ब्लॉगसेतु

सियाह रात है, छाया बहुत अन्धेरा हैअभी तो दूर तलक भी नहीं सवेरा हैअभी तो तुमसे बहुत दिल के राज़ कहने हैंमगर फलक़ पे लगा बादलों का डेरा हैछटेंगी काली घटाएँ तो बोल निकलेंगेगमों के बोझ का साया बहुत घनेरा हैहमारे घोंसलों में जिन्दगी सिसकती हैकुछ दरिन्दों ने आज...
--लगा हुआ ठेले पर ढेर।गली-गली में बिकते बेर।।--रहते हैं ये काँटों के संग।मनमोहक हैं बेरों के रंग।।--जो हरियल हैं, वे कच्चे हैं।जो पीले हैं, वे पक्के हैं।।--ये सबके मन को ललचाते।हम बच्चों को बहुत लुभाते।।--शंकर जी को भोग लगाओ।व्रत में तुम बेरों को खाओ।।-- ...
--जीवन से कम हो गया, एक सुहाना साल।क्या खोया क्या पा लिया, करे कौन पड़ताल।।--मना रहे हैं जन्मदिन, इष्ट मित्र परिवार।अपने-अपने ढंग से, लाये सब उपहार।।--जीवन-साथी चल रहा, थाम हाथ में हाथ।चार दशक से अधिक से, हम दोनों हैं साथ।।--धीरे-धीरे कट गये, ये&nbsp...
--आँख जब खोली जगत में, तभी था मधुमास पाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--हूँ पुराना दीप, लेकिन जल रहा हूँ,मैं समय के साथ, फिर भी चल रहा हूँ,पर्वतों को काट करके, रास्ता मैंने बनाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--था कभी शोला, अभी शबनम हुआ,स...
फागुन में कुहरा छाया है।सूरज कितना घबराया है।।अलसाये पक्षी लगते हैं।राह उजाले की तकते हैं।।सूरज जब धरती पर आये।तब हम दाना चुगने जायें।।भुवन भास्कर हरो कुहासा।समझो खग के मन की भाषा।।बिल्ली सुस्ताने को आई।लेकिन यहाँ धूप नही पाई।।नीचे जाने की अब ठानी।ठण्डक से है जान ब...
--मधुर पर्यावरण जिसने, बनाया और निखारा है,हमारा आवरण जिसने, सजाया और सँवारा है।बहुत आभार है उसका, बहुत उपकार है उसका,दिया माटी के पुतले को, उसी ने प्राण प्यारा है।।--बहाई ज्ञान की गंगा, मधुरता ईख में कर दी,कभी गर्मी, कभी वर्षा, कभ...
--मौसम लेकर आ गया, वासन्ती उपहार।जीवन में बहने लगी, मन्द-सुगन्ध बयार।। --सरदी अब कम हो गयी, बढ़ा धरा का ताप।उपवन में करने लगे, प्रेमी मेल-मिलाप।।खुश हो करके खिल रहे, सेमल और कपास।लोगों को होने लगा, वासन्ती आभास।।सरसो फूली खेत में, गया कुहासा हार।जीवन में...
--उतरी हरियाली उपवन में,आ गईं बहारें मधुवन में,गुलशन में कलियाँ चहक उठीं,पुष्पित बगिया भी महक उठी, अनुरक्त हुआ मन का आँगन।आया बसन्त, आया बसन्त।१।--कोयल ने गाया मधुर गान,चिड़ियों ने छाया नववितान,यौवन ने ली है अँगड़ाई,सूखी शाखा भी गदराई,बौराये आम, नीम-...
 पोस्ट लेवल : गीत आया बसन्त
--मैं हूँ निपट भिखारी, कुछ दान माँगता हूँ।झोली पसारकर माँ, मैं ज्ञान माँगता हूँ।। --दुनिया की भीड़ से मैं,बच करके चल रहा हूँ,माँ तेरे रजकणों को,माथे पे मल रहा हूँ,निष्प्राण अक्षरों में, मैं प्राण माँगता हूँ।झोली पसारकर माँ, मैं ज्ञान माँगता हूँ।। -- अज्ञान...
--आओ माता! सुवासित करो मेरा मन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।--घोर तम है भरा आज परिवेश में,सभ्यता सो गई आज तो देश में,हो रहा है सुरा से यहाँ आचमन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।--दो सुमेधा मुझे मैं तो अनजान हूँ,माँगता काव्य-छन्दों का वरदान हूँ,चा...