ब्लॉगसेतु

--खुशियों की सौगात लिए होली आई है।रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।--रंग-बिरंगी पिचकारी ले,बच्चे होली खेल रहे हैं।मम्मी-पापा दोनों मिल कर,मठरी-गुझिया बेल रहे हैं।पकवानों का थाल लिए, होली आई है।रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।--जाड़ा भागा, गरमी आई,होली यह सन्...
--नभ में कुहरा है घना, गया दिवाकर हार।होली के इस पर्व मे, ठण्डक का उपहार।।--कहीं-कहीं ओले पड़े, कहीं हुई बरसात।मार्च मास में हो रहा, पर्वत पर हिमपात।।--देवभूमि में हो रहा, शीतलता का वास।बदले मौसम में हुई, होली बहुत उदास।।--हाथ जोड़कर दूर से, करना राम-जुहार।कोर...
 पोस्ट लेवल : दोहे होली बहुत उदास
--मस्त फुहारें लेकर आया,मौसम हँसी-ठिठोली का।देख तमाशा होली का।।--उड़ रहे पीले-हरे गुलाल,हुआ है धरती-अम्बर लाल,भरे गुझिया-मठरी के थाल,चमकते रंग-बिरंगे गाल,गोप-गोपियाँ खेल रहे हैं,खेला आँख-मिचौली का।देख तमाशा होली का।।मस्त फुहारें लेकर आया,मौसम हँसी-ठिठोली का।देख तमा...
आई बसन्त-बहार, चलो होली खेलेंगे!! रंगों का है त्यौहार, चलो होली खेलेंगे!!--बागों में कुहु-कुहु बोले कोयलिया, धरती ने धारी है, धानी चुनरिया, पहने हैं फुलवा के हार, चलो होली खेलेंगे!!--हाथों में खन-खन, खनके हैं चुड़ियाँ, प...
--लीक पीटने का कहीं, छूट न जाय रिवाज।मना रहा है इसलिए, महिला-दिवस समाज।।--जग में अब भी हो रहे, मौखिक जोड़-घटाव।कैसे होगा दूर फिर, लिंग-भेद का भाव।--नारी की अपनी अलग, कैसे हो पहचान।ढोती है वो उमर भर, साजन का उपनाम।।--सीमाओँ में है बँधी, नारी की प...
जीवन में अँधियारा, लेकिन सपनों में उजियाला है।आभासी दुनिया में होता, मन कितना मतवाला है।।--चहक-महक होती बसन्त सी, नहीं दिखाई देती है,आहट नहीं मगर फिर भी, पदचाप सुनाई देती है,वीरानी बगिया को जो, पल-पल अमराई देती है,शिथिल अंग में यौवन की,&nbs...
--महक लुटाते कानन पावन नहीं रहेगोबर लिपे हुए घर-आँगन नहीं रहे--आज आदमी में मानवता सुप्त हुईगौशालाएँ भी नगरों से लुप्त हुई दाग लगे हैं आज चमन के दामन मेंवैद्यराज सा नीम नहीं है आँगन मेंताल और लय मनभावन नहीं रहेगोबर लिपे हुए घर-आँगन नहीं रहे--यौवन आने से पहले सूखी...
--मना रहे थे लोग जब, होली का त्यौहार।पौत्र रत्न के रूप में, मुझे मिला उपहार।।--जन्मदिवस पर पौत्र को, देता हूँ आशीष।पढ़-लिखकर बन जाइए, वाणी के वागीष।।--कुलदीपक के साथ में, बँधी हुई ये आस।तुमसे ही गुलजार है, मेरा ये आवास।।--सारे जग में देश का, रौशन करना नाम।नयी सोच क...
जीवन में अँधियारा, लेकिन सपनों में उजियाला है।आभासी दुनिया में होता, मन कितना मतवाला है।।--चहक-महक होती बसन्त सी, नहीं दिखाई देती है,आहट नहीं मगर फिर भी, पदचाप सुनाई देती है,वीरानी बगिया को जो, पल-पल अमराई देती है,शिथिल अंग में...
मौसम कितना हुआ सुहाना।रंग-बिरंगे सुमन सुहाते।सरसों ने पहना पीताम्बर,गेहूँ के बिरुए लहराते।।--दिवस बढ़े हैं शीत घटा है,नभ से कुहरा-धुंध छटा है,पक्षी कलरव राग सुनाते।गेहूँ के बिरुए लहराते।।--काँधों पर काँवड़ें सजी हैं,बम भोले की धूम मची है,शि...