ब्लॉगसेतु

नारी की व्यथामैंधरती माँ की बेटी हूँइसीलिए तोसीता जैसी हूँमैं हूँकान्हा के अधरों सेगाने वाली मुरलिया,इसीलिए तोगीता जैसी हूँ।मैंमन्दालसा हूँ,जीजाबाई हूँमैंपन्ना हूँ,मीराबाई हूँ।जी हाँमैं नारी हूँ,राख में दबी हुईचिंगारी हूँ।मैं पुत्री हूँ,मैं पत्नी हूँ,किसी की जननी ह...
मैं नये साल का सूरज हूँ,हरने आया हूँ अँधियारा। मैं स्वर्णरश्मियों से अपनी,लेकर आऊँगा उजियारा।।चन्दा को दूँगा मैं प्रकाश,सुमनों को दूँगा मैं सुवास,मैं रोज गगन में चमकूँगा,मैं सदा रहूँगा आस-पास,मैं जीवन का संवाहक हूँ,कर दूँगा रौशन जग सारा।लेकर आऊँगा उजियारा।।म...
 पोस्ट लेवल : नये साल का सूरज गीत
सूर, कबीर, तुलसी, के गीत,सभी में निहित है प्रीत।आजलिखे जा रहे हैं अगीत,अतुकान्तसुगीत, कुगीतऔर नवगीत।जी हाँ!हम आ गये हैंनयी सभ्यता में,जीवन कट रहा हैव्यस्तता में।सूर, कबीर, तुलसी कीनही थी कोई पूँछ,मगरआज अधिकांश नेलगा ली हैछोटी या बड़ीपूँछ या मूँछ।क्योंकि&n...
 पोस्ट लेवल : अकविता नमन और प्रणाम.
जलने को परवाने आतुर, आशा के दीप जलाओ तो। कब से बैठे प्यासे चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो।। मधुवन में महक समाई है, कलियों में यौवन सा छाया, मस्ती में दीवाना होकर, भँवरा उपवन में मँडराया, वह झूम रहा होकर व्याकुल, तुम पंखुरिया फैलाओ तो। कब स...
 पोस्ट लेवल : गीत आशा के दीप
मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग" सेएक गीतबादल का चित्रगीतकहीं-कहीं छितराये बादल,कहीं-कहीं गहराये बादल।काले बादल, गोरे बादल,अम्बर में मँडराये बादल। उमड़-घुमड़कर, शोर मचाकर,कहीं-कहीं बौराये बादल।भरी दोपहरी में दिनकर को,चादर से ढक आये बादल।खूब खेलते आँख-मिचौली,ठुमक...
 पोस्ट लेवल : बादल का चित्रगीत गीत
मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग" से एक गीतपा जाऊँ यदि प्यार तुम्हाराकंकड़ को भगवान मान लूँ, पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा! काँटों को वरदान मान लूँ, पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा! दुर्गम पथ, बन जाये सरल सा, अमृत घट बन जाए, गरल का, पीड़ा को...
मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है। अतः आप उसमें अपने ब्लॉग जोड़ दीजिए। मैेने ब्लॉगसेतु का स्वागत किया और ब्लॉगसेतु में अपने ब्लॉग जोड़ने का...
मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग" से एक गीत"अमलतास के पीले झूमर"तपती हुई दुपहरी में, झूमर जैसे लहराते हैं।कंचन जैसा रूप दिखाते, अमलतास भा जाते हैं।।जब सूरज झुलसाता तन को, आग बरसती है भू पर।ये छाया को सरसाते हैं, आकुल राही के ऊपर।।स्टेशन और सड़क किनारे, कड़ी...
मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग" से एक गीत"मखमली लिबास" मखमली लिबास आज तार-तार हो गया! मनुजता को दनुजता से आज प्यार हो गया!!  सभ्यताएँ मर गईं हैं, आदमी के देश में, क्रूरताएँ बढ़ गईं हैं, आदमी के वेश में, मौत की फसल उगी हैं, जीना भार...
मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग" से एक कविता"कठिन बुढ़ापा"बचपन बीता गयी जवानी, कठिन बुढ़ापा आया।कितना है नादान मनुज, यह चक्र समझ नही पाया।अंग शिथिल हैं, दुर्बल तन है, रसना बनी सबल है।आशाएँ और अभिलाषाएँ, बढ़ती जाती प्रति-पल हैं।।धीरज और विश्वास संजो कर, रखना अपने...