याकुल प्र...
महावन में दौड़ते देखे, अनगिनत जाति-धर्म और,मैं-मेरे के अस्तित्त्वविहीन तरु, सरोवर के किनारे सहमी, खड़ी मैं सुनती रही, निर्बोध बालिका की तरह, उनकी चीख़ें। ठिठककर बैठ गयी,अर्जुन वृक्ष के नीचे मैं,देख-सुन  रही थी,शही...
गूँथे तारिका नित सुंदर स्वप्न, प्रीत अवनी पर है अवदात ।कज्जल कुँज में झूलता जीवन,  समय सागर की है  सौगात।।  लहराती है नभ में पहन दुकूल ,शीतल बयार संग प्रीत पली ।उमड़ी धरा पर सुधी मानव की ,खिला नव-अँकुर धरणी चली ।छिपे तम में  मन के...
धड़कन है जो धड़कती रहती है,संग  साँसें भी चलतीं रहतीं हैं, थामें दिल का हाथ, हाथों में,आँखें भी हँसती-रोतीं रहती हैं। सृष्टि में बिखरीं हैं अनंत अविरल साँसें,धरती-जल-अंबर के आनन पर देखो,कहीं लहरायी बल्लरियों-सी कहीं, अनुभूति में उलझी टूटे तारों-सी...
मौन नितांत शून्य में खोजूँ ,प्रिया प्रीत अनुगामी-सी, झरते नयन हृदय में सिहरन, मधुर स्पंदन निष्कामी-सी।  तुहिन कणों से स्वप्न सजाए,मृदुल कंपन तन का गान,  शीतल झोंके का उच्छवास, ठहर हृदय ताने वितान। अंतर निहित प्रीत पथ मेरा,फिरी देश बंजा...
ढलती साँझ मुस्कुरायी, थामे कुँजों की डार, थका पथिक लौटा द्वारे,   गूँजे दिशा मल्हार।  पाखी प्रणय प्रीत राही,  शीतल पवन के साथ, मुग्ध लय में झूमा अंबर,  थामे निशा का हाथ,  चंचल लहर चातकी-सी, &nbsp...
 पोस्ट लेवल : ढलती साँझ... नवगीत
कुछ रंग अबीर का प्रीत से,मानव मानव पर मलते  हैं, बेसुध पड़ी धरा पर दिल्ली, मिलकर बंधुत्व  उठाते  हैं।सोनजही की बाड़,बाँधकर, किसलय क़समों-वादों की ।नीर बहा दे नयनों  से कुछ, बिछुड़ी निर्मल यादों की।बहका मन बेटों  के उसका,&nb...