ब्लॉगसेतु

--दर्द का सिलसिला दिया तुमनेआज रब को भुला दिया तुमने--हमने करना वफा नहीं छोड़ानफरतों का सिला दिया तुमने--खिलती चम्पा को नोंचकर फेंकाफिर नया गुल खिला दिया तुमने--हमको आब-ए-हयात के बदलेफिर हलाहल पिला दिया तुमने--मौत माँगी थी हमने मौला सेफिर से मुर्दा जिला दिया तुमने-...
--ये पात-पात निकले, वो डाल-डाल निकलेमुर्दार बस्तियों में, करने बवाल निकले --परदेशियों के आगे, घुटने वो टेकते हैं,ईमान के शिकारी, गठरी खँगाल निकले --निर्धन का जो अभी तक, दामन भी सिल न पाये शतरंज के खिलाड़ी, चलने को च...
--ये पात-पात निकले, वो डाल-डाल निकलेमुर्दार बस्तियों में, करने बवाल निकले --परदेशियों के आगे, घुटने वो टेकते हैं,ईमान के शिकारी, गठरी खँगाल निकले --निर्धन का जो अभी तक, दामन भी सिल न पाये शतरंज के खिलाड़ी, चलने को च...
--सालगिरह पर ब्याह की, पाकर शुभसन्देश।जीवन जीने का हुआ, सिन्दूरी परिवेश।।--कर्म करूँगा तब तलक, जब तक घट में प्राण।पा जाऊँगा तन नया, जब होगा निर्वाण।।--आना-जाना ही यहाँ, जीवन का है मर्म।वैसा फल मिलता उसे, जैसे जिसके कर्म।।--चुनकर गंगा घाट पर, पत्थर रहा तराश।किसी मोड...
--परिणय को अपने हुए, आज छियालिस वर्ष।मिल-जुलकर परिवार को, हमने बाँटा हर्ष।।--चलती जीवन-संगिनी, कदम मिलाकर साथ।उसके ही अस्तित्व से, कहलाये हम नाथ।।--जीवन के पथ में बहुत, देखे हमने मोड़।मंजिल पर बढ़ते गये, छोड़ समय की होड़।।--रखना सब पर हे प्रभो, दया-दृष...
नेक-नीयत हमेशा सलामत रहेडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'मीत बेशक बनाओ बहुत से मगर,मित्रता में शराफत की आदत रहे।स्वार्थ आये नहीं रास्ते में कहीं,नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।।--भारती का चमन आप सिंचित करो,भाव मौलिक भरो, शब्द चुनकर धरो,काल को जीत लो अपने ऐमाल से,गीत में सुर क...
--कामुकता-अश्लीलता, फैली चारों ओर।जीवन में कैसे मिले, सुख की उजली भोर।।--दुराचार में हो गये, कामी भँवरे मस्त।दिन में ही अब देश में, दिनकर होता अस्त।।--थमता दिखता है नहीं, कामुकता का दौर।दुनिया में कैसे बने, भारत अब शिरमौर।।--कामुकता से हो गया, लज्जित आज समाज।म...
 पोस्ट लेवल : दोहे कामुकता का दौर
--भाषण से बहलाने वालों, वचनों के कंगाल सुनोमाल मुफ्त का खाने वालों, जंगल के शृंगाल सुनो--बिना खाद-पानी के कैसे, खेतों में बिरुए पनपेंठेकेदारों ने उन सबका हड़प लिया है माल सुनो--प्राण निछावर किये जिन्होंने आजादी दिलवाई थीउन सबके वंशज गुलशन में आज हुए बेहाल सुनो--घेर...
       उन दिनों मेरे दोनों पुत्र बहुत छोटे थे। तब अक्सर पिकनिक का कार्यक्रम बन जाता था। कभी हम लोग पहाड़ पर श्यामलाताल चले जाते थे, कभी माता पूर्णागिरि देवी के मन्दिर में माथा टेकने चले जाते थे और कभी नेपाल के शहर महेन्द्र...
 पोस्ट लेवल : काठी का दर्द संस्मरण
--बादल नभ में छा गये, शुरू हुई बरसात।अन्धकार ऐसा हुआ, जैसे श्यामल रात।।--अकस्मात सरदी बढ़ी, निकले कम्बल-शाल।पर्वत के भूभाग में, जीना हुआ मुहाल।। --पर्वत पर दिनभर हुआ, खूब आज हिमपात।किट-किट बजते दाँत हैं, ठिठुर रहा है गात।।--मैदानी भू-भाग में, ओलों...
 पोस्ट लेवल : ठिठुर रहा है गात दोहे