ब्लॉगसेतु

 “एक फुट के मजनू मियाँ”     कुछ दिनों पहले मुझे साधना वैद की “एक फुट के मजनू मियाँ” प्राप्त हुई मैंने सोचा कि शायद ये कोई उपन्यास होगा। लेकिन जब मैंने इसको खोलकर देखा तो पता लगा कि यह एक बालकृति है। जिसमें बच्चों के लिए छोटी-छोटी बीस बा...
संस्मरण साहित्य की अपूर्व निधिडॉ. महेन्द्र प्रताप पाण्डेय        हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं पर आधिपत्य रखनेवाले डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ जी की संस्मरण आधारित पुस्तक ‘स्मृति उपवन’ की पाण्डुलिपि मेरे समक्ष है। ‘मयंक’ जी...
"मुखर होता मौन" ग़ज़ल संग्रहमेरी नज़र से"वियोगी होगा पहला कवि, हृदय से उपजा होगा गान।निकल कर नयनों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान।।"     आमतौर पर देखने में आया है कि जो महिलाएँ लेखन कर रही हैं उनमें से ज्यादातर चौके-चूल्हे और रसोई की ब...
भगवान बुद्ध ने लोगों को मध्यम मार्ग का उपदेश किया। उन्होंने दुःख, उसके कारण और निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग सुझाया। उन्होंने अहिंसा पर बहुत जोर दिया है। उन्होंने यज्ञ और पशु-बलि की निंदा की। बुद्ध के उपदेशों का सार इस प्रकार है -·    &nbs...
      कल जैसे ही इण्डरनेट खोला तो अविनाश वाचस्पति के निधन का दुखद समाचार पढ़ने को मिला। अविनाश जी से मेरे एक आत्मीय मित्र के सम्बन्ध थे। आघात सा लगा यह हृदयविदारक सूचना पढ़कर।     अविनाश वाचस्पति दसियों साल से हैपेटाइटिस-बी रोग की...
साधना वैद की साधना“सम्वेदना की नम धरा पर”    जिसको मन मिला है एक कवयित्री का, वो सम्वेदना की प्रतिमूर्ति तो एक कुशल गृहणी ही हो सकती है। ऐसी प्रतिभाशालिनी कवयित्री का नाम है साधना वैद। जिनकी साहित्य निष्ठा देखकर मुझे प्रकृति के सुकुमार चिते...
मित्रों।कवि देवदत्त "प्रसून" आज हमारे बीच नहीं हैं।लेकिन उनका साहित्य अमर रहेगा।--गत वर्ष 25 नवम्बर, 2014 को मेेरे अभिन्न मित्रदेवदत्त प्रसून का अचानक देहान्त हो गया था। -- कल 19 सितम्बर, 2015 को सायं 4 बजे से मेरे एम.ए. के साथी और अभिन्न मित्र स्व. देवदत्त प्रसून...
खटीमा (उत्तराखण्ड)दूध में पानी मिलाने का अद्भुत् तरीका।सहकारी दुग्ध संघ चम्पावत के कर्मचारियों द्वारासरे आम बर्फ की 10 सिल्लियों को दूद के टैंकर में डाला जा रहा है।इसके दो फायदे हैं -पहला तो यह कि दूध खराब नहीं होगा।और दूसरा यह कि 7-8 कुन्टल पानी दूध में मिलाक...
अमर वीरांगना झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई की157वीं पुण्यतिथि पर उन्हें अपने श्रद्धासुमन समर्पित करते हुएश्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान कीयह अमर कविता सम्पूर्णरूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ!सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटि तानी थी,बूढ़े भारत में भी आ...
हिन्दी के उन्नायकजयशंकर प्रसाद"हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयंप्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञ सोच लो प्रशस्त पुण्य पंथ हैं - बढ़े चलो बढ़े चलो असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी सप...