ब्लॉगसेतु

 सुख दुख सुख-दुख जीवन में सदा, आते एक समान |सुख जल्दी से बीतता, दुख लाता व्यवधान |दुख लाता व्यवधान, झलकती पीड़ा भारी |ईश्वर करता दूर, सखे पनपती पीर तुम्हारी |कह राधे गोपाल, तसल्ली रक्खो मन में |आते रहते पास, अरे सुख-दुख जीवन में ||
   फूलों का उपहारचंपा की कलियां खिली, झूम रहा कचनार। बगिया सबको दे रही, फूलों का उपहार।।फूलों का उपहार , प्रकृति हम सबको बांटेफूलों के तो साथ, रहे हैं हरदम कांटे। कह राधे गोपाल,चलो मिलकर सब सखियां।खिली हुईं है आज, सखी चंपा की कलियां।।
 जग का अंदाजधरा नभ की आवाज़ क्या जाने चकोरी के नए अंदाज चांद क्या जाने देखकर चंदा को रातों में कितना उसको है नाज़ क्या जाने रोज रात में यूं छिप छिप कर एक टक देखती है चंदा को चांद इजहार कर रहा खुलकर निराला है आगाज क्या जाने&nbs...
बातप्रेमी आपस में करें, आंखों से ही बात। शब्दों के आधार तो, पहुंचाते आघात।। पहुंचाते आघात, बात कर सोच समझ कर। करना मत तकरार, सुलझती बातें मिलकर। कह राधे गोपाल, लगाओ नेह सुयश में। मिलकर रहना साथ, सदा प्रेमी आपस में।। लगातार ही आ रही बार...
पिता तुम्हारी हृदय से पिता तुम्हारी हृदय से, मिटी नहीं है याद |कैंसे अब देखूँ तुम्हे, मन करता फरियाद |मन करता फरियाद, देख लूँ पापा तुमको |दे देना आशीष, हमेशा आकर हमको |कह राधे गोपाल, वेदना सुना हमारी |बसी हुईं है याद, सदा से पिता तुम्हारी ||
 कुल्हाड़ीसुख-दुख जीवन में सदा, आते एक समान |सुख जल्दी से बीतता, दुख लाता व्यवधान |दुख लाता व्यवधान, झलकती पीड़ा भारी |ईश्वर करता दूर, सखे पनपती पीर तुम्हारी |कह राधे गोपाल, तसल्ली रक्खो मन में |आते रहते पास, अरे सुख-दुख जीवन में || कुल्हाड़ी का तुम कभी,...
 जलकर काया भस्म जलकर काया भस्म है, थी माटी की देह |जीवित रहने के लिए, खाते हैं अवलेह |खाते हैं अवलेह, पी रहे हैं गंगाजल |खबर नहीं है यार, अरे क्या होगा प्रतिफल |कह राधे गोपाल, रहो आपस में मिलकर |माटी की है देह, भस्म हो जाए जलकर ||: काम, क्रोध, मद, लोभ से,...
तुम्हारी याद के किस्सेतुम्हारी याद के किस्से ज़हन में जब उभरते हैं ।बिना ही साज सज्जा के दिलों से हम सँवरते हैं।। करोगे याद हमको जब कभी&...
साथ निभाती नार जल का संचय कीजिए, करना जल का पान। जल होता अनमोल है, जल को  जीवन जान।। जीवन के हर राह में ,साथ निभाती नार। बनकर...
नगरा गांव साफ सफाई का यहाँ , बच्चों रखना ध्यान ।स्वच्छ अगर परिवेश हो ,स्वस्थ रहे को जान।। वर्षा के जल का करो, जीवन में उपयोग ।गड्ढों&nb...