ब्लॉगसेतु

--गुस्सा-प्यार और मनुहारआँखें कर देतीं इज़हार --नफरत-चाहत की भाषा काआँखों में संचित भण्डार--बिन काग़ज़ के, बिना क़लम केलिख देतीं सारे उद्गार--नहीं छिपाये छिपता सुख-दुखकरलो चाहे यत्न हजार--पावस लगती रात अमावसहो जातीं जब आँखें चार--नहीं जोत जिनकी आँखों मेंउनका ह...
--आँखों की कोटर में,जब खारे आँसू आते हैं।अन्तस में उपजी पीड़ा की,पूरी कथा सुनाते हैं।।--धीर-वीर-गम्भीर इन्हें,चतुराई से पी लेते हैं,राज़ दबाकर सीने में,अपने लब को सी लेते हैं,पीड़ा को उपहार समझ,चुपचाप पीर सह जाते हैं।अन्तस में उपजी पीड़ा की,पूरी कथा सुनाते हैं।।--च...
 पोस्ट लेवल : गीत आँसू की कथा-व्यथा
--जो मेरे मन को भायेगा,उस पर मैं कलम चलाऊँगा।दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,आगे को बढ़ता जाऊँगा।।--मैं कभी वक्र होकर घूमूँ,हो जाऊँ सरल-सपाट कहीं।मैं स्वतन्त्र हूँ, मैं स्वछन्द हूँ,मैं कोई चारण भाट नहीं।फरमाइश पर नहीं लिखूँगा,गीत न जबरन गाऊँगा।दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,...
--वातावरण कितना विषैला हो गया है।मधुर केला भी कसैला हो गया है।।--लाज कैसे अब बचायेगी की अहिंसा,पल रही चारों तरफ है आज हिंसासत्य कहने में झमेला हो गया है।मधुर केला भी कसैला हो गया है।।--अब किताबों में सजे हैं ढाई आखर,सिर्फ कहने को बचे हैं नाम के घर,आदमी कितना अकेला...
दोहा गीत--बात-बात पर हो रही, आपस में तकरार।भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार।।(१)बेकारी में भा रहा, सबको आज विदेश।खुदगर्ज़ी में खो गये, ऋषियों के सन्देश।।कर्णधार में है नहीं, बाकी बचा जमीर।भारत माँ के जिगर में, घोंप रहा शमशीर।।आज देश में सब जगह, फैला भ्रष्टाचार।भाई...
--कोरोना के काल में, ऐसी मिली शिकस्त।महँगाई ने कर दिये, कीर्तिमान सब ध्वस्त।।--ईंधन महँगा हो रहा, जनता है लाचार।बिचौलियों के सामने, बेबस है सरकार।।--दोनों हाथों से रहे, दौलत लोग समेट।फिर भी भरता है नहीं, उनका पापी पेट।।--दुख आये या सुख मिले, रखना मृदु...
--बौराई गेहूँ की काया,फिर से अपने खेत में।सरसों ने पीताम्बर पाया,फिर से अपने खेत में।।--हरे-भरे हैं खेत-बाग-वन,पौधों पर छाया है यौवन,झड़बेरी ने 'रूप' दिखाया,फिर से अपने खेत में।।--नये पात पेड़ों पर आये,टेसू ने भी फूल खिलाये,भँवरा गुन-गुन करता आया,फिर से अपने ख...
--वासन्ती मौसम हुआ, सुधर रहे हैं हाल।सूर्यमुखी ऐसे खिला, जैसे हो पिंजाल*।।--शैल-शिखर पर कल तलक, ठिठुरा था सिंगाल*।सूर्य-रश्मियाँ कर रहीं, उनको आज निहाल।।--राजनीति में बन गये, बगुले आज मराल।सन्तों का चोला पहन, पनप रहे पम्पाल*।--हिंसा के परिवेश में, सिं...
 पोस्ट लेवल : दोहे सिंह बने शृंगाल
--खिल उठा सारा चमन,दिन आ गये हैं प्यार के।रीझने के खीझने के,प्रीत और मनुहार के।। --चहुँओर धरती सज रही है,डालियाँ सब फूलती,पायल छमाछम बज रहीं,नव-बालियाँ हैं झूलती,डोलियाँ सजने लगीं,दिन आ गये शृंगार के।रीझने के खीझने के,प्रीत और मनुहार के।।--झूमते हैं मन-सुमन,गु...
 पोस्ट लेवल : गीत बज उठी वीणा मधुर
--नहीं जानता कैसे बन जाते हैं,मुझसे गीत-गजल।जाने कब मन के नभ पर,छा जाते हैं गहरे बादल।।--ना कोई कॉपी ना कागज,ना ही कलम चलाता हूँ।खोल पेज-मेकर को,हिन्दी टंकण करता जाता हूँ।।--देख छटा बारिश की,अंगुलियाँ चलने लगतीं है।कम्प्यूटर देखा तो उस पर,शब्द उगलने लगतीं हैं।।--नज...