दिन, सप्ताह, महीनें और वर्ष, आग़ोश में समेटे वह जा रही है, शिकवा न शिकायत, जख़्म अनगिनत लिये जा रही है  |अक्स इबादत का मक़बूल किये,  बदलने स्वरुप इस जहां का जा रही है,   2019 को 2020 कह पुकारेंगे,   यह...