ब्लॉगसेतु

मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच
गीत   लिखूँ   प्रीत   में  मनमीत  के  लिखूँभावना  में   बज   रहे   संगीत   के   लिखूँ।।मन्त्रमुग्ध    ही    रहा    हूँ    मोहपाश    मेंदृष्टिपथ   &nbs...
भारत देश, राष्ट्र, व कांग्रेस ---- और कांग्रेस की गलतियां --डा श्याम गुप्त..                         =====================================भारत देश तो १५ अगस्त १९४७ को अंग्रेजों की सत्ता से आजाद ह...
 पोस्ट लेवल : भारत राष्ट्र
आज आजाद हुआ भारत ----आज की ग़ज़ल -गज़लोपनिषद ---=============================================******काशी से नरेंद्र भाई मोदी , प्रधान मंत्री भारत सरकार का आह्वान व उद्घोष -----का मूल मन्त्र ---१. कार्य में पारदर्शिता व परिश्रम का समन्वय डा श्याम  २.कार्य...
पवन पुत्र हनुमान वानर नही मानव थे … डा श्याम गुप्त =================================जगह-जगह मन्दिरों में स्थापित हनुमान जी की मूर्तियों को देख कर अधिकाँश हिन्दू और सभी विधर्मियों की आम धारणा है कि भगवान के रूप में प्रतिस्थापित हनुमान बानर थे |\इस धार...
 पोस्ट लेवल : वानर या मानव हनुमान
केदारनाथ जलप्रलय ---माता प्रकृति का श्राप एवं जगत पिता द्वारा दिया गया दंड ---      वह सर्वश्रेष्ठ, जगतपिता अपनी सुन्दरतम सृष्टि, प्रकृति के विनाश के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना, अपने पुत्र मानव को भी नहीं छोड़ता उसके अपराधों का दंड देने...
दाशराज्ञ युद्ध – और आज की राजनैतिक स्थिति –====================================बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि राम-रावण युद्ध एवं महाभारत युद्ध के मध्य के काल में एक भीषण युद्ध हुआ था जिससे भारत की किस्मत बदल गई। --------महाभारत युद्ध के लगभग ढाई हजार वर्ष...
देश की जनता होशियार -डा श्याम गुप्त                            देश की जनता होशियार ------एक -- राष्ट्र बचे या हम रोटी कपड़ा मकान में लगे रहें ----========================बिके हुए, भटके हुए, भ्रमित...
प्रतिवर्ष एक युवा साहित्यकार को ,डा श्याम गुप्त द्वारा प्रदत्त --स्व.ला. जगन्नाथ प्रसाद गुप्त स्मृति पुरस्कार -२०१९ ---साहित्यकार श्रीमती अमिता सिंह को -----
----एक वीर,सैनिक जब युद्ध पर जाता है तो उसके उदगार क्या होते हैं देखिये -----श्रृंगार रस में शौर्य , वीर रस की उत्पत्ति ----प्रस्तुत है एक नज़्म----'अब न ठहर पाऊंगा'---
 पोस्ट लेवल : शौर्य प्रेम