ब्लॉगसेतु

चर्चा मंच पर प्रत्येक शनिवार को  विषय विशेष पर आधारित चर्चा  "शब्द-सृजन" के अन्तर्गत  श्रीमती अनीता सैनी द्वारा प्रस्तुत की जायेगी।  आगामी शब्द-सृजन-7 का विषय होगा - 'पाँखुरी'/ 'पंखुड़ी'इस विषय पर अपनी...
स्नेहिल अभिवादन। आज की प्रस्तुति में हार्दिक स्वागत है।आज का दिन चर्चा मंच के लिए बेहद खास हैं। आज चर्चामंच के संस्थापक और हमारे प्रिये वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय श्री रूपचन्द्र शास्त्री जी का ६९ वां सालगिरह हैं। आज की प्रस्तुति को प्रस्तुत करते हुए मुझे आपार हर...
सादर अभिवादन।         चर्चामंच के 3600 वें अंक में हार्दिक स्वागत है। चर्चामंच अपनी निरंतरता का सिलसिला आज तक बनाये हुए है जिसे इस बुलंदी तक पहुँचाने का श्रेय निस्संदेह आदरणीय शास्त्री जी को जाता है।आदरणीय दिलबाग जी लंबे समय...
स्नेहिल अभिवादन। रविवारीय प्रस्तुति में आपका हार्दिक स्वागत है।देखो! इस बार मायूस है बसंत, दिलों में छाये हैं उदास साये, सरसराती बह रही बसंत बयार, विरहा मन को कछु न सुहाये ।अनीता सैनी **मुक्तक गीत"सदा गुणगान करते हैं" डॉ. रूपचन्द्...
स्नेहिल अभिवादन। विशेष शनिवारीय प्रस्तुति में हार्दिक स्वागत है।बयार अर्थात बहती हुई मोहक सुखदायी हवा. अलग-अलग ऋतुओं में बयार की तासीर पृथक-पृथक ढंग से प्रकृति में अपना असर दर्शाती है. सर्वाधिक चर्चित है बसंती बयार. प्रकृति जब फूल-पत्तों, रंग-बिरंगी लहलहाती फ़स...
                 स्नेहिल अभिवादन।
 पोस्ट लेवल : अनीता लागुरी 'अनु '
स्नेहिल अभिवादन। आज हम चर्चामंच पर स्वागत करते हैं अतिथि चर्चाकार के रूप में युवा रचनाकार आँचल पाण्डेय जी। आज की प्रस्तुति में पढ़िए आँचल जी की चिंतनपरक भूमिका के साथ उनकी पसंद की रचनाएँ--अनीता लागुरी 'अनु' बसे हिय प्रेम तो विष प्याला       ...
आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैनमन माँ शारदे मैं ज्ञान मांगता हूँ माँ मेधा से भर दो झोली अनु की कुण्डलियाँमधुमास हर किसी को साहिल न मिले हैपत्थर हम रोज थोड़ा मरते हैं थोड़ा जीते हैंअंतिम शब्द तेरे समझना जरूरी नहीं होता है हमेशा पा...
मित्रों!वसन्त ने दस्तक दे दी है। लेकिन उत्तर भारत में अभी भी शीत का मौसम बना हुआ है। पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही है और मैदानी भागों में कुहरे के साथ पर यदा-कदा बारिश भी हो रही है। ऐसे में खान-पान के साथ ऋत्वानुकूल वस्त्रों को जरूर पहनें। जरा सी लापरवाही से आपका स्वा...
स्नेहिल अभिवादन। आज की प्रस्तुति में हार्दिक स्वागत है।कंपकपाती सर्दी से राहत देने और तन मन में नई ऊर्जा का संचार करने के लिए वसंत ऋतु का आगमन हो चुका हैं प्रकृति का रूप सवरने लगा हैं ,फूल खिलने लगे हैं ,पेड़ों पर नई कोपलें आने लगी हैं ,पक्षियों की चहचाहट अ...