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कबीर साहब के पास आने - जाने वाले एक मिथिला निवासी ने काशी मरने से मुक्ति एवं मगहर मरने से अमोक्ष की प्राप्ति की बात कही इसी बात पर काशी छोड़ अतीर्थ मगहर न जाने का निवेदन किया | कबीर साहब अपनी दृढ भक्ति और गहन आत्मानिष्ठा के स्वर में लोगो को व्यामोह की ओर इशारा किये...
अमर शहीद - ए - वतन अशफाक उल्ला_खां का जन्म - शहादत व मजार स्थल का अब तक सफरजहां अक्सर आना जाना लगा रहता हैं। कौमी एकता की मिसाल अशफ़ाक कहते हैं :-
राष्ट्रपुरुष चंद्रशेखरआजादी के पहले दिन रहे भूखेदेश का बटवारा हुआ | हालाकी बाहरी दुनिया की घटनाओ के प्रति मैं बहुत सचेत नही था , लेकिन मानसिक रूप से मुझे बहुत दुख पहुचा | जो सयुकत परिवार से आया है , उसे परिवार का टूटना बुरा लगेगा ही | यह देश का टूटना था , इससे तकली...
राष्ट्रपुरुष चंद्रशेखरगांधी जी का नाम 1940 मे सुना उन्ही दिनो मैं आर्यसमाज के गहरे संपर्क मे आया | मऊ का आर्यसमाज मंदिर काफी सजग और सचेत था | आर्यसमाज के लोग राष्ट्रीय आंदोलनो से बहुत ही गहरे जुड़े हुये थे | वही पर मैंने आर्यसमाजियों के साथ पहले पहल प्रभात फेरिया नि...
राष्ट्रपुरुष चन्द्र्शेखरपढ़ने के लिए रोज पैदल जाता था दस किलोमोटर ऐसी थी वह बेबसी , एक अभाव की जिन्दगी | ज़िंदगी की जो पहली घटना जो मुझे याद है वह 1934 की है | उसी साल भूकंप आया था | 1934मे सात वर्ष की उम्र मे पहली बार स्कूल गया | उसके पहले ननिहाल मे था एक मुंशी दय...
प्रथम महिला छाताधारी ----डा गीता घोष 17 जुलाई , 1959 का एक अविस्मर्णीय दिन ! भारतीय महिलाओ की एक और छ्लांग - ऐसी छ्लांग , जो उचाइयों को छूनेवाली सभी पूर्व छ्लांगों से भिन्न थी | भिन्न ई नही अद्दितीय भी --- इस रूप मे की यह छ्लांग ज्ञान - विज्ञान की किसी उचाई को छूने...
मेहनतकशो का चहेता शायर :मख्दूम.................................मेहनतकशो के चहेते इंकलाबी शायर मख्दूम मोहिउद्दीन का शुमार हिन्दुस्तान में उन शख्सियतो में होता है , जिन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी आवाम की लड़ाई में गुजार दी | उन्होंने सुर्ख परचम तले आजादी की लड़ाई में हिस्...
अभी भी एक काँटे का ज़ख्‍़म हँसता है(उस आदमी के नाम जिसके जन्‍म से कोई संवत शुरू नहीं होता)वह बहुत देर तक जीता रहाकि उसका नाम रह सकेधरती बहुत बड़ी थीऔर उसका गाँव बहुत छोटावह सारी उम्र एक ही छप्‍पर में सोता रहावह सारी उम्र एक ही खेत में हगता रहाऔर चाहता रहाकि उसका ना...
भगत सिंह की वैचारिक विरासत -भगत सिंह ने अपने समय के राष्ट्रीय आन्दोलन पर जो आलोचनात्मक टिपण्णी की थी अपने देश काल की जमीन पर खड़े होकर उन्होंने भविष्य की सम्भावनाओं के बारे में जो आकलन प्रस्तुत किया था , कांग्रेसी नेतृत्व का जो वर्ग विश्लेषण किया था , देश की मेहनतकश...
सन्यासी विद्रोह और उसके सबक ( 1763-1800 )( क्या आज के सन्यासी , फकीर , महात्मा , धर्मगुरु व धार्मिक नेता सन्यासी विद्रोह के शहीदों व फकीरों से प्रेरणा ले सकेगे ? इन विदेशी साम्राज्यी ताकतों और उनके सहयोगी देश के धनाढ्य वर्गियो से संघर्ष कर सकेगे ? उनके द्वारा लायी...