ब्लॉगसेतु

--सारे जग से भिन्न है, अपना भारत देश।रहता बारह मास ही, पर्वों का परिवेश।। --पर्व अहोई-अष्टमी, दिन है कितना खास।जिसमें पुत्रों के लिए, होते हैं उपवास।।-- दुनिया में दम तोड़ता, मानवता का वेद।बेटा-बेटी में जहाँ, दुनिया करती भेद।।-- पुरुषप्र...
 उदात्त भावनाओं की शायरी“पेपरवेट”      पंजाबी मूल के कृषक परिवार में 1980 में जन्मी पेशे से शिक्षिका श्रीमती राजविन्दर कौर एक कामकाजी महिला हैं। मैंने अपनी अनुभवी दृष्टि से अक्सर यह देखा है कि कामकाजी महिलाओं का अधिकांश समय अपन...
--कर्णधारों की कुटिलता देखकर,देश का दूषित हुआ वातावरण।सभ्यता, शालीनता के गाँव में,खो गया जाने कहाँ है आचरण?--सुर हुए गायब, मृदुल शुभगान में,गन्ध है अपमान की, सम्मान में,आब खोता जा रहा अन्तःकरण।खो गया जाने कहाँ है आचरण?--शब्द अपनी प्राञ्जलता खो र...
--सवाल पर सवाल हैं, कुछ नहीं जवाब है।राख में दबी हुई, हमारे दिल की आग है।।--गीत भी डरे हुए, ताल-लय उदास हैं.पात भी झरे हुए, शेष चन्द श्वास हैं,दो नयन में पल रहा, नग़मग़ी सा ख्वाब है।राख में दबी हुई, हमारे दिल की आग है।।--ज़िन...
 पोस्ट लेवल : पथ नहीं सरल यहाँ गीत
--अपने पतियों पर करें, सभी नारियाँ गर्व।करवाचौथ सुहाग का, होता पावन पर्व।।--सजनी करवाचौथ पर, रखती है उपवास।साजन-सजनी के लिए, दिवस बहुत ये खास।।--जन्म-जिन्दगीभर रहे, सबका अटल सुहाग।साजन-सजनी में सदा, बना रहे अनुराग।।--जरा-जरा सी बात पर,...
--कर रही हूँ प्रभू से यही प्रार्थना।ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।--चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,उन्नति की सदा सीढ़ियाँ तुम चढ़ो,आपकी सहचरी की यही कामना।-- ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।आभा-शोभा तुम्हारी दमकती रहे,मेरे माथे पे बिन्दिया चमकती रहे,मुझपे रखना पि...
थक गईं नजरें तुम्हारे दर्शनों की आस में।आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।चमकते लाखों सितारें किन्तु तुम जैसे कहाँ,साँवरे के बिन कहाँ अटखेलियाँ और मस्तियाँ,गोपियाँ तो लुट गईं है कृष्ण के विश्वास में।आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।आ गया मौसम गुलाबी, मह...
 पोस्ट लेवल : गीत करवाचौथ पर
--कह देती हैं सहज ही, सुख-दुख-करुणा-प्यार।कुदरत ने हमको दिया, आँखों का उपहार।।--आँखें नश्वर देह का, बेशकीमती अंग।बिना रौशनी के लगे, सारा जग बेरंग।।--मिल जाती है आँख जब, तब आ जाता चैन।गैरों को अपना करें, चंचल चितवन नैन।।--दुनिया में होती अलग, दो आँखों की रीत।होती आँ...
 पोस्ट लेवल : दोहे आँखों का उपहार
--आशा और निराशा की जो,पढ़ लेते हैं सारी भाषा।दो नयनों में ही होती हैं,दुनिया की पूरी परिभाषा।।--दुख के बादल आते ही ये,खारे जल को हैं बरसाते।सुख का जब अनुभव होता है,तब ये फूले नहीं समाते।सरल बहुत हैं-चंचल भी हैं,इनके भीतर भरी पिपासा।दो नयनों में ही होती है...
--भाव सुप्त अब हो गये, हुई शायरी बन्द।नहीं निकलते कलम से, नये-पुराने छन्द।। --अँधियारा छाने लगा, गया भास्कर डूब।लिखने-पढ़ने से गया, मेरा मन अब ऊब।।-- थकी हुई है लेखनी, सूखे कलम-दवात।वृद्धावस्था में नहीं, यौवन जैसी बात।।-- मंजिल से पहले ह...
 पोस्ट लेवल : कालातीत बसन्त दोहे