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मित्रों!         मैं अक्सर यह देखा है कि सही जानकारी के अभाव में बहुत से लोग अपनी रचना में अपने मन से छन्द का नामकरण कर देते हैं। इसलिए आज प्रस्तुत  आपके सम्मुख प्रस्तुत है छन्दों के विषय में दुर्लभ जानकारी। जो व्यक्ति छन्दबद...
--माता का सम्मान करो,जय माता की कहने वालों।भूतकाल को याद करो,नवयुग में रहने वालों।।--झाड़ और झंखाड़ हटाकर, राह बनाना सीखो,ऊबड़-खाबड़ धरती में भी, फसल उगाना सीखो,गंगा में स्नान करो,कीचड़ में रहने वालों।भूतकाल को याद करो,नवयुग में रहने वालों।।--बेटों के जैसा ही, बेटी...
     एक अप्रैल अन्तर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस यूँ तो हर साल ही आता है। परन्तु मुझे इस दिन गुलबिया दादी की बहुत याद आती है।     बात आज से 45 वर्ष पुरानी है। मैंने उन दिनों इण्टर की परीक्षा दी थी। नजीबाबाद के मूर्ति देवी सरस्वती इण...
--कोरोना से खुद बचो, और बचाओ देश।लिखकर सबको भेजिए, दुनिया में सन्देश।।--जाकर कभी समूह में, करना मत घुसपैठ।लिखना-पढ़ना कीजिए, अपने घर में बैठ।।--अनजाने इस रोग से, घबड़ा रहा समाज।कोरोना से त्रस्त है, पूरी दुनिया आज।।--घोर आपदा काल में, धीरज रखना आप।एकल होकर कीजिए,...
 पोस्ट लेवल : दोहे धीरज रखना आप
संस्मरण(भूख) लगभग 45 साल पुरानी घटना है। उन दिनों नेपाल में मेरा हम-वतन प्रीतम लाल पहाड़ में खच्चर लादने का काम करता था। इनका परिवार भी इनके साथ ही पहाड़ में किराये के झाले (लकड़ी के तख्तों से बना घर) में रहता था।     कुछ दिनों के बाद इनका अपने घर...
 पोस्ट लेवल : संस्मरण ‘भूख
--सहमी कलियाँ आज चमन में।सन्नाटा है आज वतन में।।--द्वार कामना से संचित है,हृदय भावना से वंचित है,प्यार वासना से रंजित है,कैसे फूल खिलें उपवन में?सन्नाटा है आज वतन में।।--सूरज शीतलता बरसाता,चन्दा अगन लगाता जाता,पागल षटपद शोर मचाता,धूमिल तारे नीलगगन में।सन्नाटा है आज...
-- मात शारदे को कभी, मत बिसराना मित्र।मेधावी मेधा करे, उन्नत करे चरित्र।१।--कल तक जो बैरी रहे, आज बन गये मित्र।अच्छे-अच्छों के यहाँ, बिकते रोज चरित्र।२।--भावनाओं के वेग में, बह मत जाना मित्र।रखना हर हालात में, अपने साथ चरित्र।३। --आचरण में रहे, उज्जवल चित्र...
--सेवा का व्रत धार लिया है।मानवता से प्यार किया है।। -- रंग बहुत थे ढंग बहुत थे,कभी न उल्टा पथ अपनाया,जिसको अपना मीत बनाया,उसका पूरा साथ निभाया,हमने सूई-धागा लेकर,बैरी का भी वक्ष सिया है।मानवता से प्यार किया है।। --झंझावातों के दलदल में, कभी किसी...
--कोरोना के रोग से, जूझ रहा है देश।अगर सुरक्षित आप हैं, बचा रहेगा देश।।--आवश्यकता से अधिक. करना नहीं निवेश।हम सबके सहयोग से, सुधरेगा परिवेश।।--कमी नहीं कुछ देश में, सुलभ सभी हैं चीज।मगर नहीं लाँघो अभी, निज घर की दहलीज।।--विपदा के इस काल में, शासन...
--अपना धर्म निभाओगे कबजग को राह दिखाओगे कब--करना है उपकार वतन परसंयम रखना अपने मन परकभी मैल मत रखना तन परसंकट दूर भगाओगे कबनियमों को अपनाओगे कब--अभिनव कोई गीत बनाओ,सारी दुनिया को समझाओस्नेह-सुधा की धार बहाओवसुधा को सरसाओगे कबजग को राह दिखाओगे कब--सुस्ती-आलस दूर भगा...