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sanjiv verma salil
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सरस्वती वंदनाअंजुमन 'आरज़ू'आधार छंद,-पीयूष वर्ष छंदमापनी 2122 2122 212*शारदे यश विद्या बुद्धि ज्ञान दे ।पर तनिक भी मत हमें अभिमान दे ॥श्री कलाधारा सुनासा वरप्रदा ।शारदा ब्राह्मी सुभद्रा श्रीप्रदा ।भारती त्रिगुणा शिवा वागीश्वरी ।गोमती कांता परा भुवनेश्वरी ॥1॥पुण्य इ...
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जो पीड़ा में मुस्काता है, वही सुमन होता हैनयी सोच के साथ हमेशा, नया सृजन होता हैजब आतीं घनघोर घटायें, तिमिर घना छा जाताबादल छँट जाने पर निर्मल, नीलगगन होता हैभाँति-भाँति के रंग-बिरंगे, जहाँ फूल खिलते होंभँवरों का उस गुलशन में, आने का म...
DHRUV SINGH  "एकलव्य"
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