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सरफ़रोश .हमारी तैयारियाँ जोर शोर से चलने लगीं. रज्जू भाई ने शहर के तमाम अखबारों को खबर कर दी कि पर्यावरण दिवस बड़े जोर शोर से मनाया जायेगा. अखबार वालों को वहाँ आने का निमंत्रण भी दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि रोज ही अखबार में हमारे सम्मेलन के बारे में खबरें छपने लगीं....
भूत राजा बाहर आजाप्रथम भाग पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करिये..तभी रज्जू भाई अपने प्यारे टॉमी को सुबह सवेरे टहलाने निकले. रज्जू भाई एक राजनीतिक दल के काफी सक्रिय सदस्य हैं. फिलहाल तो उनकी पार्टी हमारे प्रदेश में सत्ता में नहीं है. रज्जू भाई की बड़े बड़े नेताओं से खूब छ...
धीरे से जाना बगियन में .गत पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में हमारे मोहल्ले की कमेटी ने यह सोचा कि मोहल्ले के सारे बच्चों को इकठ्ठा करके उनको पर्यावरण से जुड़े हुए मुद्दों के विषय में जागरूक किया जाये. कमेटी के सदस्यों में यह सहमति बनी कि तमाम बच्चों को उन तथ्यों के बारे...
.रक्षा बंधन के अवसर पर, आइये आज सीखते हैं "बम्बइया राजमा" बनाना. वैसे तो रेसिपी चुराई हुयी है. इस पकाऊ पकवान के मूल खानसामे हैं साजिद खान, जिन्होंने ये रेसिपी रेडियो सिटी पर सुनाई थी..आवश्यक सामग्री:.1. महारानी – 12. राजकुमार – 13. राजकुमार का गरीब लेकिन सच्चा मित्...
.पिछली बार हमने सीखा था हरी मटर बनाना. आइये आज सीखते हैं 'शुगर फ्री', 'फ़ैट फ्री' और कॉलेस्ट्राल फ्री' हलवा बनाना..आवश्यक सामग्री:.1. अपहृत बच्चा – 12. अपहृत बच्चे की दुखियारी माँ – 13. काली पहाड़ी के पीछे वाला जंगल – 14. कुछ चट्टानें, काँच के टुकड़े – स्वादानुसार5. ख...
.आइये आज सीखते हैं हरी मटर बनाना..आवश्यक सामग्री:.1. मोटर कार – 1 (ध्यान रहे कि यह मोटर कार हरे रंग की ना हो)2. हरा पेंट – 4 लीटर3. कूची (ब्रश) – 14. बप्पी लाहिड़ी – 1.कहाँ से प्राप्त करें:.अपनी मोटर कार का प्रयोग कतई मत करिये. अपने पड़ोसी पर कुछ दिन आँख रखिये, यदि व...
.ये अनुगूँज में भी कहाँ - कहाँ से टॉपिक उठा लाते हैं, हाँ नहीं तो. बोले कि सोचो क्या होगा गर हिन्दुस्तान बन जाये अमरीका. हमने भी सोचा कि भैया कोई दिक्कत नहीं, केवल सोचने को ही तो कह रहे हैं, सही में थोड़े ही ना बना जा रहा है. लेकिन जब सोचा तो भइया सोच कर ही रूह भीतर...
.पुराणिक जी ने कुछ दिन पहले गोरा बनाने वाले जादूई लेप पर यह लेख लिखा था और साथ में बड़ी सी चिप्पी भी चिपका दी कि इस लेख को महिलायें कतई भी ना पढ़ें. मतलब साफ़ – पुरुष और पशु चाहें तो पढ़ लें महिलायें नहीं पढ़ सकतीं..अब साहब आप ही बताइये, ऐसी शर्त से भला कौन खुश हो सकता...
 पोस्ट लेवल : lovely fair
विकट रूप धरि.फाइनल इक्ज़ाम में लच्छू भाई अपने सूक्ष्म रूप पुर्चियाँ ले कर पहुँच गये. हमारा सेंटर जिस कॉलेज में पड़ा था, वह कॉलेज अपनी सख़्ती के लिये बहुत मशहूर था. खास कर श्री गजेन्द्र सिंह जी के लिये. श्री गजेन्द्र सिंह जी उसी कॉलेज में अध्यापक थे और अपनी सख़्ती के लि...
सूक्ष्म रूप धरि.आत्मनिर्भरता पर विश्वास रखने वाले भारतीयों पर यदि शोध किया जाये जो मेरे बचपन के मित्र लक्ष्मी प्रसाद का नाम उस शोध पत्र में शायद सबसे ऊपर आयेगा..लक्ष्मी प्रसाद मेरे साथ हाई स्कूल में पढ़ता था. अगर हम ‘आधुनिक’ दौर के किसी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़...