ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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व्यावहारिक रूप से हमने भले ही आज़ादी सन 1947 में पाई हो मगर हम एक तरह से  30 दिसंबर 1943 को ही आजाद हो गए थे. यह दिन शायद बहुत से देशवासियों को स्मरण भी न हो मगर सत्य यही है कि इसी दिन इस देश के एक क्रांतिकारी बेटे ने स्वतंत्र भारत के रूप में राष्ट्र ध्वज फहराय...
Krishna Kumar Yadav
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वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित पुस्तक "भारत के आदिवासी : चुनौतियाँ एवं सम्भावनाएँ" प्राप्त हुई। इस पुस्तक में मेरा लेख "अस्तित्व के लिए जूझते अण्डमान-निकोबार के आदिवासी" भी शामिल है। पुस्तक के सम्पादक डॉ. जनक सिंह मीना, असिस्टेंट प्रोफेसर, जयनारायण व्यास व...
kumarendra singh sengar
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कोई काम पहली बार किया जा रहा हो तो उसमें उत्साह, उमंग, रोमांच जैसी अनुभूति होती है. कुछ ऐसा ही हमारे साथ हो रहा था. पहली बार अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की यात्रा और पहली बार ही हवाई-यात्रा करने का अवसर हाथ आने वाला था. टिकट की बुकिंग से लेकर उसकी अन्य औपचारिकताओं के...
kumarendra singh sengar
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कार से उतरते ही सबसे पहले आँखों के आगे चार पानी के जहाज सजे हुए नजर आये. एक समुद्री तट के ठीक किनारे और बाकी तीन किनारे से थोड़ा दूर. चारों ओर अँधेरा और उस अँधेरे को चीरते जहाजों की रौशनी समुद्री लहरों के साथ अजब-अजब सी आकृतियाँ बना रही थी. दिन में नीला दिखाई देने व...
kumarendra singh sengar
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अंडमान-निकोबार की नीले समुद्री जल और नैसर्गिक प्राकृतिक सुन्दरता को दिल-दिमाग में अभी पूरी तरह बसा भी नहीं पाए थे कि वहाँ से वापसी का दिन दिखाई देने लगा. लौटने से पहले उस जगह को देखने का कार्यक्रम बना जिस जगह के बारे में पहले दिन से सुनते आ रहे थे. वो जगह थी बाराटा...
kumarendra singh sengar
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पोर्ट ब्लेयर में दो दिन की घूमा-फिरी के बाद समुद्र किनारे सजे-सजाये खड़े तीन जहाजों के अद्भुत दृश्य को आत्मसात करते हुए देर रात तक बिटिया रानी के जन्मदिन की पार्टी और फिर सुबह-सुबह हैवलॉक द्वीप को चल देना. अंडमान-निकोबार में जल्दी सूर्योदय होने के कारण सुबह छह बजने...
kumarendra singh sengar
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सेलुलर जेल, जहाँ एक तरफ अंग्रेजी शासन में अमानवीय यातनाओं का केंद्र रहा वहीं दूसरी तरफ आज आज़ाद भारत में क्रांतिकारियों के तीर्थस्थल के रूप में पहचाना जा रहा है. ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए, जो देश की आज़ादी में न्योछावर हो चुके क्रांतिकारियों के प्रति आदर-सम्मान का भ...
kumarendra singh sengar
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अंडमान निकोबार की यात्रा करने की इच्छा बहुत लम्बे समय से मन में थी. इसके मूल में एकमात्र कामना पोर्ट ब्लेयर स्थित सेलुलर जेल के दर्शन करना रहा था. जिस स्थान में देश की आज़ादी के दीवानों ने ज़ुल्म सहकर भी उफ़ तक नहीं की, उस स्थान के दर्शन करने की उत्कंठा सदैव से मन में...
Akshitaa (Pakhi)
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 120वीं जयंती पर शत-शत नमन। 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा" का आह्वान करने वाले नेताजी की यह प्रतिमा पोर्टब्लेयर (अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह) में मरीना पार्क में लगी है। कुछ समय के लिये यह द्वीप नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आज़ाद हिन...
Krishna Kumar Yadav
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आदिवासी जनजातियों के मानवाधिकारों के प्रति लोक के मन में सहानुभूति के भाव को जाग्रत करने के लिए उनकी जीवन सम्बन्धी चुनौतियों पर विचार करने की महती आवश्यकता को मद्देनजर रख जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर एवं एम.वी. संस्थान, जोधपुर के संयुक्त प्रयासों से दो दिव...