ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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जिंदगियाँ निगल रहा प्रदूषण  क्यों पवन पर प्रतंच्या चढ़ाया है कभी अंजान था मानव इस अंजाम से आज वक़्त ने फ़रमान सुनाया है चिंगारी सोला बन धधक रही मानव !किन ख्यालों में खोया हैवाराणसी सिसक-सिसक तड़पती रही आज...
PRABHAT KUMAR
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 बेखबर होकर मंज़िल ढूंढता रहा रात भर, जाने किस अंजाम पर पहुंच गयायाद आने लगी महीनों बीतें दास्तां की, बिछुड़कर प्रेमिका के पास आ गयाकिसी दिन मोहब्बत सजती रही होठों पर, गले मिला और बेचैन हो गयाआखों में नमी देखकर चाहत की, धुँधले से नज़ारे और उसमें मैं खो गयाइश्क़ के...