ब्लॉगसेतु

 यादें तुम्हारी, अनगिनत यादें ही यादें,  छिपाती हूँ, जिन्हें व्यस्तता के अरण्य में,  ख़ामोशी की पतली दीवार में, ओढ़ाती हूँ, उनपर भ्रम की झिमि चादर,  मुस्कुराहट सजा शब्दों पर,  अकेलेपन की बातों...
  अल्हड़ आँधी का झोंका भी ठहराव में, शीतल पवन का साथी बन जाता है,   परिवेश में दौड़ता हुआ,  मुठ्ठी में छिपाता है आहत अहं के तंतु, बिखरकर वही द्वेष बन जाता है |विचलित मन मज़बूरियाँ बिखेरता है, सिसकता है साँसों में जोश, ...
तल्ख़ियाँ तौल रहा तराज़ू से ज़माने नैतिकता को क्षणभँगुर किया,    दौर फिर वही वक़्त दोहराने लगा,  हटा आँखों से अहम-वहम की पट्टीवक़्त ने फ़रेब का शृंगार किया | संस्कारों में है सुरक्षित आज की नारी,   एहसास यही लगा...
प्रति वर्ष आते हो तुम लाखों की तादात में इस बार हुआ क्या ऐसा प्रवासी पक्षी तुम्हारी जान को सर्दियों में मेहमान बन मेरे  मान मेरा बढ़ाते हो  ख़ुशी से सीना मेरा  फूला नहीं समाता है गर्वित हो उठती हूँ देखो !तुम्हारे...
उन  पथरायी-सी आँखों  पर, तुम प्रभात-सी मुस्कुरायी,  मायूसी में डूबा था जीवन मेरा तुम बसंत बहार-सी बन आँगन में उतर आयी,  तलाश रहे थे ख़ुशियाँ जहां में,  मेहर बन हमारे दामन में तुम खिलखिलायी |चमन में मेरे सितारों-सी चह...
  समय के साथ समेटना पड़ता है वह दौर,   जब हम खिलखिलाकर हँसते हैं, बहलाना होता है उन लम्हों को,  जो उन्मुक्त उड़ान से अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हैं,  गठरी में बाँधनी पड़ती है, उस वक़्त धूप-सी बिखरी कुछ गु...
हृदय पर अनहोना आभास सीये, यथार्थ के नर्म नाज़ुक तार पर, दबे पाँव दौड़ती है दावाग्नि-सी, ख़ुशबू-सी उड़ती है विश्वास पर, आहट होती है उजली आस पर  |चलती है एहसास की थामे अँगुली,  अचल अंबर-सा लिये हाथ में हाथ, सवार रहती है प...
बरसी न बदरिया न मुलाक़ात बहारों से की,  न तितलियों ने ताज पहनाया न  फुहार ख़ुशियों ने की,   मिली न सौग़ात सितारों की, ढलती शाम में वह कोयल-सी गुनगुनायी,    मुद्दतों बाद आज मेरी दहलीज़ मुस्कुरायी, &nb...
 दायरे में सिकुड़ रही स्वतंत्रता, पनीली कर सकूँ ऐसा नीर कहाँ से लाऊं ? कविता सृजन की आवाज़  है चिरकाल तक जले,  कवि हृदय में वो आग कैसे जलाऊं ? समझा पाऊँ शोषण की परिभाषा,  ऐसा तर्क कहाँ  से लाऊं  ? स्वार्थ के...
 कुछ हर्षाते लम्हे अनायास ही मौन में मैंने धँसाये  थे  आँखों  के पानी से भिगो कठोर किया उन्हें  साँसों की पतली परत में छिपा ख़ामोश किया था जिन्हें फिर भी  हार न मानी उन्हो...