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sanjiv verma salil
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नवगीत:*गरियाए बिनहजम न होताखाना, किसको कोसें?.वैचारिक प्रतिबद्ध भौत हमजो न साथ हो, करें फौत हमझूठ - हकीकत क्या?क्यों सोचें?स्वार्थ जियें, सर्वार्थ-मौत हमजुतियाए बिननींद न आतीबैर हमेसा पोसें.संसद हो या टी. व्ही. चरचाजन-धन का लाखों हो खरचानकल मार  याधमकी दे...
 पोस्ट लेवल : नवगीत : bhasha geet
sanjiv verma salil
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भाषा गीत: हिन्द और हिंदी की जय-जयकार करें हम भारत की माटी, हिंदी से प्यार करें हम *भाषा सहोदरी होती है हर प्राणी की अक्षर-शब्द बसी छवि शारद कल्याणी की नाद-ताल, रस-छंद, व्याकरण शुद्ध सरलतम जो बोले वह लिखें-पढ़ें विधि जगवाणी की संस्कृत-पुत्री को अपना गलहार करें हम हिन...
 पोस्ट लेवल : : bhasha geet भाषा गीत संजीव sanjiv