ब्लॉगसेतु

भगत सिंह की वैचारिक विरासत -भगत सिंह ने अपने समय के राष्ट्रीय आन्दोलन पर जो आलोचनात्मक टिपण्णी की थी अपने देश काल की जमीन पर खड़े होकर उन्होंने भविष्य की सम्भावनाओं के बारे में जो आकलन प्रस्तुत किया था , कांग्रेसी नेतृत्व का जो वर्ग विश्लेषण किया था , देश की मेहनतकश...
सन्यासी विद्रोह और उसके सबक ( 1763-1800 )( क्या आज के सन्यासी , फकीर , महात्मा , धर्मगुरु व धार्मिक नेता सन्यासी विद्रोह के शहीदों व फकीरों से प्रेरणा ले सकेगे ? इन विदेशी साम्राज्यी ताकतों और उनके सहयोगी देश के धनाढ्य वर्गियो से संघर्ष कर सकेगे ? उनके द्वारा लायी...
भगीरथ की प्रतीक्षा में है माँ गंगा........................................विश्व के प्राचीनतम ज्ञान सकलन ऋग्वेद में गंगा सहित अनेक नदियों से राष्ट्र कल्याण की प्रार्थना है |गंगा भारत की पहचान है ,आस्था और संस्कृति है |मृत्यु के समय दो बूंद गंगाजल की अभीप्सा सनातन है...
लहू बोलता भी है जमात - ए - उलमा -ए हिन्द और उल्माओ के आन्दोलन भागउलेमाओं की राय थी की अब जो हालात है , उसके मुताबिक़ सिर्फ मुसलमानों के आन्दोलन से अंग्रेज को मुल्क से बाहर कर पाना मुश्किल ही नही बल्कि नामुमकिन है | इसी दौरान जालियाँवाला बाग़ के हादसे ने खुद - ब खु...
लहू बोलता भी हैं ---जमात - ए - उलमा -ए हिन्द और उल्माओ के आन्दोलन भाग- चार सबकी राय के बाद विद्रोह का फैसला तय हो गया | अब सवाल हुआ कि अमीरुल - मोमनीन किसे बनाया जाए | सबकी इत्तेफाके - राय से हाजी इम्दादुल्लाह सैय्यद बहादुर को अमीरुल - मोमनीन बनाकर मजलिसे - शुरा ने...
आगरा रेड फोर्ट - भाग दो -अदभुत है रेड फोर्ट---------------------------इस गेट से अन्दर जाने के बाद सामने ही खुबसूरत महल पर नजर पड़ती है यह है जहाँगीर महल यह लाल पत्थरों की बनी दो मंजिला इमारत है , अकबर ने इसे अपने पुत्र के लिए बनवाया था इसकी छत और दीवारे आकर्षित रंगो...
आगरा रेड फोर्ट में -- भाग एक24 सितम्बर हम सब भाई एह्तेशाम और मारुफ़ भाई से मिलने के बाद सीधे राज के छोटे भाई के घर पहुचे रात वही पर व्यतीत हुआ दूसरे दिन हम लोग अंशुल के यहाँ गये वहाँ पर राज को शहीद मेला की वेव साईट की प्रगति देखनी थी , सारा काम सम्पन्न होने के बाद व...
लहू बोलता भी है - जमात - ए - उलमा -ए हिन्द और उल्माओ के आन्दोलन भाग -तीन भाग दो से आगे -ब्रिटिश अधिकारियो के दस्तावेजो से पता चलता है कि मुस्लिम जंगे - आजादी तंजीम के जरिये संघर्ष की रोजाना आवाजे कही - न कही - से उठने लगी , जो की आगे चलकर सन 1857 की जंगे - आजादी की...
लहू बोलता भी हैं - जमात - ए - उलमा -ए हिन्द और उल्माओ के आन्दोलन भाग - दो इस बारे में शाह अब्दुल अजीज ने कहा था कि भारत अब मुस्लिमो और धिमिम्यो ( गैर मुस्लिम ) के लिए सकूं और हिफाजत की जगह नही रह गयी है काफ़िरो (अंग्रेजो ) की ताकत में लगातार इजाफा होता जा रहा है |...
बगाल की संस्कृति का आगमन आजमगढ़ तक --------------परानापुर में काली बाड़ी में होती है पारम्परिक तरीके से पूजाओकार स्वरूप की अविभाज्य ऊर्जा '' प्रकृति '' के रूप में '' शक्ति ' की उपासना वैदिक काल से प्रचलित रही है | किन्तु '' नव दुर्गा '' रूपायन '' सप्तशती '' मूर्ति स्...