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बेटी से आबाद हैं, सबके घर-परिवार।बेटो जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।।--चाहे कोई वार हो, कोई हो तारीख।दिवस सभी देते हमें, कदम-कदम पर सीख।।जगदम्बा के रूप में, जो लेती अवतार।उस बेटी से कीजिए, बेटो जैसा प्यार।।बेटी रत्न अमोल है, क...
तुलसी सूर-कबीर की, परम्परा है सुप्त।कविता के आकाश से, सन्त हो गये लुप्त।।--कविताओं का नाम है, लेकिन हैं आलेख।छन्द बन्द ताबूत में, ठुकी हुई गुलमेख।।--कविताओं का अब नहीं, रहा पुराना ढंग।छन्दबद्ध रचनाओं पर, लगा हुआ है जंग।।--बदल गयी है सभ्यता, बदल ग...
बद से बदतर हो रहे, सीमा पर हालात।दिखला दो नापाक को, उसकी अब औकात।।--अल्पसंख्यकों के लिए, चिन्ता की है बात।होते पाकिस्तान में, उन पर हैं जुल्मात।।--बन्द कीजिए पाक से, कूटनीति की बात।बता दीजिए नीच को, अब उसकी औकात।३।--बाँटी हमने पाक को, अब तक जो खैरा...
 पोस्ट लेवल : पाक आज कुख्यात दोहे
भौंहें वक्र-कमान न करलक्ष्यहीन संधान न कर ओछी हरक़त करके बन्देदुनिया को हैरान न कर दीन-धर्म पर करके दंगेईश्वर का अपमान न कर मन पर काबू करले प्यारेदिल को बेईमान न कर जल-जंगल से ही जीवन हैदोहन और कटान न कर जो जनता को आहत करदेऐसे कभी बयान न कर...
गौरय्या का नीड़, चील-कौओं ने हथियाया हैहलो-हाय का पाठ हमारे बच्चों को सिखलाया हैजाल बिछाया अपना छीनी है, हिन्दी की बिन्दी भीअपने घर में हुई परायी, अपनी भाषा हिन्दी भीखोटे सिक्के से लोगों के मन को बहलाया हैहिन्दीभाषा से हमने, भारत स्वाधीन कराया थाहिन्दी में भ...
सज्जनता का हो गया, दिन में सूरज अस्त।शठ करते हठयोग को, होकर कुण्ठाग्रस्त।।--नित्य-नियम से था दिया, जिनको भी गुण-ज्ञान।वो चोरी में लिप्त हो, बन बैठे शैतान।।--भूल गये कर्तव्य को, पण्डित और इमाम।पका-पकाया खा रहे, सारे नमक हराम।।--रोज बदलते जा रहे, चोला और जबान।...
 पोस्ट लेवल : दोहे एला और लवंग
गाँधी और पटेल ने, जहाँ लिया अवतार।मोदी का गुजरात ने, दिया हमें उपहार।।--देवताओं से कम नहीं, होता है देवेन्द्र।सौ सालों के बाद में, पैदा हुआ नरेन्द्र।।--साधारण परिवार का, किया चमन गुलजार।मोह छोड़ संसार का, त्याग दिया घर-बार।।--युगों-युगों के बाद में, लेते जन्म...
हो जायेंगे पाक के, अब तो टुकड़े पाँच।झूठ हमेशा हारता, और जीतता साँच।।-- पीओके बन जायगा, भारत का फिर अंग।होंगें तब कशमीर के, बन्धु-बान्धव संग।।-- सोच-समझकर फैसला, करती है सरकार।पूरे ही कशमीर पर, होगा अब अधिकार।।-- झेलेंगे अब हम नहीं, सीमा पर आतंक।ध...
रटे-रटाये शब्द हैं, घिसे-पिटे हैं वाक्य।अँगरेजी करने लगी, हिन्दी का शालाक्य।।--कहने को स्वतन्त्र हैं, लेकिन स्व स्वर्गीय।देवनागरी रह गयी, पुस्तक में पठनीय।।--अँगरेजी की कैद में, हिन्दी है परतन्त्र।अपनी भाषा के लिए, तरस रहा जनतन्त्र।।--बिगड़ गयी है वर...
सबके अपने ढंग हैं, सबके अलग रिवाज।श्राद्ध पक्ष में कीजिए, विधि-विधान से काज।।--श्रद्धा से ही कीजिए, निज पुरुखों को याद।श्रद्धा ही तो श्राद्ध की, होती है बुनियाद।।--मात-पिता को मत कभी, देना तुम सन्ताप।पितृपक्ष में कीजिए, वन्दन-पूजा-जाप।।--जिनके पुण्य-प्रताप...