ब्लॉगसेतु

--कोरोना के रोग से, जूझ रहा है देश।अगर सुरक्षित आप हैं, बचा रहेगा देश।।--आवश्यकता से अधिक. करना नहीं निवेश।हम सबके सहयोग से, सुधरेगा परिवेश।।--कमी नहीं कुछ देश में, सुलभ सभी हैं चीज।मगर नहीं लाँघो अभी, निज घर की दहलीज।।--विपदा के इस काल में, शासन...
--अपना धर्म निभाओगे कबजग को राह दिखाओगे कब--करना है उपकार वतन परसंयम रखना अपने मन परकभी मैल मत रखना तन परसंकट दूर भगाओगे कबनियमों को अपनाओगे कब--अभिनव कोई गीत बनाओ,सारी दुनिया को समझाओस्नेह-सुधा की धार बहाओवसुधा को सरसाओगे कबजग को राह दिखाओगे कब--सुस्ती-आलस दूर भगा...
--जीवन संकट में पड़ा, समय बड़ा विकराल।घूम रहा है जगत में, कोरोना बन काल।।--आवाजाही बन्द है, सड़कें हैं सुनसान।कोरोना का हो गया, लोगों को अनुमान।।--हालत की गम्भीरता, समझ गये हैं लोग।जनता अब करने लगी, शासन का सहयोग।।--घर में बैठे कीजिए, पाठन-पठन वि...
 पोस्ट लेवल : दोहे समय बड़ा विकराल
--मर्यादा के साथ में, खूब मनाओ हर्ष।स्वच्छ रहे परिवेश तो, होगा मंगल वर्ष।।--नवसम्वतसर में हुए, चौपट कारोबार।कोरोना के रोग से, जूझ रहा संसार।।--माता के नवरात्र में, करो नियम से काम।घर को मन्दिर समझकर, जपो ओम का नाम।।--बाधाएँ सब दूर हों, करो न मेल मिलाप।अप...
 पोस्ट लेवल : दोहे नवसम्वतसर 2077
--कोरोना को देख कर, बना रहे जो बात।वो ही देश-समाज को, पहुँचाते आघात।।--अच्छे कामों का जहाँ, होने लगे विरोध।आता देश समाज को, ऐसे दल पर क्रोध।।--मुखिया जिस घर में नहीं, होता है दमदार।समझो उस परिवार का, निश्चित बण्टाधार।। --मुखिया ने मझधार में, छोड़ी...
--कोरोना से मच रहा, जग में हाहाकार।एतिहात सबसे बड़ा, ऐसे में उपचार।।--सेनीटाइज से करो, स्वच्छ सभी घर-बार।बन्द कीजिए कुछ दिवस, अपने कारोबार।।--नहीं आ सका है अभी, कोरोना का तोड़।अपने घर में ही रहो, भीड़-भाड़ को छोड़।।--खाना अब तो छोड़ दो, मछली गोश्त-...
--जिन्दगी के गीत गाता जा रहा हूँसाँस की सरगम सुनाता जा रहा हूँ--पाँव बोझिल हैं थकी है पीठ भीबोझ जीवन का उठाता जा रहा हूँ--मिल गया जो भी नजराना मुझे शान से उसको लुटाता जा रहा हूँ--उम्र अब कितनी बची है क्या पताघोंसला फिर भी बनाता जा रहा हूँ--कुछ पुराने साज दामन...
--खेत और खलिहान में, दूषित हुआ अनाज।लुप्तप्राय सी हो गयी, गौरैया है आज।।--शहरी जीवन में नहीं, रहा आज आनन्द।गौरैया को है नहीं, वातावरण पसन्द।। --मौसम मेरे देश के, हुए आज विकराल।गौरैया का गाँव में, पड़ने लगा अकाल।।--लगे डालने खेत में, खाद विषैली लोग।इसीलिए...
मुखपृष्ठसाहित्यकारों की वेबपत्रिकावर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020देख तमाशा होली काडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"मस्त फुहारें लेकर आया,मौसम हँसी-ठिठोली का।देख तमाशा होली का।।उड़ रहे पीले-हरे गुलाल,हुआ है धरती-अम्बर लाल,भरे गुझिया-मठरी के थाल,चमकते रंग-बिरंगे गाल...
--दरक़ती जा रही हैं नींव, अब पुख़्ता ठिकानों कीतभी तो बढ़ गयी है माँग छोटे आशियानों की--जिन्हें वो देखते कलतक, हिक़ारत की नज़र से थेउन्हीं के शीश पर छत, छा रहे हैं शामियानों की--बहुत अभिमान था उनको, कबीलों की विरासत परहुई हालत बहुत खस्ता, घ...