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संवेदनाओं के स्वर हैं“भावावेग”       कुन्दन कुमार का नाम साहित्यजगत के लिए अभी अनजाना है। हाल ही में इनका काव्य संग्रह “भावावेग” प्रकाशित हुआ है। जिसमें कवि की उदात्त भावनाओं के स्वर हैं।     मेरे पास समीक्षा की...
--लिए अजूबे साथ में, कुदरत की करतूत।आलू धरती में पलें, डाली पर शहतूत।।--धुँधला सा नभ हो गया, बरसा नभ से नीर।बदला मौसम तो हुआ, मनवा बहुत अधीर।।--उपवन में मिलने लगा, भँवरों को मकरन्द।कुदरत की शीतल हवा, देती है आनन्द।।--लीची बौरायी हुई, ललचाते हैं आम।...
 पोस्ट लेवल : करना मत कुहराम दोहे
रुद्रपुर (ऊधमसिंहनगर) में देशज सर्वोदय सांस्कृतिक समिति द्वारा आयोजित देशी मेला एवं होली महोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में मेरा काव्य पाठ।मित्रों!आज प्रस्तुत हैं मेरी तीन पुरानी रचनाएँ--(1)फूलों की मुझको चाह नहीं,मैं काँटों को स्वीकार करूँ।चन्दन से मुझको मोह नहीं,...
0-0गूँगी गुड़िया बोलती, अब बातें बेबाक।चमत्कार को देखकर, दुनिया है आवाक।।0-0गया महीना माघ का, आया फागुन मास।लोगों को होने लगा, गरमी का आभास।।0-0दस्तक देता द्वार पर, होली का त्यौहार।धूल भरी चलने लगी, चारों ओर बयार।।0-0आया समय बसन्त का, खिलने लगा पलाश।देख विफलता...
 पोस्ट लेवल : दोहे आया फागुन मास
--सुमन ढालता स्वयं को, काँटों के अनुरूप।नागफनी का भी हमें, सुन्दर लगता रूप।--सियासती दरवेश अब, नहीं रहे अनुकूल।मजबूरी में भा रहे, नागफनी के फूल।।--फूलों के बदले मिलें, उपवन में जब शूल।ऐसा लगता गन्ध को, भ्रमर गये हैं भूल।।--देश-काल-परिवेश के, बदल गये हैं अर्थ।उ...
 पोस्ट लेवल : नागफनी का रूप दोहे
--सारा उपवन महकता, चहक रहा मधुमास।होली का होने लगा, जन-जन को आभास।।--गेहूँ का अब हो गया, कुन्दन जैसा रूप।सरसों और मसूर को, सुखा रही है धूप।।--प्रेम और सौहार्द्र है, होली का आधार।बैर-भाव को भूलकर, कर लो सबसे प्यार।।--सन्तों के सपने करो, जीवन में साकार।गले मिलो सब प्...
 पोस्ट लेवल : दोहे कुन्दन जैसा रूप
--उग्रवाद-अलगाव की, सुलग रही है आग।लोग खून से खेलते, खुले-आम अब फाग।।--क्यारी में उगने लगी, अब जहरीली बेल।खेतों में होने लगा, कैसा खूनी खेल।।--धर्म-जाति के नाम पर, बढ़ने लगा जुनून।राजनीति के जाल में, सिसक रहा कानून।।--मान-मुनव्वल की अभी, बन्द करो मनुहार।देशद्रोह...
 पोस्ट लेवल : दोहे बन्द करो मनुहार
--आँचल में प्यार लेकर,भीनी फुहार लेकर.आई होली, आई होली,आई होली रे!--चटक रही सेंमल की कलियाँ, चलती मस्त बयारे।मटक रही हैं मन की गलियाँ,  बजते ढोल नगारे।निर्मल रसधार लेकर, फूलों के हार लेकर,आई होली,  आई होली,आई होली रे!--मीठे सुर में बोल...
 पोस्ट लेवल : गीत होली आई होली रे
परिचयनामा : डा. रुपचंद्र शाश्त्री "मयंक"June 04, 2009 को ताऊ डॉट इन परताऊ रामपुरिया द्वारा लिया गयामेरा साक्षात्कार        डा. रूपचन्द्र शाश्त्री “मयंक” से युं तो आप उनके ब्लाग उच्चारण के माध्यम से अच्छी तरह परिचित हैं. इनके ब्लाग ने ब...
--अमरीका के साथ में, होंगे कौल-करार।भारतवासी ट्रम्प के, स्वागत में तैयार।।--दिल्ली से गुजरात तक, लोगों में है हर्ष।स्वागत में संलग्न है, पूरा भारतवर्ष।।--अपने भारत देश की, दुनिया भर में शान।मोदी जी की शान में, झुकता सकल जहान।।--सर्व-धर्म-समभाव का, संगम हिन्दुस्त...