ब्लॉगसेतु

--अपने पतियों पर करें, सभी नारियाँ गर्व।करवाचौथ सुहाग का, होता पावन पर्व।।--सजनी करवाचौथ पर, रखती है उपवास।साजन-सजनी के लिए, दिवस बहुत ये खास।।--जन्म-जिन्दगीभर रहे, सबका अटल सुहाग।साजन-सजनी में सदा, बना रहे अनुराग।।--जरा-जरा सी बात पर,...
--कर रही हूँ प्रभू से यही प्रार्थना।ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।--चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,उन्नति की सदा सीढ़ियाँ तुम चढ़ो,आपकी सहचरी की यही कामना।-- ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।आभा-शोभा तुम्हारी दमकती रहे,मेरे माथे पे बिन्दिया चमकती रहे,मुझपे रखना पि...
थक गईं नजरें तुम्हारे दर्शनों की आस में।आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।चमकते लाखों सितारें किन्तु तुम जैसे कहाँ,साँवरे के बिन कहाँ अटखेलियाँ और मस्तियाँ,गोपियाँ तो लुट गईं है कृष्ण के विश्वास में।आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।आ गया मौसम गुलाबी, मह...
 पोस्ट लेवल : गीत करवाचौथ पर
--कह देती हैं सहज ही, सुख-दुख-करुणा-प्यार।कुदरत ने हमको दिया, आँखों का उपहार।।--आँखें नश्वर देह का, बेशकीमती अंग।बिना रौशनी के लगे, सारा जग बेरंग।।--मिल जाती है आँख जब, तब आ जाता चैन।गैरों को अपना करें, चंचल चितवन नैन।।--दुनिया में होती अलग, दो आँखों की रीत।होती आँ...
 पोस्ट लेवल : दोहे आँखों का उपहार
--आशा और निराशा की जो,पढ़ लेते हैं सारी भाषा।दो नयनों में ही होती हैं,दुनिया की पूरी परिभाषा।।--दुख के बादल आते ही ये,खारे जल को हैं बरसाते।सुख का जब अनुभव होता है,तब ये फूले नहीं समाते।सरल बहुत हैं-चंचल भी हैं,इनके भीतर भरी पिपासा।दो नयनों में ही होती है...
--भाव सुप्त अब हो गये, हुई शायरी बन्द।नहीं निकलते कलम से, नये-पुराने छन्द।। --अँधियारा छाने लगा, गया भास्कर डूब।लिखने-पढ़ने से गया, मेरा मन अब ऊब।।-- थकी हुई है लेखनी, सूखे कलम-दवात।वृद्धावस्था में नहीं, यौवन जैसी बात।।-- मंजिल से पहले ह...
 पोस्ट लेवल : कालातीत बसन्त दोहे
--शशि की किरणों में भरी, सबसे अधिक उजास।शरदपूर्णिमा धरा पर, लाती है उल्लास।१।--लक्ष्मीमाता धरा पर , आने को तैयार।शरदपूर्णिमा पर्व पर, लेती हैं अवतार।२।--त्यौहारों का आगमन, करे कार्तिक मास।सरदी का होने लगा, अब कुछ-कुछ आभास।३।--दीपमालिका आ रही, लेकर अब उपहा...
 पोस्ट लेवल : दोहे पावस का त्यौहार
शरद पूर्णिमा आ गयी, खुलकर हँसा मयंक।गंगा जी के नीर की, दूर हो गयी पंक।।--धान घरों में आ गये, कृषक रहे मुसकाय।अपने मन के छन्द को, रचते हैं कविराय।।--हरी-हरी उग आयी है, चरागाह में घास।धरती से आने लगी, सोंधी-तरल सुवास।।--देख-देख कर फसल को, खुश हो रहे कि...
 पोस्ट लेवल : दोहे खुलकर हँसा मयंक
हिन्दी साहित्य काउभरता हुआ युवा सिताराअमन चाँदपुरी नहीं रहा...*****************मेरे लिए यह व्यक्तिगत क्षति है।11 अप्रैल, 2016 कौ मैंनेखटीमा में आयोजित दोहाकार समागम मेंउन्हें “दोहा शिरोमणि से अलंकृत किया था।*****************श्रद्धांजलि स्वरूप उन्हीं की एक क्षणिक...
झूठ-मूठ का भर गया, जब मन में अभिमान।तब से लेखन की हुई, उनकी बन्द दुकान।। --नहीं ब्लॉग है चल रहा, मुखपोथी खामोश।मिला एक आघात तो, हुआ पलायन जोश।। --दुर्गम पथ को नापना, समझो मत खिलवाड़।चलने में जो दक्ष हैं, चढ़ते वही पहाड़।।-- एक-एक करके नहीं, चढ़त...
 पोस्ट लेवल : दोहे समझो मत खिलवाड़