ब्लॉगसेतु

 "गिलहरी"बैठ मजे से मेरी छत पर,दाना-दुनका खाती हो!उछल-कूद करती रहती हो,सबके मन को भाती हो!!तुमको पास बुलाने को,मैं मूँगफली दिखलाता हूँ,कट्टो-कट्टो कहकर तुमको,जब आवाज लगाता हूँ,कुट-कुट करती हुई तभी तुम,जल्दी से आ जाती हो!उछल-कूद करती रहती हो,सबके मन को भात...
--सुबह होगी तो सूरज निकल जायेगावक्त के साथ सब कुछ बदल जायेगा--जिन्दगी में कभी हार मत माननाधूप में बर्फ सारा पिघल जायेगा--दिल की कोटर में भी तो जलाओ दियादेखकर रौशनी मनल मचल जायेगा --पोथियाँ तो जगत की पढ़ो प्यार सेदम्भ का आशियाँ खुद दहल जायेगा--जूझ...
--छठपूजा का आ गया, फिर पावन त्यौहार।माता जन-गण के हरो, अब तो सभी विकार।।--लोग छोड़कर आ गये, अपने-अपने नीड़।सरिताओं के तीर पर, लगी हुई है भीड़।।--अस्तांचल की ओर जब, रवि करता प्रस्थान।छठ पूजा पर अर्घ्य तब, देता हिन्दुस्थान।।--परम्पराओं पर टिका, सारा कारोबार।मान्यताओं...
 पोस्ट लेवल : दोहे षष्टी मइया
--अजनबी ख्वाब में आता क्यों हैहाले-दिल अपना सुनाता क्यों है--अपने लब पे अधूरी प्यास लिएतिशनगी अपनी बुझाता क्यों है--कौन से जन्म का ये नाता हैहमको अपना वो बताता क्यों है--खुली आँखों में रूबरू नहीं होताअपना अधिकार जताता क्यों है--बात करता है चाँद-तारों कीझूठ से अपने...
--जिन्दगी में बबाल मत करनाप्यार में कुछ सवाल मत करना--ये जहाँ आग का समन्दर हैतैरने का खयाल मत करना-- बेजुबानों में जान होती हैउनका झटका-हलाल मत करना-- प्रीत का ताल तो अनोखा हैडूबने का मलाल मत करना-- नेक-नीयत से मंजिले मिलतींझूठ से कुछ कमाल मत कर...
--जिन्दगी साथ निभाओ, तो कोई बात बने राम सा खुद को बनाओ, तो कोई बात बने -- एक दिन दीप जलाने से भला क्या होगा रोज दीवाली मनाओ, तो कोई बात बने -- इन बनावट के उसूलों में, धरा ही क्या है प्यार की आग जगाओ, तो कोई बात बने -- सिर्फ पु...
 पोस्ट लेवल : तो कोई बात बने ग़ज़ल
--यज्ञ-हवन करके बहन, माँग रही वरदान।भइया का यमदेवता, करना शुभ-कल्याण।।--भाई बहन के प्यार का, भइया-दोयज पर्व।अपने भइया पर करें, सारी बहनें गर्व।।--तिलक दूज का कर रहीं, सारी बहनें आज।सभी भाइयों के बने, सारे बिगड़े काज।।--रोली-अक्षत-पुष्प का, पूजा का ले थाल।बहन आरती क...
--गोवर्धन पूजा करो, शुद्ध करो परिवेश।गोसंवर्धन से करो, उन्नत अपना देश। --अन्नकूट के दिवस पर, करो अर्चना आज।गोरक्षा से सबल हो, पूरा देश समाज।।-- श्रीकृष्ण ने कर दिया, माँ का ऊँचा भाल।इस अवसर पर आप भी, बन जाओ गोपाल।।-- गौमाता से...
--निर्धन के सपनों को,उत्सव में साकार बनाओ तुम।अपने घर में मिट्टी के ही,दीपक सदा जलाओ तुम।।--चीनी लड़ियाँ नहीं लगाना, अबकी बार दिवाली में,योगदान सबको करना है, अपनी अर्थप्रणाली में,अपने जन-गण की ताकत, दुनिया को आज दिखाओ तुम।अपने घर में मिट्टी के ही,दीपक सदा जलाओ...
--दीपों की दीपावली, देती है सन्देश।घर-आँगन के साथ में, रौशन हो परिवेश।।--पाकर बाती-नेह को, लुटा रहा है नूर।नन्हा दीपक कर रहा, अन्धकार को दूर।।--झिलमिल-झिलमिल जल रहे, माटी के ये दीप।देवताओं के चित्र के, रखना इन्हें समीप।।--गौरी और गणेश के, रहें शारद...
 पोस्ट लेवल : दोहे रौशन हो परिवेश