ब्लॉगसेतु

--मात-पिता के चरण छू, प्रभु का करना ध्यान।कभी न इनका कीजिए, जीवन में अपमान।१।--वासन्ती मौसम हुआ, काम रहा है जाग।बगिया में गाने लगे, कोयल-कागा राग।२।--लोगों ने अब प्यार को, समझ लिया आसान।अपने ढंग से कर रहे, प्रेमी अनुसंधान।३।--खेल हुआ अब प्यार का, आडम्बर से युक...
--हग-डे (आलिंगनदिवस)--आलिंगन के दिवस में, करना मत व्यतिपात।कामुकता को देखकर, बिगड़ जायेगी बात।।--आलिंगन के दिवस पर, लिए अधूरी प्यास।छोड़ स्वदेशी सभ्यता, कामी आते पास।-- अपनाओ निज सभ्यता, छोड़ विदेशी ढंग।आलिंगन के साथ हो, जीवनभर का संग।।--पश्चिम के परिवेश की...
--केसरिया को छोड़कर, चढ़ा केजरी रंग।मोह देहली का हुआ, केसरिया से भंग।।--सारे एग्जिटपोल के, सही हुए अनुमान।बी.जे.पी. अध्यक्ष का, टूटा गर्व-गुमान।।--जनता अच्छे काम का, देती है ईनाम।धन-बल पर चलता नहीं, कोई कहीं निजाम।।--लड़ते सभी चुनाव को, मुद्दे लिए अनेक।शासन करता...
 पोस्ट लेवल : चढ़ा केजरी रंग दोहे
--उड़ता था उन्मुक्त कभी जो नीले-नीले अम्बर में।कैद हो गया आज सिकन्दर सोने के सुन्दर घर में।।--अपनी बोली भूल गया है,मिट्ठू-मिट्ठू कहता है,पिंजड़े में घुट-घुटकर जीता,दारुण पीड़ा सहता है,कृत्रिम झूला रास न आता, तोते को बन्दीघर मेंकैद हो गया आज सिकन्दर सोने के सुन...
आया है ऋतुराज अब, समय हुआ अनुकूल।बौराये हैं पेड़ भी, पाकर कोमल फूल।।--टेसू अंगारा हुआ, खेत उगलते गन्ध।सपने सिन्दूरी हुए, देख नये सम्बन्ध।।--पंछी कलरव कर रहे, देख बसन्ती रूप।शाखा पर बैठे हुए, सेंक रहे हैं धूप।।--सरसों फूली खेत में, गेहूँ करे किलोल।कानों में पड़ने लग...
--बौराई गेहूँ की काया,फिर से अपने खेत में।सरसों पर पीताम्बर छाया,फिर से अपने खेत में।।--नये पात पेड़ों पर आये,टेसू ने भी फूल खिलाये,भँवरा गुन-गुन करता आया,फिर से अपने खेत में।।--धानी-धानी सजी धरा है,माटी का कण-कण निखरा है,मोहक रूप बसन्ती छाया,फिर से अपने खेत में।।-...
आया है ऋतुराज अब, समय हुआ अनुकूल।बौराये हैं पेड़ भी, पाकर कोमल फूल।।--टेसू अंगारा हुआ, खेत उगलते गन्ध।सपने सिन्दूरी हुए, देख नये सम्बन्ध।।--पंछी कलरव कर रहे, देख बसन्ती रूप।शाखा पर बैठे हुए, सेंक रहे हैं धूप।।--सरसों फूली खेत में, गेहूँ करे किलोल।कानों में पड़ने लग...
--झाड़ू लेकर हाथ में, साफ करो परिवेश।आम आदमी ने दिया, दिल्ली को सन्देश।।--नेताओं की नीति पर, उठने लगे सवाल।फिर से दिल्ली जीतने, चला केजरीवाल।।--न्यूज चैनलों ने दिए, दिखा पूर्व अनुमान।पुनः केजरीवाल का, सफल हुआ अभियान।।--लोकतन्त्र में धर्म की, विफल हो गयी चाल।दि...
 पोस्ट लेवल : साफ करो परिवेश दोहे
--जीवन में अँधियारा, लेकिन सपनों में उजियाला है।आभासी दुनिया में होता, मन कितना मतवाला है।।--चहक-महक होती बसन्त सी, नहीं दिखाई देती है,आहट नहीं मगर फिर भी, पदचाप सुनाई देती है,वीरानी बगिया को जो, पल-पल अमराई देती है,शिथिल अंग में यौवन की, आभा अँगड़...
 पोस्ट लेवल : गीत जालजगत की शाला है
--पुष्प पुंज रखता सदा, पंखुड़ियों को जोड़।कभी सुमन की पाँखुरी, चटका कर मत तोड़।।--पर्यावरण सुधारना, मानव का दायित्व। बिना पाँखुरी के नहीं, पंछी का अस्तित्व।।--पंखुड़ियों को देखकर, भ्रमर करें गुंजार।करती कोमल पाँखुरी, बिरुओं का शृंगार।।--खुशी सभी को बाँटता, खिल...