ब्लॉगसेतु

Shreesh Pathak
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पहले मेरे गाँव मे लोगों के घर छोटे हुआ करते थे । घर के आमने-सामने, अग़ल- बग़ल खुली ज़मीन ख़ूब हुआ करती थी ।  मुझे याद है मेरा खुद का घर छोटा सा था । तीन चार कमरे हुआ करते थे । मिटटी की दीवार हुआ करती थी , लकड़ी के दरवाज़े साँकल वाले और खपरैल की छत । घर के सामन...
Shreesh Pathak
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यूंइग क्रिश्चियन कालेज ( ईसीसी)समय की रफ्तार का पता ही नही चलता , दिसंबर का आख़िरी दिन आ गया , एक और साल बीतने को है। बीतते साल के साथ जिेंदगी भी लगता है भाग रही है । हमें लगता है अभी बहुत समय है पर ऐसे ही जिंदगी बीत जाती है। इंसान केवल देख सकता है बंद आँखों से , क...
Shreesh Pathak
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नाम इलाहाबाद ...!समय कभी नहीं रुकता, अपनी गति से भागता रहता है । समस्त बदलावों को आत्मसात करते हुये। इसी भागते निष्ठुर समय के साथ मेरा शहर इलाहाबाद से प्रयागराज बना दिया गया, और देखते ही देखते इस बदलाव को जनता ने स्वीकार भी कर लिया। पता नहीं क्यों मगर मैं इस बदलाव...
Shreesh Pathak
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इलाहाबाद और सिनेमा स्कूल की दहलीज़ लाँघने और कॉलेज कैम्पस मे क़दम रखते ही मेरे जीवन मे जो सबसे बड़ा परिवर्तन आया ,  वह था बिंदास फ़िल्में देखने की आज़ादी ...  इसको आज़ादी कहने के पीछे भी एक वजह है ....स्कूल मे पढ़ते समय आप हमेशा एक दायरे मे रहते...
Shreesh Pathak
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युनिवर्सिटी रोड ...श्री अंजनी पांडेय इलाहाबाद का नाम आये और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की चर्चा ना हो ...ऐसा तो हो ही नही सकता...और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम आये और यूनिवर्सिटी रोड की चर्चा ना हो ...ऐसा तो किसी कीमत पर नही हो सकता....। कुछ तो है इस रोड पर ...जो सु...