ब्लॉगसेतु

मुखपृष्ठसाहित्यकारों की वेबपत्रिकावर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020सीखिए गीत से, गीत का व्याकरणडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' हार में है छिपा जीत का आचरण।सीखिए गीत से, गीत का व्याकरण।।बात कहने से पहले विचारो जराधूल दर्पण की ढंग से उतारो जरातन सँवा...
--पथ उनको क्या भटकायेगा, जो अपनी खुद राह बनातेभूले-भटके राही को वो, उसकी मंजिल तक पहुँचाते--अल्फाज़ों के चतुर चितेरे, धीर-वीर-गम्भीर सुख़नवरजहाँ न पहुँचें सूरज-चन्दा, वो उस मंजर तक हो आते--अमर नहीं है काया-माया, लेकिन शब्द अमर होते हैंशब्द धरोहर हैं समाज की, दिशाही...
--मौसम है बदला हुआ, बदले रीति-रिवाज।घोड़ों से भी कीमती, गधे हो गये आज।।--बनी हुई सम्भावना, नियमित नित्य अनन्त।बिकते ऊँचे दाम में, राजनीति के सन्त।। --जनसेवा के नाम पर, करते ओछे काम।इसीलिए तो हो रहा, लोकतन्त्र बदनाम।।--बाहर बने कपोत से, भीतर से हैं काग।महज दिखावे...
संस्मरण(भूख) लगभग 45 साल पुरानी घटना है। उन दिनों नेपाल में मेरा हम-वतन प्रीतम लाल पहाड़ में खच्चर लादने का काम करता था। इनका परिवार भी इनके साथ ही पहाड़ में किराये के झाले (लकड़ी के तख्तों से बना घर) में रहता था।     कुछ दिनों के बाद इनका अपने घर...
 पोस्ट लेवल : संस्मरण ‘भूख
--देख वायरस को मची, जग में हाहाकार।कोरोना से डर रहा, सारा ही संसार।।--जगह-जगह पर हो रही, कोरोना की जाँच।विज्ञानी इस रोग की, रहे पोथियाँ बाँच।।--कोरोना की उड़ रहीं, जगह-जगह अफवाह।अपने-अपने ढंग से, देते लोग सुझाव।।--चेहरा ढककर मास्क से, घर से निकलो आप।भीड़-भाड़ मे...
--सिसक रहा है आज वतन में, खुशियों का चौबारा।छल-फरेब की कारा में, जकड़ा है भाईचारा।।--पगडण्डी पर चोर-लुटेरे, चौराहों पर डाकू,रिश्तों की झाड़ी में पसरे, भाई बने लड़ाकू,सम्बन्धों में गरल भरा है, प्यार हुआ आवारा।छल-फरेब की कारा में, जकड़ा है भाईचारा।।--मन में कोरा स्वा...
 पोस्ट लेवल : गीत भाईचारा
प्राची का है जन्मदिन, छाया है उल्लास।देने शुभ आशीष को, अवसर आया खास।।जिसको करते है सभी, मन से प्यार-दुलार।उस पोती का जन्मदिन, लगता है त्यौहार।।होली की पिचकारियाँ, रंग, अबीर-गुलाल।जन्मदिवस सौगात ये, लाता है हर साल।।ले करके सद-भावना, वन में खिला पलाश।करते मंगल-कामना,...
--खेतों में बिरुओं पर जब, बालियाँ सुहानी आती हैं।जनमानस के अन्तस में तब, आशाएँ मुस्काती हैं।।--सोंधी-सोंधी महक उड़ रही गाँवों के गलियारों में,रंगों की बौछार हो रही आँगन में, चौबारों में,बैसाखी-होली की खुशियाँ घर-घर में छा जाती हैं।जनमानस के अन्तस में तब, आशाएँ मुस्...
--रंग-रंगीली इस दुनिया में, झंझावात बहुत गहरे हैं।कीचड़ वाले तालाबों में, खिलते हुए कमल पसरे हैं।।--पल-दो पल का होता यौवन,नहीं पता कितना है जीवन,जीवन की आपाधापी में, झंझावात बहुत उभरे हैं।कीचड़ वाले तालाबों में, खिलते हुए कमल पसरे हैं।।--सागर का पानी खारा है,नदिया...
 पोस्ट लेवल : कमल पसरे है गीत
--भटक रहा है आज आदमी, सूखे रेगिस्तानों में।चैन-ओ-अमन, सुकून खोजता, मजहब की दूकानों में।--मालिक को उसके बन्दों ने, बन्धक आज बनाया है,मिथ्या आडम्बर से, भोली जनता को भरमाया है,धन के लिए समागम होते, सभागार-मैदानों में।--पहले लूटा था गोरों ने, अब काले भी लूट रहे,धर्मभीर...