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मेघा हमको पानी दे दो राकेश ‘चक्र’मेघा हमको पानी दे दो खाने को गुरधानी दे दो ।आग उगलते सूरज दादा पानी दे दो, पानी दे दो ।।सूखी नदियाँ सरवर सारे फसलें सूखी, तरुवर प्यारेघर अरु बाहर चैन नहीं हैं चेहरे हो गए कारे-कारेलाओ नीर, क्षीर से भाई फसलें वही सुहानी दे दो ।।रोम-र...
ंमंगलयान     राकेश ‘चक्र’मार्स आॅबिटर मिशन का      यह पहला अभियान ।।मंगल-ग्रह अंतरिक्ष में      पहुँचा है मंगलयान ।।डा. के.राधाकृष्णन हैं      भारत देश की शान ।।‘इसरो’ इसका नाम अनूठा      यह...
पक्षी और बच्चे  राकेश ‘चक्र’उपवन के पक्षी हैं सारे । जैसे अपने बच्चे सारे ।।मोर नाचता घूम-घूम कर  ‘चाहा’ गाती झूम-झूम कर  काँव-काँव कर कौवे बोलें डाल-पात पर तोते डोलें राग-रंग में मन भी झूमा रंग-बिरंगे पक्षी न्यारे ।।हवा बह रही है सुखदाई फूल स...
 पोस्ट लेवल : कविता
खुशियाँ सबको ही मिलें, दीप जलें घर द्वार वर्षों -वर्षों प्यार की, वर्षें खूब फुहार  वर्षें खूब फुआर ,प्रीत की रीति निभाऊ जग में सारे प्यार के गीत नए मैं  गाऊँकहे चक्र कविराय हसाएँ प्रतिदिन मन कोदीप जले घर दुआर मिलें खुशियाँ ही सबको
 पोस्ट लेवल : कुण्डलिया
जो नहीं कल हो सका वह आज कर लो जिंदगी में कुछ नया अन्दाज भर लो सोचना वह बंद कर दो हो गया जो भी बुरा हैजिंदगी में आज तक जो मिली अपयश की सुरा हैश्रेष्ठ सोचो श्रेष्ठ कर लोयूं स्वयं पर नाज कर लोकौन है, जिसने न कोई भूल जीवन मे...
 पोस्ट लेवल : गीत
घाव है ताजा तनाव घट रही है ज़िन्दगी।आजकल तो काँच का घर बन गई है जिन्दगी।।कौन अपना कौन दुश्मन ये समझ आता नहीं।चील के हैं पंख फैले शुक यहाँ गाता नहीं।पत्थरों से दिल लगाकर पिस रही है जिन्दगी।।आदमी निज घर सजाता,गैर से मतलब नहीं।प्यार में भी अर्...
 पोस्ट लेवल : गीत जिन्दगी
सोने की  बैसाखी देकर, पाँव हमारे छीन लिए।नवयुग ने शहरीपन देकर, गाँव हमारे छीन लिए।।होली की फागों से सारा, जीवन ही रँग जाता था,और मल्हारों से सावन भी, मन्द-मन्द मुस्काता था,आपस के नातों की ममता का सागर लहराता था,जाति-धर्म का, ऊँच-नीच का, भेद नहीं भरमाता था,...
 पोस्ट लेवल : सोने की बैसाखी
राकेश ’चक्र’अभिलेखों में नाम - राकेश कुमार गुप्तपिता का नाम -स्व0 धीरज लालमाता का नाम -स्व0 द्रोपदी देवीधर्म पत्नी का नाम -श्रीमती रेनू गुप्ता, एम0एस0सी (गणित) बी0एड0 बच्चे -कुमारी अर्चना गुप्ता एम0टैक0, कुमारी धारा गुप्ता बी0टैक0 शिक्षा -स्नातकोत्तर (समाज...
 पोस्ट लेवल : परिचय
चिन्टू भइया रोज़ नहातेबाथरूम के अन्दर।उछल-कूद कर खूब नहातेलगते नटखट बन्दर।।मम्मी डाँटें पापा डाँटेंनहीं  मानते  वे  हैं।पानी की किल्लत होने परभौंह  तानते  वे  हैं।।एक  दिवस पूरी टंकी काखत्म  हुआ  जब  पानी।बिजली...
 पोस्ट लेवल : कविता