ब्लॉगसेतु

होली आई, होली आई,गुजिया, मठरी, बरफी लाई   मीठे-मीठे शक्करपारे,सजे -धजे पापड़ हैं सारे,चिप्स कुरकुरे और करारे,दहीबड़े हैं प्यारे-प्यारे,  तन-मन में मस्ती उभरी है,पिस्ता बरफी हरी-भरी है. पीले, हरे गुलाल लाल हैं,रंगों से सज गये थाल हैं.&n...
कभी कुहरा, कभी सूरज, कभी आकाश में बादल घने हैं।दुःख और सुख भोगने को, जीव के तन-मन बने हैं।।आसमां पर चल रहे हैं, पाँव के नीचे धरा है,कल्पना में पल रहे हैं, सामने भोजन धरा है,पा लिया सब कुछ मगर, फिर भी बने हम अनमने हैं।दुःख और सुख भोगने को, जीव के तन-मन बने हैं।।आयें...
मेरे गाँव, गली-आँगन में, अपनापन ही अपनापन है।देश-वेश-परिवेश सभी में, कहीं नही बेगानापन है।।घर के आगे पेड़ नीम का, वैद्यराज सा खड़ा हुआ है।माता जैसी गौमाता का, खूँटा अब भी गड़ा हुआ है।टेसू के फूलों से गुंथित, तीनपात की हर डाली हैघर के प...
 पोस्ट लेवल : टूटा स्वप्न गीत
रूप इतना खूबसूरतआइने की क्या जरूरतआ रहीं नज़दीक घड़ियाँजब बनेगा शुभमुहूरतबैठकर जब बात होंगीदूर होंगी सब कुदूरतलाख पर्दों में छुपाओछिप नहीं पायेगी सूरतदिल में हमने है समायीआपकी सुन्दर सी सूरतआज मेरे चाँद का है"रूप" कितना खूबसूरत
मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक गीत"रिश्ते और प्यार बदल जाते हैं"युग के साथ-साथ, सारे हथियार बदल जाते हैं।नौका खेने वाले, खेवनहार बदल जाते हैं।।प्यार मुहब्बत के वादे सब निभा नहीं पाते हैं,नीति-रीति के मानदण्ड, व्यवहार बदल जाते हैं।"कंगाली में आटा गीला" भूख बहु...
मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है। अतः आप उसमें अपने ब्लॉग जोड़ दीजिए। मैेने ब्लॉगसेतु का स्वागत किया और ब्लॉगसेतु में अपने ब्लॉग जोड़ने का...
मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक गीत"प्यार करते हैं हम पत्थरों से"बात करते हैं हम पत्थरों से सदा,हम बसे हैं पहाड़ों के परिवार में।प्यार करते हैं हम पत्थरों से सदा,ये तो शामिल हमारे हैं संसार में।।देवता हैं यही, ये ही भगवान हैं,सभ्यता से भरी एक पहचान हैं,हम...
मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक ग़ज़ल"कुछ प्यार की बातें करें"ज़िन्दगी के खेल में, कुछ प्यार की बातें करें।प्यार का मौसम है, आओ प्यार की बातें करें।।नेह की लेकर मथानी, सिन्धु का मन्थन करें,छोड़ कर छल-छद्म, कुछ उपकार की बातें करें।आस के अंकुर उगा...
मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक ग़ज़ल"जीत के माहौल में क्यों हार की बातें करें"सादगी के साथ में, शृंगार की बातें करेंजीत के माहौल में, क्यों हार की बातें करेंसोचने को उम्र सारी ही पड़ी है सामने,प्यार का दिन है सुहाना, प्यार की बातें करेंरंग मौसम ने भरे तो, रोज...
मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक गीतदिन आ गये हैं प्यार केखिल उठा सारा चमन, दिन आ गये हैं प्यार के।रीझने के खीझने के, प्रीत और मनुहार के।। चहुँओर धरती सज रही और डालियाँ हैं फूलती,पायल छमाछम बज रहीं और बालियाँ हैं झूलती,डोलियाँ सजने लगीं, दिन आ गये शृंगार क...