ब्लॉगसेतु

            बरेली-पिथौरागढ़ राष़्टीय राजमार्ग पर खटीमा से 7 किमी दूर श्री वनखण्डी महादेव के नाम से विख्यात एक प्राचीन शिव मन्दिर है! यह दिल्ली से 300 किमी और बरेली से 100 किमी दूर है कभी यह स्थान घने जंगलों के मध्य में हुआ करता था...
--बेर-बेल के पत्र ले, भक्त चले शिवधाम।गूँज रहा है भुवन में, शिव-शंकर का नाम।१।--शिव मन्दिर में ला रहे, भक्त आज उपहार।दर्शन करने के लिए, लम्बी लगी कतार।२।--पावन गंगा नीर से, करने शिव अभिषेक। काँवड़ लेकर आ गये, प्रभु के दास अनेक।३।--जंगल में खिलने लगा, सेमल...
--कुंकुम बिन्दी मेंहदी, काले-काले बाल।रचकर दिखलाती हिना, अपना खूब कमाल।।--मेंहदी को मत समझना, केवल एक रिवाज।सुहागिनों का गन्ध से, हिना खोलती राज।।--हरी-भरी रहती हिना, क्या पतझड़-मधुमास।बिना हिना के सेज पर, खलता है सुख रास।।--बालक बृद्ध जवान को, देती है आनन्द।श...
--भोले-शंकर आओ-आओ।निद्रा-तन्द्रा दूर भगाओ।।--आज आदमी है बेचारा,बौराया है ये जग सारा,दूषित है परिवेश हमारा,हे शिव! आकर आज वतन में,डमरू का तुम नाद सुनाओ।निद्रा-तन्द्रा दूर भगाओ।।--छाया है घनघोर अँधेरा,नकली भगवानों ने घेरा,बड़े-बड़े हैं तम्बू-डेरा,सच्चाई को करो उजागर,...
--मौसम कितना हुआ सुहाना।रंग-बिरंगे सुमन सुहाते।सरसों ने पहना पीताम्बर,गेहूँ के बिरुए लहराते।।--दिवस बढ़े हैं शीत घटा है,नभ से कुहरा-धुंध छटा है,पक्षी कलरव राग सुनाते।गेहूँ के बिरुए लहराते।।--काँधों पर काँवड़ें सजी हैं,बम भोले की धूम मची है,शिवशंकर को सभी रिझाते।गेह...
--जाने कहाँ खो गया अपना, आज पुराना गाँव।नहीं रही अपने आँगन में, आज नीम की छाँव।।--घर-घर में हैं टैलीवीजिन, सूनी है चौपाल,छाछ-दूध-नवनीत न भाता, चाय पियें गोपाल,भूल गये नाविक के बच्चे, आज चलानी नाव।नहीं रही अपने आँगन में, आज नीम की छाँव।।--पह...
 पोस्ट लेवल : गीत आज नीम की छाँव
--साँसें धोखा दे जाती हैं,साँसों पर विश्वास न करना।सपने होते हैं हरजाई,सपनों से कुछ आस न करना।।--जो कर्कश सुर में चिल्लाते,उनको काग पुकारा जाता।जो खग मधुर गान को गाते,उनका स्वर कलरव कहलाता।हृदयहीन धनवान व्यक्ति से,कभी कोई अरदास न करना।सपने होते हैं हरजाई,सपनों स...
--दर्द की छाँव में मुस्कराते रहेफूल बनकर सदा खिलखिलाते रहे--हमको राहे-वफा में ज़फाएँ मिलीज़िन्दग़ी भर उन्हें आज़माते रहे--दिल्लगी थी हक़ीक़त में दिल की लगीबर्क़ पर नाम उनका सजाते रहे--जब भी बोझिल हुई चश्म थी नींद सेख़्वाब में वो सदा याद आते रहे--पास आते नहीं, दूर ज...
--कितने हसीन फूल, खिले हैं पलाश मेंफिर भी भटक रहे हैं, चमन की तलाश में--पश्चिम की गर्म आँधियाँ, पूरब में आ गयीग़ाफ़िल हुए हैं लोग, क्षणिक सुख-विलास में--जब मिल गया सुराज तो, किरदार मर गयाशैतान सन्त सा सजा, उजले लिबास में--क़श्ती को डूबने से, बचायेगा कौन अबशामिल हैं...
--सुमनों से करते सभी, प्यार और अनुराग।खेतों में मधुमक्खियाँ, लेने चलीं पराग।।-- आते ही मधुमास के, जीवित हुआ पराग।वासन्ती परिवेश में, रंगों का है फाग।।--उपवन में आकर मधुप, छेड़ रहे हैं राग।आम-नीम के बौर में, जीवित हुआ पराग।।--वासन्ती ऋतु आ गयी, शीत गया है...
 पोस्ट लेवल : दोहे जीवित हुआ पराग