ब्लॉगसेतु

--खींचातानी में हुआ, मोह आपसी भंग। नूरा-कुश्ती देखकर, लोग रह गये दंग।।--राजनीति का देश में, इतना बढ़ा खुमार।सत्ता पाने के लिए, होती मारामार।।--दशकों से दोनों रहे, सुख-दुख में थे साथ।लेकिन कुरसी के लिए, छोड़ दिया अब हाथ।।--नेक-नीति के साथ में, दोनों लड़े चुनाव।...
 पोस्ट लेवल : दोहे गठबन्धन की नाव
--कातिक की है पूर्णिमा, सजे हुए हैं घाट।सरिताओं के रेत में, मेला लगा विराट।।--एक साल में एक दिन, आता है त्यौहार।बहते निर्मल-नीर में, डुबकी लेना मार।।--गंगा तट पर आज तो, उमड़ी भारी भीड़।लगे अनेकों हैं यहाँ, छोटे-छोटे नीड़।।--खिचड़ी गंगा घाट पर, लोग पकाते आज।जितने भी...
--न्याय मिला श्री राम को, न्यायालय से आज।अब मन्दिर निर्माण का, पूरा होगा काज।।-- दोनें पक्षों को मिला, उनका अब अधिकार।मन्दिर-मस्जिद को दिया, धरती का उपहार।।-- भव्य बने मन्दिर वहाँ, मस्जिद आलीशान।अलग-अलग भू पर बने, पूजा-सदन महान।। --धर्मों के दरम्...
--न्यायालय तो साक्ष्य पर, करता सोच-विचार।आये जो भी फैसला, करो उसे स्वीकार।।--देते हैं सन्देश ये, गीता और कुरान।आपस में लड़ते नहीं, राम और रहमान।।--नहीं किसी की हार है, नहीं किसी की जीत।सत्य-तथ्य से है बँधा, होता काल-अतीत।।--सारी दुनिया जानती, भारत के थे राम।मच...
--जिस बालक का ईश पर, था अनुराग अनन्य।उस नानक के जन्म से, देश हो गया धन्य।।--जाते हैं करतारपुर, जत्थों में सिख लोग।आया सत्तर साल में, आज सुखद संयोग।।--सरिताओं में बह रहा, अब तो पावन नीर।गंगा में डुबकी लगा, निर्मल करो शरीर।।--नदी-झील मिट गया, अब तो सारा पं...
 पोस्ट लेवल : आज सुखद संयोग दोहे
--घर-आँगन-कानन में जाकर मैं,अपनी तुकबन्दी करता हूँ।अनुभावों का अनुगायक हूँ,मैं कवि लिखने से डरता हूँ।।--है नहीं मापनी का गुनिया,अब तो अतुकान्त लिखे दुनिया।असमंजस में हैं सब बालक,क्या याद करे इनको मुनिया।मैं बन करके पागल कोकिल,खाली पन्नों को भरता हूँ।मैं कवि लिखने स...
--देते मुझको हौसला, कदम-कदम पर मीत।बन जाते हैं इसलिए, ग़ज़लें, दोहे-गीत।।-- शब्द और व्याकरण का, मुझे नहीं कुछ ज्ञान।इसीलिए करता नहीं, मैं झूठा अभिमान।।-- टंकण कर लेता तभी, जब आते कुछ भाव।शब्दों में करता नहीं, जोड़-तोड़ बदलाव।। --गीत-ग़ज़ल दो...
 पोस्ट लेवल : लिखने का है रोग दोहे
--नहीं रहा अब समय पुरानाख़ुदगर्ज़ी का हुआ ज़माना--कैसे बुने कबीर चदरियाउलझ गया है ताना-बाना--पसरी है सब जगह मिलावटनकली पानी नकली दाना--देशभक्त हैं दुखी देश मेंलूट रहे मक्कार खज़ाना--आजादी अभिशाप बन गयीहुआ बेसुरा आज तराना--दीन-धर्म के फन्दे में हैमानवता का अब अफसाना...
 इतनी जल्दी क्या है बिटिया, सिर पर पल्लू लाने की।अभी उम्र है गुड्डे-गुड़ियों के संग,समय बिताने की।।मम्मी-पापा तुम्हें देख कर,मन ही मन हर्षाते हैं।जब वो नन्ही सी बेटी की,छवि आखों में पाते है।।जब आयेगा समय सुहाना, देंगे हम उपहार तुम्हें।तन मन धन से सब स...
 "गिलहरी"बैठ मजे से मेरी छत पर,दाना-दुनका खाती हो!उछल-कूद करती रहती हो,सबके मन को भाती हो!!तुमको पास बुलाने को,मैं मूँगफली दिखलाता हूँ,कट्टो-कट्टो कहकर तुमको,जब आवाज लगाता हूँ,कुट-कुट करती हुई तभी तुम,जल्दी से आ जाती हो!उछल-कूद करती रहती हो,सबके मन को भात...