ब्लॉगसेतु

 हौसले के साथ में आगे बढ़ो।फासले इतने न अब पैदा करो।जिन्दगी तो है हकीकत पर टिकी,मत इसे जज्बात में रौंदा करो।चाँद-तारों से भरी इस रात में,उल्लुओं सी सोच मत रक्खा करो।बुलबुलों से ज़िन्दगी की सीख लो,राग अंधियारों का मत छेड़ा करो।उलझनों का नाम ही है जिन्...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल
नहीं वे जानते मुझको,  दुश्मनी करके बैठे हैं ,मेरे कुछ मिलने वाले भी,  उन्हीं से मिलके बैठे हैं ,समझकर वे मुझे कायर,  बहुत खुश हो रहे नादाँक़त्ल करने मुझे देखो , कब्र में घुस के बैठे हैं ............................................................गिला...
 पोस्ट लेवल : 2015 gazal by shalini kaushik
अज़ीब शख़्स था, आँखों में ख़्वाब छोड़ गयावो मेरी मेज़ पे, अपनी किताब छोड़ गयानज़र मिली तो अचानक झुका के वो नज़रेंमेरे सवाल के कितने जवाब छोड़ गयाउसे पता था, कि तन्हा न रह सकूँगी मैंवो गुफ़्तगू के लिए, माहताब छोड़ गयागुमान हो मुझे उसका, मिरे सरापे परये क्या तिलिस्म...
 पोस्ट लेवल : 'DR. ANWER JAMAL'
उल्टे सीधे सपने पाले बैठे हैंसब पानी में काँटा डाले बैठे हैंइक बीमार वसीयत करने वाला हैरिश्ते नाते जीभ निकाले बैठे हैंबस्ती का मामूल पे आना मुश्किल हैचौराहे पर वर्दी वाले बैठे हैंधागे पर लटकी है इज़्ज़त लोगों कीसब अपनी दस्तार सँभाले बैठे हैंसाहब-ज़ादा पिछली रा...
 पोस्ट लेवल : 'DR. ANWER JAMAL'
कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहजे मेंअजब तरह की घुटन है हवा के लहजे मेंये वक़्त किस की रुऊनत पे ख़ाक डाल गयाये कौन बोल रहा था ख़ुदा के लहजे मेंन जाने ख़ल्क़-ए-ख़ुदा कौन से अज़ाब में हैहवाएँ चीख़ पड़ीं इल्तिजा के लहजे मेंखुला फ़रेब-ए-मोहब्बत दिखाई देता हैअजब कमाल है उस ब...
 पोस्ट लेवल : 'DR. ANWER JAMAL'
मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है। अतः आप उसमें अपने ब्लॉग जोड़ दीजिए। मैेने ब्लॉगसेतु का स्वागत किया और ब्लॉगसेतु में अपने ब्लॉग जोड़ने का...
हसते हुए माँ-बाप की गाली नहीं खातेबच्चे है तो क्यो शौक से मिट्ठी नहीं खातेतुझ से नहीं मिलने का इरादा तो है लेकिनतुझसे न मिलेंगे ये कसम  भीं नही खातेसो जाते है फुटपाथ पे अखबार बिछाकरमजदूर कभी नींद की गोली नही खातेबच्चे भी गरीबी को समझने लगे शायदअ...
 पोस्ट लेवल : 'DR. ANWER JAMAL'
हमको बुला रहे हैं सियासत के काफिले ,सबको लुभा रहे हैं सियासत के काफिले ......................................................तशरीफ़ आवरी है घडी इंतखाब की,दिल को भुना रहे हैं सियासत के काफिले ......................................................तसलीम कर रहे हैं हमें...
नई दिल्ली। उर्दू शायरी के नाम वेबसाइट 'रेख्ता' ने एक साल में ही लोगों के बीच खास जगह बना ली है। उन लोगों के लिए यह खास है जो उर्दू के ज्यादा जानकार नहीं, मगर उर्दू की मिठास के कायल हैं। शनिवार को रेख्ता की सालगिरह के मौके कई नामी शायर और उर्दू के कद्रदां इकट्ठ...
 पोस्ट लेवल : 'DR. ANWER JAMAL'
फिरते थे आरज़ू में कभी तेरी दर-बदर ,अब आ पड़ी मियां की जूती मियां के सर ..............................................................लगती थी तुम गुलाब हमको यूँ दरअसल ,करते ही निकाह तुमसे काँटों से भरा घर .........................................................पहल...