ब्लॉगसेतु

टाँग देती हैं, समय में सिमटी साँसें, ज़िंदगी की अलगनी पर,  कुछ बिन गूँथे ख़्वाब ख़्वाहिशों में सिमटे,   तोड़ देती हैं वे दम, कुछ झुलस जाते हैं वक़्त की धूप से, कुछ रौंद देते हैं हम अपने ही क़दमों से, कुछ पनप जाती हैं रोहि...
भटक  रही दर बदर  देखो ! स्नेह  भाव  से  बोल  रही,  अमृत  पात्र  लिये  हाथों  में,सृष्टि, चौखट-चौखट  डोल  रही|विशिष्ट औषधि, जीवनदात्री,सर्वगुणों  का  शृंगार    किये&n...
हिंद की हिंदी के मासूम मर्म  का गुबार, मानव मस्तिष्क  सह न सका, क़दम-दर-क़दम धसाता गया शब्दों को,  बिखर गये भाव पैर पाताल को छूने-से लगे | अस्तित्त्व आहत हुआ हिंदी का, आह से आहतीत बिखरती-सी गयी, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ...
सुंदर सुमन-सा, सुरसरी-सा हो संसार सलोना,   सहज सफल सब जीवन साज सजे पथ पर, तके न राह क्षिणिक भी,  लू  के झोंके,   सहेजे सानिध्य सफ़र में सनातन साथी हो ऐसा,  भरा दौंगरा गिरे काया पर, मानव...
  धड़कनों ने बुना खुली आँखों से  देखा,            वह ख़्वाब निराला  है  |तसव्वुर से तराशा तमाम ख़्वाहिशों में सिमटा, वह चंद्रयान-2 उर  की ज्वाला  है |साँसों ने  सजाया  गौरव हृदय पर  ,...
हम समझते हैं उन नियमों को, जिन्हें भारत सरकार ने जनहित में जारी किया, न ही हम किसी पार्टी विशेष को सपोर्ट  कर रहे,   न ही  बग़ावत कर रहे  उन लोगों से जो,  इस एक्ट का विरोध कर  रहे हैं,   नये मोटर व्हीक...
ख़ामोशी से बातें करता था न जाने  क्यों लाचारी है  किपसीने की बूँद की तरह टपक ही जाती थी अंतरमन में उठता द्वंद्व ललाट पर सलवटें  आँखों में बेलौस बेचैनी छोड़ ही जाती थी दूध में कभी पानी की मात्रा कभी दूध...
                                           प्रति पल आँखें चुराती हूँ कविता से,  भाग्य देखो ! उसका,  सामने आ ही जाती है वह, कभी पाय...
                                           क्षितिज पटल पर, लिखती हूँ, प्रतिदिन एक कविता,धूसर रंगों से सजाती हूँ, उस पर तुम्हारा नाम । त...
 पोस्ट लेवल : कविता
 रेत के मरुस्थल-सा,  हृदय पर होता विस्तार, खो जाती है  जिसमें, स्नेह की कृश-धार, दरक जाती है,  इंसानियत, बंजर होते हैं,  चित्त के भाव, जज़्बात  में नमी, एहसास में होती, अपनेपन की कमी,&nb...