ब्लॉगसेतु

 तुम्हें मालूम है उस दरमियाँ, ख़ामोश-सी रहती कुछ पूछ रही होती है, मुस्कुराहट की आड़ में बिखेर रही शब्द, तुम्हारी याद में वह टूट रही होती है |बिखरे एहसासात बीन रही, उन लम्हात में वह जीवन में मधु घोल रही होती है,  नमक का दरिया बने नयन...
पावन प्रीत के सुन्दर सुकोमल सुमन, सुशोभित स्नेह से करती साल-दर-साल,  अलंकृत करती है हृदय में प्रति पल वह,  फिर यादों का कलित मंगलमय थाल |  बाती बना जलाती साँसें कोअखंड ज्योति-सी, जीवन में प्...
 उस मोड़ पर जहाँ  टूटने लगता है बदन छूटने लगता है हाथ देह और दुनिया से उस वक़्त उन कुछ ही पलों में उमड़ पड़ता है सैलाब यादों का  उस बवंडर में तैरते नज़र आते हैं अनुभव बटोही की तरह ...
थाईलैंड का एक हिस्सा खाओ याई नेशनल पार्क में बहता है वहाँ एक झरना नरक का  निगल रहा है वह ज़िंदगियाँ हाथियों की सिहर उठा मन देख ! ज़िंदगी की जंगनन्हें नाज़ुक हाथी के बच्चे की आह से आहतित आवाज़ मेंमर्म ममता का लिये   टपकत...
विश्वास के हल्के झोंके से  पगी मानव मन की अंतरचेतना छद्म-विचार को खुले मन से धारणकर स्वीकारने लगी, हया की पतली परत  सूख चुकी धरा के सुन्दर धरातल पर जिजीविषा पर तीक्ष्ण धूप बरसने लगी | अंतरमन में उलीचती स्नेह सर...
फटी क़मीज़ की बेतरतीब तुरपन, आलम मेहनत का दिखाने लगे, देख रहे  गाँव के गलियारे, वो हालत हमारी भरी चौपाल में सजाने लगे | सिमटने लगी कोहरे की चादर, उनके चेहरे भी नज़र आने लगे,  जल्द-बाज़ी में जनाब ने की थी लीपापोती, अब वे दर्...
उसकी ख़ामोशी खँगालती है उसे, वो वह  नहीं है जो वह थी, उसी रात ठंडी पड़ चुकी थी देह उसकी, हुआ था उसी रात उसका एक नया जन्म, एक पल ठहर गयीं थीं साँसें उसकीं,   खुला आसमां हवा में साँसों पर प्रहार, देख चुकी थी अवाक-सी वह,&nbsp...
एक नन्हा-सा पौधा तुलसी का, पनपा मेरे मन के एक कोने में, प्रार्थना-सा प्रति दिन लहराता, सुकोमल साँसों का करता दानसतत प्राणवायु बहाता आँगन में    संताप हरण करता हृदय का,   संतोष का सुखद एहसास सजा,  पीड़ा को पल में...
कहाँ से आये ये  काले बादल,  किसने गुनाह की गुहार लगायी,  जलमग्न हुए आशियाने, ज़िंदगियों ने चीख़-चीख़  पुकार लगायी |बरस रही क्यों घटा अधीर ? विहग गान से क्यों मेघ ने काली बदरी बरसायी, चिर पथिक थे गाँव के वे  ग्वाले,&nbs...
   रिदम धड़कनों में  प्रति पहर  खनकती ,   राग-अनुराग का एहसास है ऐसा, सुर-सरगम सजा साँसों में संगीत अधरों पर,   शब्द-भावों ने पहना लिबास वीणा की धुन के जैसा |संयोग-वियोग के भँवर में गूँथी रागिनी, राग म...