ब्लॉगसेतु

( 1 )पहाड़ों पर कई दिनों के बाद धूप खिली है ओक भर धूप पी तुहिन कण रूपा सा रूप लिए बिखर गए यत्र-तत्र सर्वत्र गिरि गोद में मोती से चमकते आकर्षित करते( 2 )उतर आया झील की सतह में पूनो का चाँद चन्द्रिका और...
 पोस्ट लेवल : चोका
बचपन से मेरे साथ मेंहर काम मेंहर बात मेंमेरी फ़िक्र मेंमेरे साथ रहनाभाई ! मुझेइतना है कहनामेरे लिए एककाम करनादिल में सहेज साथ  रखना बचपन की उनयादों का गहनाबाँधू मैं तुझकोरेशम के धागेमांगू  मैं मन्नतरब के आगेखुशियों भराहो संसार तेराआँचल के अ...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
बहुत कोशिशों के बाद भीअपने आप सेबेजारी है किजाने का नाम ही नही लेती..कभी ये नही तोकभी वो नहीऐसा है तोऐसा क्यों हैयदि नही है तोक्यों नहीं है..ढेर सारेकिन्तु-परन्तुऔर जवाब...उलझनों का ढेरलम्बी खामोशी उसके बादकुछ भी न करपाने की लाचारीअपने आप मेंरिक्तता...
आस किरणलिए अपनी आबसजी दृगों मेंबन के हसीं ख्वाबजगाती नेह रागमुस्कुराहटछलकी अनायास निर्विघ्न खुलेमन की देहरी केसांकल चढ़े द्वारमन का दीयाप्रज्वलित हो कर कितनी बारजाकर जलता हैगत के उस पार◆◆◆◆◆
 पोस्ट लेवल : सेदोका
साधारण कहलाना मंजूर नहीऔर असाधारण होना मांगता हैकठिन श्रम साध्य लक्ष्य साधनाचाहिए गर आसमान से पूरा चाँदतो दोषारोपण करना गलत होगावक्त कब थमा किसी की खातिरउसे पकड़़ने के लिए श्रम करना होगालकीरों को छोड़ नव जागरण लातू नहीं किसी से कम पहले स्वयं को समझादुनिया उसी की है ज...
 पोस्ट लेवल : कविता
मन ऊब गया है अपने आप सेआज कल खुद से कुट्टी चल रही है वरना ऊब के लिए फुर्सत कहाँ….जिन्दगी से तो अपनी गाढ़ी छनती हैअहसासों की जमीन को भीहोती है रिश्तों में उर्वरता की जरुरत माटी भी मांगती है चन्द बारिश की बूँदें...सोंधी सी खुश्बू बिखेरने की खातिरफोन उठाते ही...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
(This image has been taken from Google)सोचों मेंं डूबादेख सृष्टि के रंगमाटी का लालकहीं बरस गयातो अतिवृष्टिकहीं भूली डगरतो अनावृष्टिपृथ्वी की विषमतामन की पीड़ातोड़ कूल किनारेबन्द दृगों सेबन के अश्रु बूँद बह निकलीआहत होता मनतल्खी पा करघनीभूत सी पीड़ाहिय में आईअकुला...
 पोस्ट लेवल : चोका
(This photo has been taken from Google)कई बार आवाज दी मैने ....कभी तुम्हे याद कर केकभी खुद से उकता के..दिल ने बहुत दिल से बहुत बार दस्तक भी दीतुम्हारे दरवाजे परमगर तुम्हारी खामोशी ….,कहाँ मुखर होती थीबस दस्तक की प्रतिध्वनिलौट आती थी मुझ तकमै कौन हूँ मुझको यहजत...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
स्वर्णिम हो उठी वसुंधरा ऊषा रश्मि आने के बाददेख  नेहामृत बरसताप्रकृति मेंं जागा अनुरागकैनवास सी रत्नगर्भाबिखरे अनगिनत गुलमोहरपाथ मॉर्निंग वाक कास्मृति मंजूषा की धरोहरसांझ की उजास मेंखग वृन्द नीड़ लौटतेदेख भानु आगमननीड़ फिर से छोड़तेजीया तूने जितना भी वक्तमुझ...
 पोस्ट लेवल : कविता
(This photo has been taken from Google) अनवरत भाग-दौड़ कभी खुद के पैरों पर खड़े होने की जद्दोजहद तो कभी सब की अंगुली थाम कारवाँ के साथ चलने की मशक्कत …, जीवन बीता जा रहा रहा था गाड़िया लुहारों जैसा.. आज यहाँ-कल वहाँ ।  मेरे साथमेरे हम कदम बन भागते दौड़ते तुम …..,...
 पोस्ट लेवल : मन की वीथियाँ